2024 तक चुकाने हैं 25 लाख करोड़ रुपए के कर्ज

देश का कर्ज 42 लाख करोड़ के पार, अब योजनाएं विश्व बैंक की

 

नई दिल्ली (दोपहर आर्थिक डेस्क)। भारत अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष और विश्व बैंक के कर्ज के जाल में इस तरह उलझ गया है कि अब देश में बनने वाली सभी योजनाएं विश्व बैंक के अनुसार ही बनेगी। चाहे जन धन खाते हों या फिर विनिवेश का कार्यक्रम हो या फिर सरकारी संपत्ति बेचने का मामला हो। सभी में अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं का निर्देश ही काम कर रहा है। भारत को लिए गए कर्ज की पहली किस्त 2022 में चुकानी है जो 18 लाख 85 हजार करोड़ रुपए है। 2024 तक 25 लाख करोड़ रुपया वापस दिया जाना है। सरकार के पास अब कोई विकल्प नहीं है। उन्हें या तो और कर्ज लेना होगा या फिर तमाम सम्पत्ति बाजार में उतारनी होगी।
केन्द्र की सरकार अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों से लगातार कर्ज उठा रही है। दूसरी ओर बांड बाजार और आरबीआई से भी सरकार 25 लाख करोड़ रुपए के लगभग के कर्ज ले चुकी है। अब विश्व बैंक और आईएमएफ से लिए कर्ज लौटाने का समय शुरू हो गया है। यह कर्ज पांच वर्ष से लेकर 15 वर्ष तक होता है। इसकी किस्तेें वार्षिक रूप से जमा होती है। विश्व बैंक और आईएमएफ में विकसित देशों का अरबों रुपया है जो उनके काम नहीं आता और यह पैसा गरीब देशों और विकासशील देशों को कर्ज के रूप में दिया जाता है। लगातार कर्ज के चलते देश अब विश्व बैंक के अधीन पहुंच गया है। विश्व बैंक की ही योजनाएं देश में लागू हो रही है। 2022 में केन्द्र सरकार को 254.03 बिलियन डॉलर (18 लाख 85 हजार करोड़ रुपए) चुकाना है। इसके बाद 2023 में 4 लाख 27 हजार करोड़ रुपए और 2024 में 3 लाख 87 हजार करोड़ रुपए यानि 2025 तक 25 लाख करोड़ रुपया कर्ज के रूप में सरकार को चुकाना है। देश पर कर्ज बढ़कर 42 लाख करोड़ के पार हो गया है और विश्व बैंक की योजना के अनुसार ही देश में योजनाएं चल रही है। 80 करोड़ लोगों को मुफ्त अनाज देने के लिए भी विश्व बैंक से 1.65 मिलियन डॉलर का कर्ज लिया गया है। सामाजिक पैंशन के लिए भी 3674 करोड़ रुपया कर्ज के रूप में लिया गया है। स्ट्रीट वैंडर को 10 हजार रुपए नकद देने के लिए भी विश्व बैंक से ही पैसा आया है। यदि आप भारत के कर्ज की स्थिति जानना चाहते हैं तो किस प्रकार से कर्ज के जाल में देश उलझता जा रहा है इसे जानने के लिए आईएमएफ वर्ल्ड बैंक की साइड पर चले जाएं और भारत के रिफार्म को लेकर जानकारी निकालें, उस पर पूरी जानकारी उपलब्ध है।

भारत में किसानों की जरूरत नहीं
वर्ल्ड बैंक की भारत को लेकर बनी नीति में स्पष्ट किया है कि भारत में छोटे किसानों की जरूरत नहीं है। देश को मजदूरों की जरूरत है। भारत में छोटे किसान खाद, बीज, पानी, बिजली पर सब्सिडी मांगते हैं, इसकी बजाय बड़े समूहों को ही खेती में उतारना होगा और इस योजना का असर भी देश में दिखाई दे रहा है।

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