सुलेमानी चाय-एक टोकरी में बैठे वार्ड 39 के भावी पार्षद…गोलू को मिल सकता है मजदूरी में टिकट…दो ईद के बीच चुनाव…भोपाल के चक्कर लगा रहे शेख असलम…

एक टोकरी में बैठे वार्ड 39 के भावी पार्षद…

खजराने के वार्ड 39 की सियासत में खजराने के प्रशान्त किशोर कहलाने वाले चौधरी तिकड़ी हर चुनाव में अहम रोल निभाती है। पिछली बार भी इन्ही चौधरियों की टीम ने कांग्रेस के सभी उम्मीदवारों को अपनी टोकरी में बिठाकर सबसे वादा लिया था कि इस टीम में से जिसको टिकट मिलेगा बाकी सभी उसका साथ देंगे। इस बार टीम में जहां बड़े खान अपने स्वास्थ्य की वजह से राजनीति से थोड़ दूर है। वही जाहिद खान भी काम के सिलसिले में बाहर है। ऐसी हालत में चौधरियों की इस टीम के तीसरे सिपहसालार परवेज इकबाल ने अकेले ही सभी भावी पार्षदों को एक अपनी टोकरी में समेटा है। पिछली बार कसम खाने के बाद भी इकबाल इस टीम से फुदक कर निर्दलीय चुनाव लड़ लिए थे। इसी वजह से इस बार इकबाल खान को छोड़ सभी कांग्रेसी उम्मीदवारों को परवेज इकबाल ने अपनी टोकरी में बिठा लिया है और सबसे लिखवा भी लिया है कि हम में से किसी को टिकट मिलता है तो बाकी सभी उसका साथ देंगे, लेकिन फिर भी नेता तो नेता होते हैं और उस पर खजराने के नेता… खेर सलीम पठान ने इस टोकरी से सबसे पहले फुदकी मारी है, और कहा है कि चुनाव तो जरूर लड़ूंगा चाहे लोगो के बच्चों के कच्छे ही धुलना पड़े। कांग्रेस उम्मीदवार तय होने के बाद और कौन किधर फुदकी मार दे इसका अंदाजा लगाना बहुत मुश्किल है।

गोलू को मिल सकता है मजदूरी में टिकट…

खजराने में नेताओं की बात ही निराली है, वार्ड 38 से कांग्रेस दावेदार गोलू पठान तन, मन, धन से शहर के बड़े नेताओं के बंगले बनवाने में लगे है। इस पर गोलू की मजदूरी भी बनती है, दिन को दिन रात को रात नही समझ रहे गोलू के लिए बड़े नेता भी मजबूती के साथ उनका नाम आगे बढ़ा रहे है। राजनीतिक सूरमाओं की बात मानी जाय तो वार्ड 38 में कांग्रेस में ज्यादा माथापच्ची नहीं है। अन्नू पटेल किसी भी कीमत पर टिकट चाहते है, अभी अभी उनकी करोड़ों की जमीन का सौदा भी हुवा है। वहीं दिग्गी राजा का सहारा लेकर पिछले चुनाव में कांग्रेस के लिये अन लक्की साबित हुवे लक्की गोरी भी मैदान में है। इसी तरहा अगर अन्नू और लक्की दोनों का लक नहीं चला तो गोलू के गाल गुलाबी होने की संभावना है।

दो ईद के बीच चुनाव…

ईद का त्योहार लोगों को गले लगाने का सबक देता है। एक ईद चली गई दूसरी आ रही। एक महीना पहले मीठी ईद पर मुस्लिमजनों ने खूब प्यार लुटाया था। अब एक और ईद सामने खड़ी है। लेकिन इन दोनों के बीच चुनावी त्योहार ने पैराशूट से इंट्री मार दी है। मुस्लिम वार्डो में गले मिलने का सबक तो धुंधला हो गया है। शहर के कई वार्डो में गले दबाने की भी तैयारी हो रही है। निपटाने सुलझाने में भिड़े मुस्लिम नेताओ ने नज़रे मिलना तो शुरू कर दिया है लेकिन इनकी तीसरी आंख भी तेजी से काम कर रही है। ये तीसरी आंख अगले पांच सालों तक भी कई लोगों पर तिरछी ही रहने वाली होगी। अगले पांच सालों में आने वाली दस ईद भी इन आँखों का ईलाज करने में नाकाम रहेगी। कोशिश रहनी चाहिए की चुनावी कड़वाहट ईद की सिवइयों की मिठास को बर्बाद न कर दे।

दुमछल्ला
भोपाल के चक्कर लगा रहे शेख असलम…
भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चे के नए नवेले अध्यक्ष शेख असलम लगातार भोपाल के चक्कर लगा रहे हैं। सूत्रों की माने तो असलम के भोपाली चक्कर से इंदौर के कई मुस्लिम इलाक़ो के भावी पार्षदों को चक्कर आ सकते है। असलम भोपाल में किस से मिल रहे हैं, यह बात चौकाने वाली हो सकती है, लेकिन फिलहाल इस बात पर पूर्णविराम लगा रहे तो बेहतर है।

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