Coal News India: 31 लाख टन कोयला बंदरगाहों पर, उठाने को कोई तैयार नहीं

विदेश से आयात कोयले की दलाली में फंस गए

नई दिल्ली (ब्यूरो)।

देश में बिजली उत्पादन करने वाले कम्पनियों पर सरकार ने भारी दबाव बनाते हुए विदेशी कोयला foreign coal आयात करने को लेकर कई कदम उठाए थे। इसके चलते कई कम्पनियों ने मजबूरी में देश में मिल रहे सस्ते कोयले की बजाय इस कोयले की खरीदारी कर आयात शुरू किया।

दूसरी ओर बिजली उत्पादक कम्पनियों ने सरकार से आग्रह किया था कि विदेशी कोयले की खरीदारी पर आने वाले बोझ को वहन करने के लिए कम से कम एक रुपए यूनिट बिजली की कीमत बढ़ा दी जाए। जिस पर कोई फैसला नहीं हुआ है। दूसरी ओर विदेशों से आया 31 लाख टन कोयला अब अलग-अलग बंदरगाहों पर पड़ा हुआ है। जिसे राज्य सरकारें और कम्पनियां उठाने को तैयार नहीं हैं। इस कोयले की कीमत 3 लाख करोड़ रुपए के लगभग बताई जा रही है।

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केन्द्र सरकार ने भले ही बिजली कम्पनियों को कोयला आयात करने के लिए सख्त निर्देश दिए हैं परंतु दूसरी ओर बिजली उत्पादन कम्पनियों का राज्य सरकारंों पर दो लाख करोड़ रुपए से ज्यादा बकाया हो चुका है जिन्हें देने में राज्य सरकारें सक्षम नहीं हैं।

राज्य सरकारें अब यह घाटा बिजली की कीमतें बढ़ाकर पूरा करने के लिए तैयारी कर रही है तो दूसरी ओर विदेश से कोयला आयात करने में सरकार के हाथ भले ही काले हो गए हों पर बिजली उत्पादक कम्पनियां इस कोयले से बिजली बनाकर बेचने को तैयार नहीं है क्योंकि विदेशी कोयले से पैदा की गई बिजली के कारण कोयला उत्पादक कम्पनियां भयानक घाटे में चली जाएंगी।

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सरकार के दबाव के चलते सरकार की कम्पनी नेशनल थर्मल पावर कारपोरेशन (एनटीपीसी) ने ही 73 प्रतिशत कोयला खरीद रखा है। इसके अलावा भाजपा शासित राज्य सरकारों ने भी विदेशों से कोयला खरीदा है परंतु अब 31 लाख टन कोयला बंदरगाहों पर पड़ा हुआ है। 17 अगस्त तक इसे उठाने को कोई तैयार नहीं है।

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हालांकि बिजली घरों के पास कोयले की भारी कमी है पर वे विदेशी कोयले से दूरी बनाए हुए है। अब यह कोयला घाटे में चल रही बिजली उत्पादक कम्पनियों के लिए और बड़ी मुसीबत बन गया है।

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