गुस्ताखी माफ़-गजब का रहा शुक्ला परिवार का एका…न बांस दिखेगा न बांसुरी की याद आएगी…सज्जन बाबू ने कहा तराजू में तौल लो…

गजब का रहा शुक्ला परिवार का एका…

महापौर का चुनाव हारे विधानसभा क्षेत्र 1 के विधायक को भविष्य भी इसी के साथ दिखाई देने लगा है। दूसरी ओर इस चुनाव में पहली बार शुक्ला परिवार, जो कांग्रेस और भाजपा की गंगोत्री होता है, यहां से कभी भाजपा की गंगा तो कभी कांग्रेस की गंगा निकलती है। ऐसा लगा था कि संजू बाबू की सुनामी भी इसी गंगोत्री से निकलेगी। इसके लिए इस बार भाजपामय परिवार के सभी सदस्य पूरी तरह कांग्रेसमय हो गए। बड़े भिया के अपने भाजपाई रिश्तों को भी उन्होंने परखा तो भाजपाई गोलू शुक्ला के तमाम समर्थक पूरी तरह से संजय शुक्ला के लिए मैदान में लगे रहे। अब चाहे वे मुन्ना मिश्रा के यहां से मैदान में हों या फिर आनंद पुरोहित के यहां से, यह सभी दादा दयालू की रियासत से पूरे शहर में सियासत का खेल चलाते रहे। इधर क्षेत्र क्रमांक एक में इस बार कांग्रेस को मिली करारी हार के बाद जहां क्षेत्र क्रमांक एक के पूर्व विधायक, जो पिछली बार मात खा गए थे, वे इस बार अपने पुराने मोहरों को कलर-कुशन कर बाजार में उतारने में सफल हो गए और उन्होंने बाणगंगा के रिश्तेदारों को पहले से ही छंटाई के साथ दूर रखा और इसी के साथ वे बढ़त बनाने में सफल हो गए। इस क्षेत्र के भाजपा के कुशल रणनीतिकार माने जाने वाले दिनेश शुक्ला का दावा है कि संजू बाबू इस क्षेत्र से अगले विधानसभा चुनाव में तीस हजार से अधिक मतों से अपना सामान समेटेंगे। वे चाहे अब कितनी भी कथाएं और यात्राएं करवा लें। दिनेश शुक्ला की इस बात पर कमलेश खंडेलवाल ने भी मुहर लगाते हुए यह कहा है कि अगले चुनाव में कमलेश खंडेलवाल का वोट कांग्रेस की जड़ें हिलाकर रख देगा। उल्लेखनीय है कि वे पिछले कई सालों से दस हजार से अधिक परिवारों के साथ अपने अलग-अलग आयोजनों के साथ अपने सम्पर्कों को जिंदा रखे हुए हैं। साथ ही वे निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में 45 हजार वोटों के साथ अपनी ताकत बता चुके है। महापौर चुनाव में हंडी के चावल तो दिखना शुरू हो गए है। वैसे भी राजनीति में जमीन खिसकने का अंदाज हमेशा निर्णय होने के बाद ही पता लगता है।

न बांस दिखेगा न बांसुरी की याद आएगी…


कभी चिलमन से वो देखें और कभी चिलमन से हम देखें,
आग लगा दो ऐसी चिलमन में, न वो देखें, न हम देखें।

यह शेर इंदौर नगर निगम के स्मार्ट-सिटी के स्मार्ट अफसरों के लिए बिलकुल सही बैठता है। इसी से जुड़ी हुई एक कहानी भी कुछ ऐसी है कि महिला ने अपने शराबी पति को कहा- अखबार में लिखा है शराब जहर का काम करती है। पति ने कहा- कल से बंद। पत्नी ने कहा- वाह…। पति ने कहा- शराब नहीं, अखबार। अब आइए मुद्दे की बात पर। उनचालीस करोड़ की लागत से बड़ा गणपति से कृष्णपुरा तक एक स्मार्ट सड़क बनाई जाना है। इसे तय तारीख पर बनाने के लिए यहां टाइमर लगा दिया गया है। बड़े गर्व से शुरू में निगम के अधिकारी इसकी ओर देखते थे। फिर उनकी समझ में आ गया कि यह टाइमर आने वाले समय के लिए मुसीबत होगा। इस टाइमर के हिसाब से 16 जून को काम पूरा होना था, परंतु अभी भी चालीस प्रतिशत से ज्यादा काम अधूरे पड़े हैं… तो फिर क्या किया जाए। दो माह का समय इसमें अभी और लगना है तो अधिकारियों ने सबसे बेहतर विकल्प निकाला कि उन्होंने अपनी जादूगरी दिखाते हुए यहां से टाइमर ही हटा दिया। न रहेगा बांस, न बजेगी बांसुरी। अब लगने दो, जितना समय लगे। वैसे भी समय पर काम करके उखड़ना क्या है।

सज्जन बाबू ने कहा तराजू में तौल लो…


इन दिनों इंदौर में कांग्रेस की हार के बाद बचे कुचे नौ निहालों को एक साथ तौलना कोई आसान काम नहीं है। वैसे भी आज तक इंदौर में सामूहिक फैसले कांग्रेस में होते नहीं रहे है तो फिर इस बार कौन सा पहाड़ उखाड़ना है। 19 पार्षदों का मुखिया चुनने के लिए भोपाल, दिल्ली में दौड़ लग रही है। इधर सज्जन बाबू ने बड़ी सज्जनता से समझाया है कि समझ जाओ वरना फैसला भोपाल से हो जाएगा। यानि आपस में ही तराजू में अपने आप को तौल लो। कौन समझाए इतना आसान होता तो फिर यहां पर कांग्रेस का परचम नहीं लहराता। एकता की बात करने वाले सज्जन बाबू ने लंबे समय से क्षेत्र क्रमांक 3 के नेता से मोर्चा ले रखा है। जब वे ही एक जाजम पर नहीं बैठ पा रहे है तो दूसरों को सलाह देने की जरूरत नहीं होना चाहिए।
-9826667063

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