अब फ्रॉड रजिस्ट्री : जालसाजी होते ही मोबाइल, ऐप फ्रीज हो जाएंगे

चीनी सर्वर से चल रही है देशभर में मोबाइलों से धोखाधड़ी

मुंबई (ब्यूरो)।

fraud registry
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रिजर्व बैंक अब देशभर में हो रहे साइबर अपराधों पर नियंत्रण के लिए फ्रॉड रजिस्ट्री बनाने जा रहा है। इसी के साथ मोबाइल एप पर धोखाधड़ी करने वाले अपराधियों का बुरा समय भी शुरू हो जाएगा। किसी भी ऐप या फोन द्वारा फ्रॉड होने के तुरंत बाद उक्त मोबाइल से जुड़े खाते को फ्रीज कर दिया जाएगा।

दूसरी ओर एक और जानकारी जो साइबर अपराध से जुड़ी हुई है बता रही है कि देश में मोबाइल ऐप और वेबसाइट द्वारा की जा रही धोखाधड़ी पर चीनी ऐप का नियंत्रण है।

लोन ऐप, गेमिंग ऐप, बेटिंग ऐप और इंवेस्टमेंट ऐप अलग-अलग नहीं एक ही व्यक्ति संचालित कर रहा है। रिजर्व बैंक द्वारा अब देशभर में साइबर अपराधों पर नियंत्रण के लिए बड़ा कदम उठाया जा रहा है। हर साल भारत में 8 लाख से अधिक साइबर अपराध हो रहे हैं, इनमें से पिछले साल 4 लाख, 18 हजार मामले रिजर्व बैंक के पास दर्ज हुए थे।

अब रिजर्व बैंक ने साइबर अपराध पर नियंत्रण के लिए फ्रॉड रजिस्ट्री बनाने का काम शुरू कर दिया है। इसमें ऐसा डेटाबेस एकत्र किया जा रहा है जो लगातार अपराध कर रहे हैं और लोगों से ओटीपी नंबर सहित अन्य जानकारी लेकर धोखाधड़ी कर रहे हैं। फ्रॉड रजिस्ट्री में पहली धोखाधड़ी होते ही मोबाइल ब्लॉक हो जाएगा और जिस खाते में पैसा ट्रांसफर हुआ है, वह फ्रीज हो जाएगा। इससे धोखाधड़ी करने वाले पैसा नहीं निकाल पाएंगे।

दूसरी ओर, अब किसी भी प्रकार का वित्तीय कारोबार करने के पहले पूरी जानकारी और साथ में लाईसेंस लेना होगा। इससे ऐसी वेबसाइट जो फाइनेंस या अन्य सलाह ऐप के जरिए दे रही हैं, उन पर नियंत्रण किया जा सकेगा।

 

अपराधी दे रहे हैं चीनी कंपनियों को भारत का डाटा

दूसरी ओर भारत में हो रहे साइबर अपराधों को लेकर साइबर एक्सपर्ट विनय सुल्तान ने बताया कि इस मामले में जानकारी निकालने के बाद जो स्थिति सामने आई है वह बता रही है कि बड़ी तादाद में इस प्रकार के बनाए ऐप और मोबाइल नंबर आपका पूरा डाटा चीनी कंपनियों को उपलब्ध करवा रहे हैं।

 

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यह चाहें कोई सा भी लोन ऐप हो या गेमिंग ऐप हो या फिर बेटिंग ऐप के अलावा इंवेस्टमेंट की सलाह देने वाले ऐप भी चाईनीज सर्वर से ही संचालित किए जा रहे हैं। चीन में इस प्रकार की धोखाधड़ी को लेकर वर्ष 2018 में ही बेहद सख्त कानून बनाए गए हैं, जिसमें कई वर्षों की जेल भी शामिल है। इसके चलते अब चीनी सर्वर अन्य देशों में यह काम-काज मलेशिया में बैठकर नियंत्रित कर रहे हैं और उक्त भारत के लोगों को सर्वाधिक निशाना बनाया जा रहा है, क्योंकि भारत में साइबर अपराध के लिए बना कानून इतना कमजोर है कि अपराधी तक पहुंचना ही संभव नहीं होता केवल अपराध दर्ज किए जाते हैं। अभी भी २ लाख से ज्यादा साइबर अपराध बिना कार्रवाई किए पेंडिंग हैं।

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