मानसिक शक्ति ही मनुष्य को महान बनातीं है

पत्थरों में चेतना शून्य होती है, पेड़ पौधों में पल्लवित पुष्पित होती है, पशु पक्षियों में चलायमान होती है और मनुष्य ही एक ऐसा प्राणी है जिसमें मानव मस्तिष्क चिंतन मनन कर किसी समस्या का समाधान निकालता हैंद्य यह सर्वविदित है कि मनुष्य का जीवन विभिन्न सामाजिक मानसिक संघर्षों का केंद्र होता है। मनुष्य ने सदैव मानसिक शारीरिक शक्ति और दृढ़ संकल्प के बलबूते पर हर समस्या पर समय-समय पर विजय प्राप्त की है, और अपने लक्ष्य को बड़ी दृढ़ता के साथ प्राप्त किया हैद्य मनुष्य के जीवन में जब उत्साह, ऊर्जा एवं अपनी क्षमताओं के उपयोग करने का पूर्ण रूप से आत्मविश्वास होता है तो वह परिस्थितियों का सामना बखूबी कर अपने जीवन को सुचारू रूप से संचालित करता है।
एक मानव प्रजाति ही ऐसी प्रजाति है जिसकी संकल्प शक्ति इतनी ऊर्जावान एवं महत्वपूर्ण होती है कि वह प्रगति की विविधताओं, विषमताओं एवं अपार शक्ति को भी आसानी से नियंत्रित कर लेता है एवं उसका स्वयं के लिए समाज के लिए देश के लिए सकारात्मक उपयोग करने में भी सक्षम होता हैद्य जीवन में मनुष्य को सदैव अपने आप को व्यस्त रख कार्यशील रहना चाहिए, क्योंकि व्यस्त व्यक्ति ही किसी कार्य को उसकी परिणति तक पहुंचा सकता है ,खाली दिमाग सदैव शैतान का होता है एवं उसमें नकारात्मक विचार प्रवेश कर मन को मायूस कर देते हैंद्य आपका मन या मनोबल या संकल्प ही जब एकाग्र चित्त ऊर्जावान तथा शक्तिशाली होगा तो आपके सामने की कितना भी क्लिष्ट व कठिन लक्ष्य हो उसमें आप सफलता अवश्य पा सकेंगे। इसलिए मनुष्य को सदैव कर्मरत रहना चाहिए ।इसका यह भी अभिप्राय है कि मनुष्य को अपने आपको सदैव स्वस्थ्य एवं व्यस्त रखना चाहिए। मन में दृढ़ संकल्प रखकर हमारी दुनिया में लोगों ने ऐसे असंभव कठिन तथा दुरूह कार्यों को अपनी जड़ मानसिक शक्ति से संभव कर दिखाया है जिसकी हम कतई कल्पना भी नहीं कर सकते हैं। भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के सेनानियों की विपन्न स्थिति एवं आर्थिक कमी के बावजूद उन्होंने अपनी मानसिक दृढ़ता ,उच्च संकल्प शक्ति और संगठन क्षमता के दम पर भारत देश को आजाद कराया ।इसमें निसंदेह महात्मा गांधी, सरोजनी नायडू, सरदार वल्लभ भाई पटेल,जवाहरलाल नेहरू, चंद्रशेखर आजाद, भगत सिंह, सुभाष चंद्र बोस और न जाने कितने उदाहरण हैं जिन्होंने अपनी मानसिक शारीरिक शक्ति तथा ऊर्जा के दमखम पर देश को अंग्रेजों के चंगुल से निकाल कर आजादी की हवा की सांस लेने का देशवासियों को मौका दिया है।हम उनका नमन करते हैं उन्हें श्रद्धांजलि भी देते हैं और उनकी दृढ़ इच्छाशक्ति एवं संकल्प को आदर्श के रूप में लेकर अपने जीवन में उतारने का प्रयास भी करेंगे। दुनिया में अपनी मानसिक शक्ति और संकल्प से अनेक असंभव कार्य को सफलतापूर्वक संचालित संपादित करते हुए अनेक उदाहरण मिलेंगे जो वाकई में इस दुनिया के और हम सबके आदर्श महान लोग हैं। व्यक्ति यदि सादगी, ईमानदारी और निरंतरता के साथ किसी भी कार्य को सफलतापूर्वक संपादित करने का सार्थक एवं सर्वोच्च प्रयत्न करता है, तो निसंदेह सफलता उनके कदम चूमती है और वे व्यक्तियों के लिए, समाज के लिए तथा देश के लिए आदर्श पुरुष होते हैं। कोई भी महान या आदर्श व्यक्ति आसमान से अचानक नहीं आता है वह इसी धरती में पैदा हुआ सामान्य मनुष्य ही है जिसने अपने संघर्ष, इच्छा शक्ति, अदम्य साहस ,संयम और संतुलन से अपने हर लक्ष्य को प्राप्त कर अपने आपको समाज से अलग कर एक आदर्श रूप में प्रस्तुत किया है। मनुष्य का हृदय या मन अनंत ऊर्जा और शक्ति का बहुत बड़ा स्रोत होता है। किसी भी बड़े लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए मस्तिष्क मदद करता है फिर चिंतन करता है और कार्य योजना सुनियोजित कर, अन थक परिश्रम कर उस दुरूह लक्ष्य को प्राप्त करता है ।आपका मन यदि हताश या निराश है तो आप किसी लक्ष्य की प्राप्ति नहीं कर सकते हैं। इसीलिए मन को सदैव प्रफुल्लित उत्साहित एवं सकारात्मक सोच के साथ ताजा रखें,जिससे आने वाली परिस्थितियों का सामना कर एक नए युग का सूत्रपात कर सकते हैं। जीवन में दूसरे व्यक्तियों से पिछड़ने के कई कारण भी हो सकते हैं जिनमें से अपनी क्षमता तथा मानसिक शक्ति पर अविश्वास करना भी एक बड़ा कारण है, इसके साथ ही किसी भी लक्ष्य की प्राप्ति के लिए सुनियोजित योजना,अपनी क्षमताओं का आकलन एवं कार्य के साथ कठोर श्रम भी अत्यंत आवश्यक सफलता के स्तंभ हैं, अति संपन्नता के बावजूद मानसिक रूप से कमजोर व्यक्ति को असफलता का स्वाद चखना पड़ता है। इसीलिए जीवन में सफलता के लिए मानसिक स्थिति में दृढ़ता, कठोर संकल्प ,एवं निरंतर श्रम अत्यंत आवश्यक तत्व हैं। अपने जीवन को सफल बनाने एवं श्रेष्ठ जीवन की निर्मात्रि आपकी इच्छा शक्ति ऊर्जा और मानसिक संतुलन ही है। यदि मानसिक संतुलन में हताशा आई तो परिणाम ऋणआत्मक भी हो सकते हैं,और यही कारण है कि चिंतकों दार्शनिकों और महान अध्यापकों ने कहा है कि मन को सदैव ऊर्जावान और सकारात्मक सोच से परिपूर्ण रख लक्ष्य प्राप्ति के लिए कड़ी मेहनत करनी चाहिए।

संजीव ठाकुर, स्तंभकार, चिंतक, लेखक, रायपुर छत्तीसगढ़, 9009 415 415

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