गुस्ताखी माफ़- अब मिठास कड़वी हुई…चलने लायक नहीं रहे…

अब मिठास कड़वी हुई... (गुस्ताखी माफ़) नए-नए महापौर अब धीरे-धीरे शहर के नेताओं को समझने में सफल हो रहे हैं। ऐसे में उन्होंने अब कुछ नेताओं से अपनी दूरी बनाना शुरू कर दी है। जहां पहले रिश्तों की चाशनी ऐसी गाढ़ी दिखाई देती थी कि लोगों को लगता…
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गुस्ताखी माफ़: (Umesh Sharma) सत्ता की फसल में उगे नेताओं ने जमीनी कार्यकर्ता को गला दिया

(गुस्ताखी माफ़: Umesh Sharma) भाजपा का जांबांज नेता जो भाजपा की नई संस्कृति और संस्कार की भेंट अंतत: चढ़ गया। भाजपा के जमीनी कार्यकर्ता का इस तरह जाना उन तमाम स्थापित नेताओं के लिए भी एक सबक है, जो तमाम रायशुमारी और कार्यकर्ताओं की पहचान…
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गुस्ताखी माफ़: आईए… कुछ समय तो गुजारिये नंदा नगर की गलियों में, गणेशजी और रमेशजी के साथ

(ramesh mendola) इन दिनों आपको इस क्षेत्र के विराट रूप के दर्शन तो होंगे ही, साथ ही आपको लगेगा कि किसी महोत्सव में शामिल हो रहे हैं। किसी जमाने में जब लोग महेश्वर में विद्वान और वैदो के ज्ञाता मंडन मिश्र के आश्रम पर जाते थे, तो…
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गुस्ताखी माफ़-जमीनी नेता अब जमीन पर दिखाई देंगे, अपनों ने ही आग लगाई…जलवा पूजन बंद…हिसाब…

जमीनी नेता अब जमीन पर दिखाई देंगे इन दिनों भाजपा के जीते और हारे नेताओं के मन में अगले विधानसभा चुनाव को लेकर भले ही लड्डू फूट रहे हों, रात को विधायक होने के सपने आ रहे हों, पर इस बार जो समीकरण संगठन स्तर पर बन गए हैं, वह बता रहे हैं…
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गुस्ताखी माफ़: दूध से जले नहीं पर छाछ भी फूंक-फूंक कर पी रहे हैं…बड़े फेरबदल के साथ उतरेंगे नए…

दूध से जले नहीं पर छाछ भी फूंक-फूंक कर पी रहे हैं... अंतत: महापौर परिषद में विभागों की रेवड़ी बंट ही गई। लम्बी खींचतान और ज्ञान धरा रह गया, परंतु अभी भी महापौर हर कदम फूंक-फूंक कर रख रहे हैं। इसका कारण यह है कि पुराने महापौर जितने भी रहे…
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गुस्ताखी माफ़:जो चिराग थे वे चिरान हो गए….झकाझक के साथ गलियारे में झाग ही झाग…

जो चिराग थे वे चिरान हो गए.... किसी जमाने में जिनके चिराग पूरे प्रदेश में जलते थे अब उनकी हालत भाजपा की नई राजनीति में कुछ इस प्रकार से हो गई है कि उन्हें मालवा निमाड़ के नए संगठन प्रभारी अजय जामवाल के सामने कुछ इस प्रकार अपना दर्द बताना…
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गुस्ताखी माफ़: बस यूं ही…पंडित की राऊ से चुनावी तैयारी…विनय बाबू के चेहरे से हवाइयां…

बस यूं ही... एक सफल राजनेता को हर कदम पर सफलता पाने के लिए पहले चरण में असीम, नायाब, अनंत और शाश्वत साथ लगता है। धीरे-धीरे उसके पैर राजनीति की जमीन पर जमने लग जाते हैं। ऐसा राजनेता चाहता है वह शहर और समाज में राजनीति करते हुए भी साख…
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गुस्ताखी माफ़-जमीनी नहीं जमीन से जुड़े नेता की कदर होगी…सोचना पड़ेगा…मलाईदार में मलाई…

जमीनी नहीं जमीन से जुड़े नेता की कदर होगी... इन दिनों कांग्रेस में इतना ज्यादा घालमेल हो रहा है कि यह समझ नहीं आ रहा कि राजनीति का व्यापार हो रहा है या व्यापार की राजनीति हो रही है। ऐसा लग रहा है कांग्रेस को चलाने का काम भी धीरे-धीरे…
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गुस्ताखी माफ़-अधिकारी बोले राम नाम जरा खंभा बचाकर…एमआईसी में अब भारी खींचतान में बड़े नेता…

अधिकारी बोले राम नाम जरा खंभा बचाकर... शहर में अवैधानिक काम होना तो जरा कठिन है पर वैधानिक काम होना उससे भी ज्यादा कठिन, क्योंकि हर काम में दाल-भात के मूसर चंद किस प्रकार रायता फैलाते हैं, यह इसका सबसे बेहतरीन उदाहरण है। मजेदार बात यह है…
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गुस्ताखी माफ़- हुकुमचंद में सरकार की झांकी…उषा दीदी 1 और 3 में भरतपुरी…नगर निगम के भाग्य…

हुकुमचंद में सरकार की झांकी... गणेश उत्सव पर इस बार फिर सरकार और शहर के नागरिकों के सहयोग से परंपरा को बचाने का बीड़ा उठाने वाले मजदूर फिर मैदान में आ गए हैं। पिछले दो साल से झांकियां कोरोना काल के कारण नहीं निकल पाई थीं। इस बार कड़े…
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