अब तक की सबसे बड़ी सरकारी सेल…

सड़क, रेलवे, भारत पेट्रोलियम, पाइप लाइन, हाईवे बेचकर 6 लाख करोड़ रुपए एकत्र करेगी सरकार

नई दिल्ली (ब्यूरो)। केन्द्र सरकार इस साल दिसंबर तक ही ढाई लाख करोड़ रुपए की संपत्ति बेचने को लेकर सभी तैयारियां पूर्ण कर चुकी है। 100 संपत्तियों का चयन भी कर लिया गया है। इसमें बैंक, एलआईसी के अलावा रेलवे स्टेशन, सड़कें, पाइप लाइन, सरकारी जमीन, 6 उद्योग भी शामिल हैं। कुल 6 लाख करोड़ रुपए की संपत्ति बेचने को लेकर अब कार्रवाई प्रारंभ की जा रही है। एलआईसी से 50 हजार करोड़ रुपए जुटाने का लक्ष्य रखा गया है। कई बैंकें भी इसी कतार में है।

डिपार्टमेंड ऑफ इनवेस्टमेंट एंड पब्लिक असेस मैनेजमेंट (दीपम) की सचिव कान्ता पांडे ने बताया कि कोविड लहर के बाद एक बार फिर वीनिवेश कार्यक्रम को पटरी पर वापस लाया गया है। जो रफ्तार संसद सत्र के कारण धीमी पड़ी थी, अब उसे वापस तेजी से प्रारंभ किया जा रहा है। वीनिवेश कार्यक्रम के अंतर्गत सबसे पहले बैंकों को बेचने का कार्य शुरू हो रहा है वहीं इसी वर्ष एलआईसी को बेचकर 50 हजार करोड़ जुटाने का लक्ष्य रखा है। इसके साथ ही अन्य बीमा कंपनियां भी निजी हाथों में दे दी जाएंगी। सरकार का आर्थिक क्षेत्र का यह सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है। दूसरी ओर मोनेटाइजेशन के तहत 100 संपत्तियों को चिन्हित कर लिया गया है जिन्हें बेचकर 6 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा जुटाना है। इसमें 6 उद्योगों के साथ ही सड़कें, पाइप लाइन, रेलवे स्टेशन, हाईवे, सरकार की खाली पड़ी जमीनें शामिल हैं। इन्हें बेचकर इसी वर्ष ढाई लाख करोड़ रुपए मार्च के पहले सरकार को एकत्र करने हैं। उन 6 लाख करोड़ रुपए की संपत्तियां बाजार में उतारने का लक्ष्य रखा गया है। इसके पूर्व सरकार एयर इंडिया को बेचने के कई प्रयास कर चुकी है। अब यह कंपनी भी भारी रियायती दर पर बिकने जा रही है। वहीं पवन हंस और शिपिंग कॉर्पोरेशन पहले से ही बिकने की कगार में खड़े हो गए हैं।
देश की 41 हथियार बनाने वाली फैक्ट्रियां  भी बेची जाएगी
सरकार ने लोकसभा में देश की सभी सरकारी हथियार बनाने वाली फैक्ट्रियों को बेचने के लिए संविधान में संसोधन कर दिया है। इन ऑडिनेंस फैक्ट्रियों का टर्नओवर 14 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा था। रक्षा उत्पादन में इन कंपनियों को 200 साल का अनुभव है। सरकार के 41 आयुध कारखाने अब निजी हाथों में चले जाएंगे। इसमें चंडीगढ़ में 1, उत्तराखंड में 2, उत्तर प्रदेश में 9, बिहार में 1 और मध्यप्रदेश में 6, पश्चिम बंगाल में 4, महाराष्ट्र में 10, तमिलनाडु में 6 फैक्ट्रियां हैं। इनमें साढ़े 3 लाख कर्मचारी हैं। जबलपुर में ही 23 हजार कर्मचारी रोजगार से हाथ धो बैठेंगे। यह फैक्ट्रियां 155 एमएम की धनुष तोपें, असाल्ट रायफलें और सेना के लड़ाकू वाहन बनाने का काम करती थीं। इनका निर्यात 300 करोड़ से ज्यादा का था। इधर यहां के कर्मचारियों ने अनिश्चितकालीन हड़ताल आज से प्रारंभ कर दी है।

 

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