40 करोड़ पर भूखमरी का साया

कई देशों में गेहूं का बड़ा संकट शुरू, युद्ध के चलते नहीं हो रहा निर्यात

नई दिल्ली (ब्यूरो)। रूस-यूक्रेन के बीच पिछले चार माह से चल रहे युद्ध के कारण 40 करोड़ के लगभग आबादी भूखमरी के हालात में पहुंचने जा रही है। रूस-यूक्रेन विश्व की कुल आबादी को लगने वाले गेहूं में से २७ प्रतिशत की आपूर्ति करते है। दूसरी ओर यूक्रेन में ढाई करोड़ टन गेहूं युद्ध के कारण फंस गया है। रूस ने यूक्रेन के बंदरगाह (ब्लेक सी) को हमले के बाद पूरी तरह बंद कर दिया है।

यूक्रेन की आबादी चार करोड़ है और वह विश्व के चालीस करोड़ लोगों के लिए गेहूं का निर्यात करता है। इस साल युद्ध के चलते फसल पर पड़ने वाली मार के कारण कई देशों में आने वाले समय में गेहूं का बड़ा संकट खड़ा होने जा रहा है। कई छोटे देश अभी से अपने यहां गेहूं की खरीदी आने वाले समय को देखते हुए बढ़ा रहे हैं।

रूस-यूक्रेन युद्ध के कारण समुद्र के रास्ते से गेहूं का निर्यात अब फिलहाल संभव नहीं है। यदि युद्ध समाप्त हो भी गया तो बंदरगाह को प्रारंभ होने में छह माह से अधिक समय लग जायेगा। इसके कारण संयुक्त राष्ट्र संघ के खाद्य कार्यक्रम पर भी इसका असर होने लगेगा। गेहूं का उपयोग ब्रेड से लेकर कई प्रकार के खाद्यान्न में किया जाता है। संयुक्त राष्ट्र संघ के फूड प्रोग्राम के अर्थशाी आरिफ हुसैन का कहना है कि अफ्रीकी देशों में अभी से ही संकट दिखाई देने लगा है। सोमालिया सहित कई देश यूक्रेन से ही गेहूं खरीदते थे। इन्हें सबसे ज्यादा संकट हो गया है।

दूसरी ओर सड़क मार्ग से गेहूं लाये जाने के लिए कई देशों से रास्ता तय करना होगा और इससे गेंहू की कीमत कई गुना तक बढ़ जायेगी। यूक्रेन से यूरोप के भी कई देशों को गेहूं की आपूर्ति होती है। दूसरी ओर संयुक्त राष्ट्र के फ्यूचर फूड प्रोग्रामकी मुखिया आर्थरिन कजिन का कहना है कि कई देश मि और अफ्रीका सहित गेहूं यूक्रेन से ही मंगाते थे। कीमतों में बड़ा असर दिखाई देगा। भारत विश्व में तीसरे नंबर का गेहूं उत्पादक देश है।

युद्ध के दौरान भारत ने कई देशों को अपने यहां से गेंहू निर्यात करना शुरु कर दिया था। परंतु पिछले साल गेहूं की सरकारी खरीदी मौसम की मार के कारण आधे से भी कम होने के कारण निर्यात रोकना पड़ा। यदि निर्यात जारी रहता तो भविष्य में भारत को भी गेहूं का आयात करना पड़ता। हालांकि अभी भी गेहूं के भंडार मेंकमी आ गई है जिसे पूरा करने के लिए कई राज्यों में अवधि बितने के बाद भी गेहूं की खरीदी जारी रहेगी। संयुक्त राष्ट्र के खाद्य कार्यक्रम में पंद्रह करोड़ लोगों को मुफ्त अनाज दिया जाता है। उनके पास भी अब इस कार्यक्रम के लिए गेहूं की कमी होने लगी है। यह कार्यक्रम विश्व के गरीब देशों में सहायता के रुप में चलाया जाता है।

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