न भूकंप आया, ना धरती हिली लेकिन सदर बाजार मलबे में तब्दील
कई मकान पूरे ढह गए, अगली कार्रवाई इंदौर वायर से कंडीलपुरा तक

इंदौर (सुधीर शुक्ला)
छावनी जिंसी शंकरगंज में मार्जिनल ओपन स्पेस (एओएस) पर बने मकानों में तोडफ़ोड़ के बाद नगर निगम ने नगर विकास योजना 2021 के नाम पर सदर बाजार की पहले से ही चौड़ी सडक़ को और चोड़ी करने के लिए 15 जून को कार्रवाई की है सदर बाजार मैन रोड से नाले तक हुई कार्यवाही के जिस एक हिस्से में तोडफ़ोड़ हुई है वहां निर्धारित 60 फीट से 2 फीट कम यानी 58 फीट की सडक़ को चोड़ी करने के नाम पर यहां के पूरे मकान ही ढहा कर मलवे में तब्दील कर दिए गए है। सदर बाजार नाले से गुटकेश्वर पुल तक अवश्य सडक़ बेहद सकरी थी क्योंकि एमओएस पर मकान बने हुए थे रह वासियों को वैकल्पिक व्यवस्था के लिए महज 31 घंटे का समय दिया गया।
कार्रवाई के बाद नगर निगम का अमला कई मकानों में झूलते लोहे के सरिया में लटकती ईंटें और आधे टूटे बीम छोडक़र चलता बना खतरनाक तरीके से झूलती ईंट लटकती बीमऔर सरियो को निकालने के लिए रहवासी अपने साधनों से हटाने में जुटे हुए हैं. अब अगली कार्यवाही सुभाष हायर सेकेंडरी स्कूल से लेकर इंदौर वायर फैक्ट्री तक कंडीलपुरा कहीं जाने वाली सडक़ पर होना प्रस्तावित बताई जा रही है।नगर निगम ने योजनाबद्ध तरीके से तीनों ही स्थान छावनी,जिंसी-शंकरगंज और सदर बाजार मैं उस समय कार्रवाई की जब कोर्ट में ग्रीष्मकालीन अवकाश चल रहा था हालांकि पूर्व में भी निर्माण हटाने के संदर्भ में दावे आपत्तियों मंगा कर नोटिस दिए जा चुके थे और 15 जून को जब कोर्ट खुली तब तक नगर निगम आधे से ज्यादा मकानों को ध्वस्त कर चुका था दरअसल इतनी जल्दी की वजह सुभाष मार्ग सहित 23 सडक़ों को लेकर कोर्ट में लगी याचिका बताई जा रही है।

तोडफ़ोड़ से जुड़ी कुछ अंतर कथाएं भी चर्चाओं में
सूत्रों के मुताबिक इस सडक़ को बनाने के पीछे मरीमाता चौराहे पर फ्लाई ओवर को बनाने से रोकना भी है ताकि वहां के कुछ प्रभावशाली लोगों की संपत्ति को बचाया जा सके. दूसरी चर्चा यह है कि सदर बाजार मैंन रोड पर जहां पांच रास्ते मिलते हैं वहां से सडक़ चौड़ी होकर सदर बाजार नाले तक ले जाने का प्रस्ताव था इसका एक रास्ता बक्क्षीबाग की ओर जाता है लेकिन यहां भी कुछ प्रभावशाली लोगों के एमओएस पर बने करीब 15 मकानों को फायदा पहुंचाने के लिए इस प्रस्ताव को खारिज कर दिया गया जबकि नगर निगम ने यहां चौराहा बनाने की प्रस्तावित रूपरेखा भी तैयार कर ली थी मगर उच्च स्तरीय हस्तक्षेप के बाद फ्लावर तथा चौराहा दोनों की योजना स्थगित करते हुए डेड एंड से नाले तक के लगभग 30 मकान को तोडक़र पहले से चौड़ी सडक़ और भी चौड़ी करने का फैसला किया गया क्योंकि यहां पर साधारण परिवार रहते हैं। .