गुस्ताखी माफ़-अधिकारी बोले राम नाम जरा खंभा बचाकर…एमआईसी में अब भारी खींचतान में बड़े नेता उतरे…बाल बांका नहीं हुआ होटल का…

अधिकारी बोले राम नाम जरा खंभा बचाकर…

शहर में अवैधानिक काम होना तो जरा कठिन है पर वैधानिक काम होना उससे भी ज्यादा कठिन, क्योंकि हर काम में दाल-भात के मूसर चंद किस प्रकार रायता फैलाते हैं, यह इसका सबसे बेहतरीन उदाहरण है। मजेदार बात यह है कि ऐसे मामलों में दोनों ही दल के चट्टे-बट्टे भी एक हो जाते हैं। भले ही काम अभिजीत मुहूर्त में करवाने की कोशिश करो तो मंजूर भी होना चाहिए। मामला कुछ ऐसा है कि आड़ा बाजार में एक दुकान के सामने लगे बिजली के खंभे को हटवाने के लिए दुकानदार ने मशक्कत कर बिजली कंपनी के अधिकारियों से आग्रह करने के बाद विधिवत आवेदन दिया।

आवेदन में आड़ा बाजार की दुकान, जो मनमंदिर के नाम से है, उसी दुकानदार ने उक्त खंभे को सामने अपनी ही दुकान के लगवाने के लिए सहमति दे दी। इसके लिए बिजली कंपनी से बने स्टीमेट 35521 रुपए का चार्ज भी भरकर ठेकेदार को काम दे दिया। क्षेत्र के कांग्रेस और भाजपा के विघ्न संतोषी नेता, जिनका इस लाइन से कोई लेना-देना नहीं, इसी क्षेत्र में नजरें रखते हैं, उन्हें लगा कि बिना हमारी सुविधा-शुल्क के कार्य कैसे हो रहा है। एक बाबा के करीबी तो एक पेलवान के करीबी। सवा लाख का सुविधा-शुल्क मांग लिया। बिजली कंपनी ने भी हाथ खींच लिए और उखाड़ा हुआ खंभा वहीं लगाने के लिए वापस कह दिया। अब यह मामला मुख्यमंत्री हेल्पलाइन में भी चला गया है। दुकानदार का कहना है पैसे देने के बाद भी ईमानदारी का काम नहीं हो रहा है। गैर-कानूनी की तो बात ही अलग है। जो भी हो, आड़ा बाजार में एक ही आवाज आ रही है- राम नाम… जरा खंबा बचा के।

एमआईसी में अब भारी खींचतान में बड़े नेता उतरे…


खींचतान के बाद भी एमआईसी के गठन को लेकर मामला कुछ ऐसा हो गया है कि मेरा टेसू यहीं अड़ा, खाने को मांगे दहीबड़ा। हर बड़े नेता के दहीबड़ों के कारण एमआईसी में रायता फैल रहा है। ऐसा लग रहा है एमआईसी नहीं, सर्व ब्राह्मण समाज की परिषद बनने जा रही है। सबके अपने-अपने गणित यहां पर दिखाई दे रहे हैं। महापौर पहले से ही ब्राह्मण हैं तो क्षेत्र क्रमांक एक में अश्विनी शुक्ला के लिए केंद्रीय मंत्री नरेंद्रसिंह तोमर के टेसू बने हुए हैं। उन्होंने नए चड्ढी-बनियान भी तैयार कर लिए हैं तो दूसरी ओर इसी क्षेत्र के मनोज मिश्रा मामा और मामी के सौजन्य से नाम आना ही हैं तो क्षेत्र क्रमांक तीन में कैलाशजी के खास सिपहसालार मनीष मामा का नाम भी तय माना जा रहा है तो भाजपा के विघ्न संतोषी मामा की पूरी फाइल ही पहुंचा चुके है। यह बीड़ा किसी रमेश महाजन ने उठा रखा है। इधर मामा को नींद में भी एमआईसी में अपनी कुर्सी दिखाई दे रही है तो वी.डी. शर्मा के सौजन्य से चुनावी मैदान में सत्यनारायण की कथा और फिर महाभारत करने के बाद बबलू शर्मा को तो आना ही है, परंतु जीतू जिराती और मधु वर्मा बाल्टी में दही लेकर घूम रहे है।

दो ब्राह्मण और भी ऐसे हैं, जो परिषद में कहीं और से दांव-पेच रहे हैं। वैसे भी इन दिनों भाजपा में ऊपर से आने में ज्यादा आसानी दिखाई दे रही है। इधर प्रधानमंत्री से लेकर मुख्यमंत्री तक कह रहे हैं कि महिलाओं को अधिक से अधिक अवसर दिए जाएं। भाजपा खुद यह ढोल पीट रही है कि महिलाओं को अधिक से अधिक जगह दी जाएगी। ऐसे में अब तीन महिलाएं तो लेना ही पड़ेंगी कंचन गिदवानी के लिए इस बार शंकर ने इतने कंकर डाल दिए है कि खुद क्षेत्र की विधायक को मैदान में उतरना पड़ा। दूसरी महिला भी तय ही है, बस इशारे की जरूरत है। कुल मिलाकर एमआईसी के दस पदों में से पांच पर ब्राह्मण दिखाई दे रहे हैं तो बाकी पर बचे हुए नौनिहाल। जो भी हो, इस बार माथापच्ची खूब हो रही है। इसके बाद भी जगह बच गई तो फिर राजेंद्र राठौर, राजेश उदावत, नंदू पहाड़िया, योगेश गेंदर, निरंजनसिंह चौहान के नंबर लगेंगे।

बाल बांका नहीं हुआ होटल का…

पिछले दिनों खंडवा रोड पर ग्राम ग्वालू में एक होटल पर कांवड़ भक्तों की हुई बर्बर पिटाई के मामले में भाजपा के बड़े नेताओं के साथ ही धर्म की राजनीति करने वाले भी पूरी तरह मौन बने हुए हैं। कोई और होटल होता तो अभी तक ठिये-पाए लग गए होते।

भाजपा तो भाजपा, कांग्रेस के दिग्गज भी इस होटल में हुई मारपीट को लेकर पूरी तरह मौन हैं। कारण कि बात करेंगे तो फिर वही होगा कि बात निकलेगी तो दूर तलक जाएगी। न होटल का कुछ बिगड़ना है और न होटल के कर्मचारियों का। अगले कुछ दिनों में सब ठंडा हो जाएगा।

-9826667063

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