गुस्ताखी माफ़-मुख्यमंत्री को लेकर पेंच…दयालु के कौन से जादूगर आएंगे….संजू बाबू एक से कल्टी की तैयारी में…

सांवेर दंगल में सोनकर के दांव से सिलावट निपट गए...अरुण यादव की चलेगी....

मुख्यमंत्री को लेकर पेंच…

नए महापौर के शपथ ग्रहण समारोह में मुख्यमंत्री के आगमन को लेकर कुछ व्यवधान दिखाई दे रहे हैं। प्रशासनिक सूत्र भी मान रहे हैं कि मुख्यमंत्री का आना कठिन होगा। शपथ ग्रहण समारोह में महापौर और पार्षदों को शपथ दिलाने को लेकर अधिसूचना जारी की जा चुकी है, जिसमें कलेक्टर ही शपथ दिलवाएंगे। ऐसे में मुख्यमंत्री के पास सामने सोफे पर बैठकर समारोह को देखने के अलावा कोई और कार्य नहीं रहेगा। इसकी बजाय शहर में चालू हो रहे विकास कार्यों की श्रृंखला का शिलान्यास वाले कार्यक्रम में आने पर उनका प्रभाव भी रहेगा। वहीं सबसे बड़ा पेंच यह भी है कि यदि वे इंदौर के कार्यक्रम में शामिल होते हैं तो फिर उन्हें अन्य नगर निगमों के कार्यक्रमों में भी जाना होगा। अभी तक प्रदेश में इसकी कोई परंपरा नहीं रही है। उज्जैन, सागर और बुरहानपुर के लिए भी मुख्यमंत्री को लाने के प्रयास शुरू हो गए हैं। अब इन सबके बाद भी यदि भार्गवजी मुख्यमंत्री को उठा लाए तो मानना पड़ेगा। इसलिए उम्मीद लग रही है कि शपथ ग्रहण समारोह प्रभारी मंत्री और कैलाश विजयवर्गीय के मागदर्शन में ही हो जाएगा।

दयालु के कौन से जादूगर आएंगे….

एमआईसी को लेकर पूरे शहर में विधायकों के द्वार इन दिनों लंबे-चौड़े समीकरण बन रहे हैं। सबसे ज्यादा सभापति के पद को लेकर क्षेत्र क्रमांक दो और क्षेत्र क्रमांक चार के बीच दांव-पेंच चले जा रहे हैं, वहीं वरिष्ठ पार्षदों में राजेंद्र राठौर और मुन्नालाल यादव के नाम चलाए जा रहे हैं। मुन्नालाल को लेकर दादा दयालू कतई पक्षधर नहीं रहेंगे। वे राजेंद्र राठौर को लेकर फिर भी सहमति दे सकते हैं। मुन्नालाल और दादा दयालू के बीच रिश्तों में लंबी खटास चल रही है। मुन्नालाल लंबे समय से दादा दयालू के द्वार भी नहीं जा रहे हैं। ऐसे में ले-देकर गेंद राजेंद्र राठौर के पास ही जाएगी। हालांकि राजेंद्र राठौर खुद भी जानते हैं कि यह पद किसी काम का नहीं है। इसकी बजाय वे एमआईसी में रहना ज्यादा पसंद करेंगे। दूसरी ओर दादा दयालू की ओर से जीतू यादव और पूजा पाटीदार के नाम एमआईसी में जाना तय है। जो भी हो, एमआईसी का गठन भी पंद्रह अगस्त के बाद ही होने के आसार दिखाई दे रहे हैं।

