गुस्ताखी माफ़: नाथ के नए डॉक्टर…कहीं बन रहे कहीं बिगड़ रहे…

नाथ के नए डॉक्टर... इन दिनों कांग्रेस में इस कान से उस कान खबर चल रही है। हालांकि इसका इस्कान से कोई लेना-देना नहीं है, पर कान ही कान बता रहे हैं कि कमलनाथ ने अब अपने लिए नए आंख-कान-गला विशेषज्ञ नियुक्त कर दिए हैं। इसके पूर्व उनके…
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गुस्ताखी माफ़: बीच सभा मलाई मारकर ले गए दादा….फरमान जारी होते ही….कल्चर के नाम पर नाइट…

बीच सभा मलाई मारकर ले गए दादा हुकुमचंद मिल के मजदूरों का मामला अब जमीनी आधार पर भले ही अभी कमजोर हो, पर अभी सपने में दाल-बाफले पूरी कटोरी घी डालकर खाने में कोई दिक्कत नहीं है। इधर, नगर निगम महापौर द्वारा किए गए ऐलान के बाद मिल मजदूरों…
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गुस्ताखी माफ़: मेरा टेसू अब नहीं अड़ा और ना ही मांगे अब खाने को दहीबड़ा…

मेरा टेसू अब नहीं अड़ा और ना ही मांगे अब खाने को दहीबड़ा... भाजपा में भले ही संगठन अब अगले साल की चुनावी तैयारियों का दावा कर रहा हो, परंतु दूसरी ओर उम्रदराज हो रहे नेताओं का भाजपा से मोह लगभग खत्म हो गया है। कहावत है मेरा टेसू नहीं अड़ा…
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गुस्ताखी माफ़: दु:खी और त्यागे कांग्रेसियों की सुनवाई शुरू…

दु:खी और त्यागे कांग्रेसियों की सुनवाई शुरू... इन दिनों इंदौर में कांग्रेस के नगर और ग्रामीण अध्यक्ष पर मेहरबान और पहलवान वाला समीकरण बिगड़ रहा है। इसके चलते लंबे समय से गरीब कांग्रेसी जो दुआएं मांग रहे थे, उसके पूरी होने की संभावना अब…
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गुस्ताखी माफ़: और सब खड़े-खड़े गुबार देखते रहे….कथा के पहले महाभारत की तैयारी….नगर अध्यक्ष…

और सब खड़े-खड़े गुबार देखते रहे.... bjp indore latest news सांवेर में लम्बे समय से एक बेहतर उद्यान की राह देख रहे नागरिकों को आज सौगात मिलने जा रही है। दूसरी ओर यहां भाजपा के कई दिग्गज नेता यह मानकर चल रहे थे कि इस उद्यान का नामकरण सांवेर…
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गुस्ताखी माफ़: दीदी को रास नहीं आया रात्रिकालीन कल्चर…

दीदी को रास नहीं आया रात्रिकालीन कल्चर... usha thakur शहर की संस्कृति पर लग रहे दाग के बाद अब उषा दीदी को भी संस्कृति की चिंता तीन-चार घटनाओं के बाद होने लगी है। रास्ते में करोड़ों की कार में वस्त्रहीन हो रही बहन, भाई से लड़ रही है तो चार…
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गुस्ताखी माफ़: क्या कहें, ना खुदा न मिले …. या फिर न घर के ना घाट के… चाल मिल गई….

क्या कहें, ना खुदा न मिले .... या फिर न घर के ना घाट के... (kamlesh khandelwal indore) इन दिनों भाजपा और कांग्रेस दोनों की संस्कृति एक जैसी दिखाई देने लगी है। दोनों को ही एक दूसरे के घर से भागी हुई या निकाली हुई को लुभाने की ऐसी होड़ चल…
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गुस्ताखी माफ़ – कहीं पे निगाहें, कही पर निशाना….फील गुड में चल ही रहा है काम…आखिर…

कहीं पे निगाहें, कही पर निशाना इ न दिनों महू की विधायक और मंत्री उषा दीदी के बोले शब्द बाजार में घूमना शुरू हो गए हैं। उन्होंने इस बार बड़ी अदावत से क्षेत्र के कार्यकर्ताओं से फिर कहा कि वह तो अपने पुराने क्षेत्र में वापस जाना चाहती हैं।…
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गुस्ताखी माफ़- ताई की मांद में पत्थर कौन फेंककर आया …

ताई की मांद में पत्थर कौन फेंककर आया ... इ स समय शहर का आम नागरिक यह नहीं समझा पा रहा है कि जो वह इस समय शहर में जो देख रहा है, वह विकास के नाम पर भूखों के खाने की व्यवस्था हो रही है या अधिकारियों के ब्रह्म भोज की। विकास की रोशनी आंखों…
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