गुस्ताखी माफ-63 तो सुपारी और पीले चावल लेकर घूम रहे हंै…टेंशन लेने का नई… अरुण ही है…
63 तो सुपारी और पीले चावल लेकर घूम रहे हंै...
अंतत: निकाय चुनाव की वास्तविक स्थिति दिखाई देने के बाद जहां उन भाजपाइयों के दिल छलनी-छलनी हो गए हैं, जो हर दूसरे दिन पार्षद होने के ख्वाब देखा करते थे। अब यह चुनाव नई सरकार के आने के बाद ही…
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