गुस्ताखी माफ़: पंगत का पता नहीं और…भाजपा के दरवाजे बंद…चिंता डाकू की नहीं, डाकन के घर…
पंगत का पता नहीं और...
राजनीति भी गजब चीज है अल्ला की मेहरबानी के आसार दिखते ही राजनीति में पहलवानी शुरु हो जाती है। होना भी चाहिए वर्ना अचानक किसी दिन आकर परवर दिगार कहें कि आपको मैदान में उतरना है और नेताजी कपड़े सिलवाने में ही लगे हो…
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