गुस्ताखी माफ़-धनी घोरी में खींचतान शुरू…भाजपा छोटे चुनाव के मूड में नहीं…महापौर के दादा सहित 20 दावेदार…

धनी घोरी में खींचतान शुरू…
शहर में कांग्रेस का कोई धनी-घोरी नहीं है। इसके चलते शहर कांग्रेस बड़े नेताओं के लिए गरीब की जोरू की तरह हो गई है। नगर अध्यक्ष उम्रदराज हो चुकी इकाई का गठन भी अभी तक नहीं कर पाए हैं, जबकि दूसरी ओर नए अध्यक्ष को लेकर भोपाल में नए समीकरण शुरू हो गए हैं। इधर इंदौर में अपनी ताकत बरकरार रखने को लेकर आने वाले समय में दिग्गी राजा और सजन नेता के बीच अच्छी-खासी खींचतान पदों के बंटवारों को लेकर दिखाई देगी। इंदौर में कांग्रेस के बड़े नेताओं ने अपनी मजबूत पकड़ बनाने की तैयारी जहां शुरू की है, वहीं अब कांग्रेस में ही दो धड़े बनते हुए दिख रहे हैं। दिग्गी राजा इंदौर में तो अब चुनाव तैयारियों के बीच अपना अध्यक्ष बैठाने को लेकर समीकरण बढ़ा रहे है। तो दूसरी ओर दूसरा धड़ा दो कार्यकारी अध्यक्ष बनाकर यथास्थिति रखने की कोशिश कर रहा है। इधर इंदौर में राजनीतिक हस्तक्षेप बरकरार रख रहे सजन नेता के क्षेत्र में इस बार चुनावी मैदान में कांग्रेस को बड़े पापड़ बेलना पड़ेंगे। जिन 48 सीटों को संघ के लक्ष्य में दिया गया है, उसमें सोनकच्छ भी शामिल है। ऐसे में कांग्रेस के बड़े नेताओं की खींचतान भी कांग्रेस की जड़ों में मट्ठा डालते हुए दिखाई देगी।

भाजपा छोटे चुनाव के मूड में नहीं…
एक ओर जहां आज उच्चतम न्यायालय पंचायत चुनाव और निकाय चुनाव को लेकर बड़ा फैसला देने जा रहा है, वहीं दूसरी ओर भाजपा के घर बैठ गए तमाम नेता अभी भी इस बात को लेकर संशकित हैं कि चुनाव होंगे। उनका मानना है कि आधी भाजपा जो पचास आयु पार कार्यकर्ताओं से खड़ी हुई थी, उनकी पार्टी को कोई जरूरत नहीं है। दूसरी ओर सुहास भगत के कार्यकाल में भी जमीनी कार्यकर्ताओं का हश्र सबने देख लिया है। इधर, दूसरी ओर कांग्रेस की वैतरणी से भाजपा में गंगा नहा रहे कई नेता भी निकाय चुनाव के लिए भुजंग की तरह मैदान में तैयारी कर रहे हैं। ऐसे में भाजपा के बड़े नेता, जो भोपाल की ठंडक में बैठकर भाजपा के खैवनहार बने हुए हैं, वे भी कतई नहीं चाहते कि निकाय चुनाव के छत्ते में हाथ डाल कर बड़े चुनाव के लिए मुसीबत खड़ी हो। दूसरी ओर भले ही राज्य निर्वाचन आयोग ने यह कह दिया हो कि उनकी चुनावी तैयारियां पूरी हैं, परंतु प्रशासन के सूत्र भी मान रहे हैं कि जून और जुलाई की बारिश में चुनाव कराया जाना संभव नहीं होगा। ऐसे में चुनाव की संभावना नहीं के बराबर है। भाजपा के भी सूत्र कह रहे हैं कि यदि चुनावी तैयारियां संगठन को करनी होती तो अभी तक नगरीय निकायों के प्रभारी सहित कई कदम आगे बढ़ गए होते, परंतु अब विधानसभा चुनाव को लेकर करीब डेढ़ साल का समय भी नहीं बचा है तो फिर चुनावी घोड़े, जो अस्तबल में बंधे हैं, उन्हें खोलने का कोई तुक नहीं है। हां, यह अलग बात है कि किसी को विदा होने के संकेत मिल रहे हों और वह पूरा रायता फैला कर जाने की तैयारी कर रहा हो। जिस आरक्षण को लेकर लालीपॉप दी जा रही हो, उसका तो अभी मसौदा भी तैयार नहीं हुआ है।

महापौर के दादा सहित 20 दावेदार…
भिया ने सूत और कपास के बीच जुलाहों में लट्ठमलट्ठा शुरू करवा दी है। कल उन्होंने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि नगरीय निकाय चुनाव भाजपा के लिए सबसे आसान चुनाव होगा, परंतु उन्होंने महापौर के दावेदारों को लेकर यह बता दिया कि इंदौर में रमेश मेंदोला के अलावा भी 20 से अधिक दावेदार है। अब आगे की स्थिति तो भाजपा जाने, पर दादा का नाम भी सूची में शामिल होने के साथ भाजपा की नई रणनीति में विधायकों को भी मैदान में उतारने को लेकर अब यह तय हो गया है कि इंदौर का महापौर उम्मीदवार भाजपा से आसानी से तय नहीं होगा। दूसरी ओर बाकी सभी क्षेत्रों में पार्षदों के उम्मीदवारों ने एक बार फिर कपड़े, जूते तैयार कर लिए है और फिर से मैदान में कुलांचे भरने लगे है। कई दिग्गज अपने क्षेत्र के नेताओं के भरोसे भी नहीं है। उनके अपने ही गणित है, परंतु क्षेत्र क्रमांक 2 में जितने भी उम्मीदवार से भेंट वार्ता हुई उनका एक ही कहना था दादा चाहेंगे तो ही संभव है। सब अपने-अपने घरों में दादा की हरी झंडी का इंतजार कर रहे है। साथ ही यह भी कह रहे है भगवान दादा को सद्बुद्धि भी हमारे लिए प्रदान करें। अब किसी ने जड़ों में मट्ठा डाल रखा हो तो क्या कर लेंगे…

-9826667063
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