Sulemani chai – मोर्चे की सवारी…53 से फिर ताल…टिफिन बांधकर काम पर…

मोर्चे की सवारी... शहर के मुस्लिम इलाके के एक साहब हैं, जिनके जज़्बात अक्सर रात होते-होते सोच के पैमाने से बाहर छलकने लगते हैं। साहब को हर वक्त किसी न किसी ओहदे की सवारी का इंतज़ार रहता है। बड़े ख्वाब हैं, मगर घर के पास वाली कमेटी भी…
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