Gustakhi Maaf: यार… हम कुत्ते है इंसान नहीं कुछ तो कर ही रहे हैं…
Gustakhi Maaf
यार… हम कुत्ते है इंसान नहीं कुछ तो कर ही रहे हैं…
एक बार फिर नगर में बंगलों में रहने वाले धनाड्य पारिवारिक कुत्तों पर भी जुर्माने का संकट आ गया है। पिछले दिनों महापौर जब विहार कर रहे थे उन्होंने देखा धनाड्य परिवार का कुत्ता सडक़ किनारे मालिक के साथ गंदगी फैला रहा है तत्काल आदेश देकर जुर्माना वसूला गया इसे लेकर बंगलों में रहने वाले तमाम कुत्तों के बीच नई चर्चा शुरु हो गई है। कुछ का कहना है कि हम तो दिनभर में एकाध बार ही घूमने के लिए निकल पाते हैं पूरे बंगले की जवाबदारी और नजरें रखने से ही फुर्सत नहीं हो पाते। घर, मोहल्ले में हमारा बड़ा सम्मान है। सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि जिन कुत्तों को राजनैतिक संरक्षण मिला हुआ है और चौराहों पर बैठकर बिना बात के बतियाते रहते है रात दो बजे तक पूरे मोहल्ले के लिए आवाज लगा लगाकर अपने उपस्थित होने का परिचय देते रहते हैं इन पर कोई कार्रवाई क्योंनहीं होती। जरा भी हाथ लगाया तो जमाने भर से बचाने वाले ऐसे कूद पड़ते हैं जैसे महाभारत शुरु हो गई हो। सबसे पहले तो इन्हीं पर कार्रवाई होना चाहिए। आधे शहर की गंदगी साफ हो जाएगी। इस मामले में सडक़ों पर अपना सामराज्य स्थापित करने वाले कुत्तों ने निर्णय लिया है कि थोड़े थोड़े दिनों में हर किसी के कहने सेहमारे को ही निशाना बनाया जाता है जबकि पूरी रात कई क्षेत्रों में हमारे कारण ही लोग आराम से सोते हैं। इस मामले में कुत्तों ने एक बड़ा अधिवेशन बुलाने के लिए भी विचार किया गया और कहा गया कि नगर निगम को तत्काल अधिवेशन में आने वाले तमाम कुत्तों के लिए पानी के साथ कम से कम २० से ३० खंबों की व्यवस्था भी करना चाहिए इससे अधिवेशन स्थल पर दिक्कत नहीं हो। हालांकि इस मामले से गायों और भैसों ने अपने आप को अलग कर रखा है उनका कहना है कि आप बताईये हमारे से तो फिर भी कुछ न कुछ मिलता ही था इनसे तो कुछ भी नहीं मिलता और आबादी तेजी से बढ़ा रहे हैं। अब यह मामला खंडपीठ तक भी जा सकता है। देखना होगा इस बार कौन भारी पड़ेगा?
तिरछी टोपी परेशान
छन-छन कर खबर आ रही है। राज्य सरकार के खाली निगम मंडलों में नियुक्तियों का दौर जारी है और इंदौर से पूर्व विधायक तिरछी टोपीवाले सुदर्शन गुप्ता मुख्यमंत्री से मिलने पहुंचे थे तो दो घंटे बाद भी मिलने का समय नहीं मिला और मुख्यमंत्री किसी जरुरी काम के चलते बिना मिले निकल गए। इधर अब माना जा रहा है अगले दो-तीन महीने तो इंदौर का कुछ नहीं होना है।
जब सुमित आए तो सहम गए
सयाजी होटल में पिछले दिनों सामाजिक मध्यस्थता केंद्र के कार्यक्रम में यू तो विभिन्न समाज के गिने चुने लोगों को बुलाया गया था और मजिस्ट्रेट, न्यायाधीश अतिथि बतौर और पुलिस कमिश्नर, कलेक्टर से लेकर अधीनस्थ भी आए पर वहां पहुंचे भाजपा नगराध्यक्ष को मालूम पड़ा कि मंच पर न्यायाधीश बैठेंगे, उन्हें नीचे ही बैठना पड़ेगा। ऐसे में सुमित मिश्रा मुंह लटकाए निकल गए, का करें अब आदत ही नहीं रही ज्ञान लेने की। बिना बात के ही दिन भर ज्ञान देता पडता है। ऐसे भी ज्ञान होना और दिखाने में बड़ा फर्क होता है।