नोटबंदी : 58 याचिकाओं पर 12 अक्टूबर को बड़ी सुनवाई नोटबंदी से देश को फायदा नहीं भारी नुकसान बताया

पहली बार बड़ी सुनवाई पर देशभर में सुनवाई का लाइव प्रसारण होगा

नई दिल्ली (ब्यूरो)। वर्ष 2016 में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा 8 नवंबर को 1000 और 500 के नोट बंद करने का ऐलान करने के बाद यह दावा किया था कि इससे देश में काले धन पर रोक लगेगी, साथ ही आतंकवाद की कमर टूटेगी, नक्सलवाद समाप्त होगा, नकली नोट का चलन समाप्त हो जाएगा। इसी के साथ देश केशलेश व्यवस्था की ओर बढ़ेगा।

इसे लेकर देशभर में अलग-अलग नामी वकीलों ने 58 याचिकाएं नोटबंदी के खिलाफ दर्ज की थी, जिसे लेकर अब 12 अक्टूबर को बड़ी सुनवाई होने जा रही है। इसके लिए उच्चतम न्यायालय के माने हुए पांच न्यायधीशों की बैंच बनाई गई है। इसी के साथ होने वाली सुनवाई का लाइव प्रसारण भी होगा। सरकार का कहना है यह फैसला सरकार का था और इस पर सुनवाई नहीं होनी चाहिए।

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दूसरी ओर 58 याचिकाओं में यह पूछा गया है कि नोटबंदी से क्या फायदा हुआ। आंकड़े पेश करते हुए बताया है कि नोटबंदी के पहले चलन में 15 लाख करोड़ रुपए थे जो अब बढ़कर 31 लाख करोड़ रुपए हो गए हैं। आरबीआई ने ताजा आंकड़ों में बताया है कि 9 लाख करोड़ के नोट चलन से गायब हो चुके हैं, यानी काला धन बन गए हैं। इसके अलावा नक्सलवाद और आतंकवाद भी समाप्त नहीं हुआ बल्कि 2000 और 500 के नकली नोट बड़ी तादाद में देश के चलन में आ गए हैं।

उच्चतम न्यायालय ने बुधवार को कहा कि वह 2016 में केंद्र सरकार द्वारा पांच सौ और एक हजार रुपये के नोटों को चलन से बाहर करने के निर्णय को चुनौती देने वाली याचिकाओं के ‘अकादमिकÓ होने पर विचार करेगा। इसके साथ ही अदालत ने मामले को अगली सुनवाई के लिए 12 अक्टूबर को सूचीबद्ध किया। सुनवाई शुरू होने के साथ ही न्यायमूर्ति एस. ए. नजीर की अध्यक्षता वाली संवैधानिक पीठ ने कहा कि वर्तमान में यह मामला विचार करने योग्य है भी या नहीं। इसमें न्यायमूर्ति बी.आर. गवई, ए.एस. गोपन्ना, वी.वी. नागरत्न और रामा सुब्रमण्यम को शामिल किया गया है। सभी दक्षिण भारत के माने हुए न्यायधीशों में शामिल हैं।

केंद्र की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि सभी व्यावहारिक उद्देश्यों के लिए मामला खत्म हो चुका है, लेकिन मामले की एक अकादमिक अभ्यास के रूप में जांच की जा सकती है। अदालत ने हैरत जताई कि अकादमिक अभ्यास के लिए पांच-न्यायाधीशों की बेंच सुनवाई कर रही है जबकि हम पहले से ही इतनी बड़ी मात्रा में लंबित मामलों के बोझ तले दबे हैं।

अदालत ने कहा, हम इस पर 12 अक्टूबर को सुनवाई करेंगे। हम जांच करेंगे कि क्या यह अकादमिक हो गया है और क्या इसे सुना जा सकता है। शीर्ष अदालत केंद्र के 8 नवंबर, 2016 के 500 और 1000 रुपये के नोटों को बंद करने के फैसले को चुनौती देने वाली 58 याचिकाओं के एक बैच पर सुनवाई कर रही थी। नोटबंदी के तुरंत बाद डॉ. हर्षवर्धन का रिकार्डेड बयान है कि यह फैसला केवल चार लोगों ने लिया था, उस दौरान मंत्रियों को कमरे में बंद कर दिया गया था। देश में पहली बार इतने बड़े मामले पर लाइव सुनवाई हो रही है, जिसे यूट्यूब पर भी देखा जा सकेगा। 58 याचिकाओं को लेकर देशभर के नामी वकील बहस करते दिखेंगे।

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8 नवंबर 2016 को की गई नोटबंदी से देश को कोई फायदा नहीं हुआ बल्कि विकास दर 2 प्रतिशत और नीचे गिर गई। इससे 2 लाख करोड़ रुपए के साथ 2 करोड़ नौकरियां भी चली गई। याचिकाओं में दावा किया गया है कि पुराने 1000 के नोट एक बैग में अधिकतम 5 लाख के आते थे, तो नए नोट 10 लाख रुपए के उसी बैग में आ रहे हैं। रिजर्व बैंक भी नोट बंदी के बाद अपनी जानकारी में बता चुकी है कि नए नोट छापने में कितने रुपये बर्बाद हुए, दूसरी ओर देश में 2000 और 500 के नकली नोट रिकार्ड स्तर पर पहुंच चुके हैं।

रिजर्व बैंक यह भी बता चुका है कि 2000 और 500 के 2 लाख 21 हजार करोड़ के नोट बाजार से गायब हो चुके हैं जो काला धन बन गए हैं। यानी 6849 करोड़ नोट छापे गए थे, इसमें से 1680 नोट तिजोरियों में जमा हो चुके हैं। याचिकाओं में दावा किया गया कि न कालाधन समाप्त हुआ, न आतंकवाद, केशलेश तो नहीं हुआ बल्कि 31 लाख करोड़ के नोट रिजर्व बैंक उल्टा छापकर बाजार में पहुंचा चुकी है। यह फैसला यदि होगा तो 2024 के चुनाव की दिशा तय करेगा। हालांकि सरकार इसे प्रशासनिक निर्णय मानकर सुनवाई न करने के लिए अपील कर चुकी है। 

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