गुस्ताखी माफ़-न भाजपा के तेवर रहे न कार्यकर्ता के जेवर रहे…
न भाजपा के तेवर रहे न कार्यकर्ता के जेवर रहे...
भाजपा के नेतृत्व में यह मान लिया है कि राजनीतिक सत्ता के लिए भाजपा में शामिल होते ही सब गंगा की तरह पवित्र हो जाते हैं। दूध के धुले हुए तो वह कांग्रेस में भी थे ही। पांच साल पहले…
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