Sulemani Chai: सनव्वर के हाथ में ‘रफ्तÓ की रफ्तार…सियासत में सर्जरी जारी…

सनव्वर के हाथ में ‘रफ्तÓ की रफ्तार…सियासत में सर्जरी जारी…
हज कमेटी में रफत वारसी का कार्यकाल खत्म होते ही डॉ. सनव्वर पटेल ने ऐसा हाथ लगाया है कि सियासत में सर्जरी शुरू हो गई है। जिला अध्यक्षों की नियुक्तियां फटाफट हो रही हैं, मानो कोई ऑपरेशन थिएटर में एक के बाद एक केस निपटा रहा हो। हज और वक्फ सीईओ गजाला मैडम का बोझ भी हल्का होता दिख रहा है, वहीं जनाब दिल्ली दरबार तक दस्तक दे आए हैं—अल्पसंख्यक मामलों के राष्ट्रीय मंत्री किरेन रिजिजू से मुलाकात कर हज से जुड़े रुके कामों को रफ्तार देने की कोशिश भी हो चुकी है। उधर मोर्चे का कार्यकाल भी अपने आखिरी पड़ाव पर है, और सुलेमानी सूत्रों की मानें तो अब प्रदेश के तमाम अल्पसंख्यक विभाग डॉ. की डिस्पेंसरी से ही संचालित होंगे। यानी इलाज भी यहीं, दवा भी यहीं और परहेज़ की हिदायत भी यहीं से जारी होगी। अब देखना ये है कि इस सियासी सर्जरी में कौन फिट बैठता है और किसकी रफ्तार पर ब्रेक लगता है, क्योंकि बीजेपी में तेज दौडऩे वालों के लिए अब स्पीड कंट्रोल का नया सिस्टम तैयार होता नजर आ रहा है।
शेर नजर है…
ये सियासत है जनाब, यहाँ चालें बदलती रहती हैं,
जो कल आगे थे, आज उनकी रफ्तार थमती रहती है।
वंदे मातरम् पर सियासत
और खामोशी का मातम…
फिलहाल शहर में वंदे मातरम् का मसला यूँ गरमाया हुआ है जैसे चाय की केतली बिना ढक्कन के उबल रही हो। दो पार्षदों पर कानूनी कार्रवाई भी हो चुकी है। बीजेपी के मुस्लिम नेता इस मुद्दे पर ऐसे चुप हैं जैसे किसी ने मोबाइल का साइलेंट मोड ऑन कर दिया हो। मज़े की बात ये है कि मोर्चे के बड़े-बड़े चेहरे शहर में मौजूद हैं, मगर इस मुद्दे पर सब अपनी दुम बचा रहे हे । यूँ लगता है जैसे सबके मुंह में दही नहीं, पूरी लस्सी जम गई हो। इतने बेतुके बोल के बाद भी रुबीना मैडम के खिलाफ बोलने की हिम्मत किसी में नहीं, या सभी अपने फायदे नुकसान के गणित लगा बैठे हे । ये ही नहीं जब सुमित बाबू ने अल्पसंख्यक मोर्चे को वंदे मातरम् गाने बुलाया तो कोई नहीं आया, खजराने के इमरान शाह ने ही शहर में खुल कर पार्टी में बात रखी। इसी के साथ मसले पर शहर के दोनों चांद काजी भी अपनी दुम दबा कर बैठे हे । जब रहनुमा बनने का इतना शौक है, तो वक्त-ए-ज़रूरत पर ये खामोशी क्यों? या सियासत में आवाज़ सिर्फ तब तक उठती है, जब तक उससे कोई खतरा न हो? इस पर एक शेर याद आ रहा है…
खामोशी भी सियासत का हुनर होती है,
कुछ लोग जवाब देकर भी बेअसर होते हैं।
इनायत के इंतजार में कुरैशी…
बीजेपी में लंबे समय से वनवास काट रहे हज कमेटी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष इनायत हुसैन का वनवास अब खत्म होता नजर आ रहा हे, पिछले दिनों कुरैशी मुख्यमंत्री मोहन यादव को अपने स्कूल में ले आए और वेलकम के फिरोज खान की तरह शहर की सियासत को बता गए कि अभी हम जिंदा हैं। इसी के साथ बीजेपी में अपने साहबजादे कादिर की भी कुछ कदर हो सके इसके इंतजाम में लग गए है। अगर इस सबके बाद भी कुरैशी पर संगठन की इनायत नहीं हुई तो समझो गई भैंस पानी में…समझ रहे हे ना…।
दुमछल्ला…
बीजेपी की राह पर प्रदेश कांग्रेस…
बीजेपी के साथ ही कांग्रेस भी अब मुस्लिम समाज से दूरी बना रही है। पहले पार्षद रुबीना और फौजिया मामले से खुद को अलग कर अब मुस्लिम समाज के सक्रिय युवाओं को बहार का रास्ता दिखाया जा रहा है, जिसमें इंदौर से शावेज़ खान ओर धार से अब्दुल करीम को बाहर कर कांग्रेस खुद अपने वोट बैंक की तगाड़ी में छेद कर रही है। जिसके लिए कांग्रेस को आने वाले चुनावों में इसका खामियाजा भुगतना पड़ सकता है।
मेहबूब कुरैशी ९९७७८६२२९९