देश आर्थिक मंदी की ओर बढ़ा, शेयर बाजार से निकल सकते हैं 7.8 लाख करोड़ रुपए

रिजर्व बैंक की ताजा रिपोर्ट ने बाजार को हिला दिया

मुंबई (दोपहर आर्थिक डेस्क)। रिजर्व बैंक की कल जारी हुई दो ताजा रिपोर्ट में जहां शेयर बाजार के चूले को हिलाकर रख दिया है तो वहीं रिपोर्ट में कहा गया है कि यह साल अर्थव्यवस्था में मंदी के साथ कई कठिनाइयां लेकर आ रहा है। पहली बार सरकार ने अपने दस्तावेजों में यह स्वीकार किया है कि देश अब आर्थिक मंदी की ओर जा रहा है। हालांकि इस मामले में दुनियाभर की एजेंसियां पहले ही कह चुके हैं कि यह साल भारत में चुनौती भरा रहेगा। इसका असर खासकर शेयर बाजार और विदेशी मुद्रा भंडार पर दिखाई देगा। यह साल नौकरी, निवेशक और व्यापार तीनों के लिए बेहतर नहीं रहेगा। महंगाई का दौर अभी थमेगा नहीं। शेयर बाजार को लेकर रिजर्व बैंक की ताजा रिपोर्ट में बताया गया है कि यहां से 7.8 लाख करोड़ रुपए (100 करोड़ डॉलर) की पूंजी निकल सकती है।

वित्त मंत्रालय ने आरबीआई की दोनों ताजा रिपोर्ट के अंश जारी करते हुए देश की अर्थव्यवस्था आने वाले समय में कैसी रहेगी यह बताया है। ताजा रिपोर्ट में रिजर्व बैेंक ने कई चेतावनियां भी जारी की है जो बता रही है कि देश की अर्थव्यवस्था फिर से मंदी की ओर जा रही है तो वहीं शेयर बाजार में इसे ब्लेक स्वैन इवेन्ट कहा है। रिजर्व बैंक ने आशंका जताई है कि दुनियाभर में कमोडिटी महंगाई बढ़ती ब्याज दरों का असर भारत की अर्थव्यवस्था पर भी रहेगा। सरकार ने अपने दस्तावेजों में यह स्वीकार किया है कि देश आर्थिक मंदी के कठिन दौर में जा रहा है। यह साल खासकर नौकरी, निवेशक और व्यापार के लिए बेहतर नहीं रहेगा। सरकार को कोरोना के बाद जो रिकवरी की संभावना दिख रही थी वह नहीं आई है। दूसरी ओर शेयर बाजार में विदेशी निवेशकों की बिकवाली के बीच पहले से ही शेयर बाजार खड़े होने की स्थिति में नहीं आ रहा है वहीं दूसरी ओर इस रिर्पोट ने निवेशकों की नींद उड़ा दी है। रिपोर्ट बताती है कि वित्तिय संकट के चलते 7.8 लाख करोड़ रुपए निकल सकते हैं। इसे ब्लैक स्वैन इवेंट (अप्रत्याशिश घटनाक्रम) कहा जाता है। नौ माह में एकतरफा बिकवाली के चलते पहले से ही 2.37 लाख करोड़ रुपए की पूंजी बाजार से बिदा हो गई है। जून में भी 28 हजार करोड़ रुपए यहां से निकले हैं। पांच लाख करोड़ रुपए से ज्यादा बिदा होते ही शेयर बाजार की क्या स्थिति होगी यह समय बताएगा। हालांकि यह तीन परिस्थिति में ही होगा। पहली जीडीपी ग्रोथ में कोरोना जैसी गिरावट आए या शेयर बाजार इंडेक्स में अमेरिका की ली मेन ब्रदर्स बैंक डूबने पर आए उछाल और या फिर ब्याज दरों में कोई बड़ा अंतर सामने आ जाए। सूत्रों के अनुसार अभी भारतीय शेयर बाजार में 110.5 अरब डॉलर की शार्ट टर्म कैपिटल है, इसी पर सबसे ज्यादा खतरा दिखाई दे रहा है।

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