गुस्ताखी माफ़- अब मिठास कड़वी हुई…चलने लायक नहीं रहे…

gustakhi maaf
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अब मिठास कड़वी हुई…

(गुस्ताखी माफ़) नए-नए महापौर अब धीरे-धीरे शहर के नेताओं को समझने में सफल हो रहे हैं। ऐसे में उन्होंने अब कुछ नेताओं से अपनी दूरी बनाना शुरू कर दी है। जहां पहले रिश्तों की चाशनी ऐसी गाढ़ी दिखाई देती थी कि लोगों को लगता था, यह चाशनी शहद से भी भारी है। परंतु अब समय के साथ गुरु गुड़ होते गए और चेले शकर हो गए। परिणाम यह हुआ कि पुराने तीन महापौर के पुलंदे आज भी ईडी और लोकायुक्त में पुर्नजन्म के लिए तैयार रखे हैं। समय के साथ प्रसव पीड़ा शुरू होते ही पुलंदों के कागज जमीन पर जन्म लेने लगेंगे। महापौर खुद भी उच्च न्यायालय में इन पुलंदों को लेकर अदालती डॉक्टरी जांच से वाकिफ रहे हैं और वे नहीं चाहते हैं कि अच्छी खासी जवानी में शुरू हुई राजनीति बुढ़ापे में भारी पड़ने लगे। और इसीलिए उन्होंने इन नेताओं से अब दूरी बना ली है। दिख भी रहा है कि अब फाइलें बनने से पहले छनने भी लगेगी।

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चलने लायक नहीं रहे…

गुस्ताखी माफ़
gustakhi maaf

राहुल गांधी की पदयात्रा के लिए इंदौर के नेता अपने आपको तैयार नहीं कर पा रहे हैं तो दूसरी ओर कुछ उम्रदराज कांग्रेसी पदयात्रा के मध्यप्रदेश में प्रदेश के पहले उनके साथ चलने की तैयारी कर रहे हैं। यह वो नेता हैं जो 80 से 90 के बीच इंदौर की राजनीति में सक्रिय रहे। इस मामले में तैयारी कर रहे एक बुजुर्ग नेता ने कहा जितना चलते बनेगा चलेंगे। लम्बे समय बाद कोई गांधी फिर से पैदल सड़क पर उतरा है। उन्होंने यह भी कहा कि इंदौर के कांग्रेस के निठल्ले नेताओं की हालत रीगल टाकिज पर मुफ्त का दाना चुग रहे कबूतरों जैसी है कि वे अब दो किलोमीटर भी चलने लायक नहीं रह गए हैं।

(गुस्ताखी माफ़)

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