सांवेर दंगल में सोनकर के दांव से सिलावट निपट गए…

सांवेर नगर परिषद के चुनाव में इस बार पेलवान और भाजपाइयों के बीच जमकर छियाछायी खेली गई। कांग्रेस तो पहले से ही यहां घुटने टेक चुकी है। अब भाजपा में ही नया मैदान तैयार हो रहा है। अंदरखाने की खबर बता रही है कि इस चुनाव में सबसे चौंकाने वाला परिणाम वार्ड नंबर 4 का रहा, जहां पर कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हुए पेलवान के सिपहसालार और पूर्व अध्यक्ष दिलीप चौधरी मैदान में उतरे थे। कांग्रेसियों में दम था नहीं और भाजपाई भी अब समझ रहे हैं कि यहां की राजनीति कैसे करना है। राजेश सोनकर सहित पूरी भाजपा एक जाजम पर खड़ी हुई थी। परिणाम यह रहा कि गढ़ आले सिंह गेले वाली स्थिति बन गई। तमाम कोशिश के बाद भी पेलवान दिलीप चौधरी को नहीं बचा पाए। माना जा रहा है आगे भी जो लोग कांग्रेस से भाजपा में आकर जगह बनाने के ठेके ले रहे हैं, उनके साथ भाजपा के कार्यकर्ता अब कुछ ऐसी तैयारी कर रहे हैं कि भिया कभी गलती से भी जाने की कोशिश करें तो साइकल की अगली और पिछली सीट पर बैठाने के लिए लोग नहीं मिलें, यानी श्वेतांबर बनकर आए और दिगंबर बनकर ही वापस जाना होगा।

अरुण यादव की चलेगी….

प्रतिपक्ष नेता को लेकर भले ही कांग्रेस में जोड़-गुणा का खेल चलाया जा रहा हो, परंतु भोपाल के उच्च सूत्र बता रहे हैं कि इंदौर नगर निगम प्रतिपक्ष नेता का पद विनीतिका दीपू यादव की झोली में जा रहा है। पिछली बार फौजिया शेख अलीम प्रतिपक्ष नेता रह चुकी हैं, इसलिए इस बार उन्हें बनाए जाने को लेकर कहीं सहमति नहीं है। इसके अलावा रूबीना इकबाल खान पिछली बार निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में विद्रोह कर चुनाव जीती थीं। विनीतिका दीपू यादव को लेकर पिछले दिनों अरुण यादव, कमलनाथ और दिग्विजयसिंह से मुलाकात कर चुके हैं और अपनी मंशा भी बता दी है। इंदौर में इतना बड़ा पद का मामला नहीं है कि इसे लेकर अरुण यादव से नाराजगी ली जाए। रहा मामला चिंटू चौकसे का तो वैसे भी उन्हें अगले साल विधानसभा की तैयारी करनी है।

संजू बाबू एक से कल्टी की तैयारी में…

महापौर चुनाव में कांग्रेस के विधायक संजू बाबा ने अपने ही क्षेत्र की हंडी में चावल का रंग देखकर नई तैयारियां शुरू कर दी हैं। बीस हजार मतों का यह गड्ढा पूरा होना संभव नहीं होगा और चुनाव भी दस-बारह करोड़ से ऊपर का हो जाएगा। इधर दूसरी ओर क्षेत्र क्रमांक तीन में उन्होंने डोरे डालने की तैयारी शुरू कर दी है। वे जानते हैं कि दो बार हारे विधायकों को नई पालिसी में उम्मीदवारी नहीं मिलेगी और पिंटू के आका उसे टिकट नहीं दिला पाएंगे, क्योंकि वे पूरे प्रदेश में टिकट मांगते रहे हैं। ऐसे में तीन नंबर में उनकी राह आसान हो जाएगी। बीस हजार वोटों का गड्ढा पूरा करने के बजाय पांच हजार वोटों का गड्ढा पूरा करना ज्यादा आसान होगा। तीन नंबर में अब कोई नया दावेदार भी कांग्रेस में नहीं है। जो थे, वो पार्षद चुनाव में अपनी दुकानें मंगल करवा चुके हैं। कोई आश्चर्य की बात नहीं कि अब एकाध कथा एक में हो और तीन के दरवाजे पर निमंत्रण बंटे, पर यह पूरी तरह से तय है कि संजू बाबू एक नंबर में आने वाले खतरे को भांपते हुए तीन नंबर में सजावट शुरू कर रहे हैं।

-9826667063

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