88 प्रतिशत छोटे उद्योगों को चवन्नी भी नहीं मिली

केन्द्र सरकार का आत्मनिर्भर भारत अभियान.........................ना माया मिली ना राम

 

नई दिल्ली (दोपहर आर्थिक डेस्क)। केन्द्र सरकार द्वारा कोविड महामारी के दौरान छोटे उद्योगों के लिए घोषित किए गए राहत पैकेज का कोई भी लाभ छोटे उद्योगों को नहीं मिला। एक साल बाद जब इसकी जमीनी हकीकत को लेकर सर्वे किया गया तो वस्तु स्थिति सामने आई, बल्कि उद्योगों को लेकर कई और जानकारियां भी सर्वे से उजागर हुई। इस दौरान छोटे उद्योगों से 63 लाख लोगों की नौकरियां भी चली गई, जो वापस नहीं हो पाई। पूरे देश में 81 हजार छोटे उद्योगों पर यह सर्वे 1 से 15 जून के बीच किया गया।
चैन्नई की उद्योगों को लेकर सर्वे करने वाली सबसे बड़ी कंपनी कंसोडियम इंडियन एसोसिएशन (सीआईए) ने अपने इस सर्वे में सरकार द्वारा घोषित किए गए राहत पैकेज का उद्योगों को कितना लाभ मिला, इसे लेकर यह सर्वे किया गया। इसमें देशभर की 81 हजार से अधिक छोटे उद्योगों को शामिल किया गया था। यह सर्वे कोरोनाकाल की पहली वर्षगांठ पर किया गया था और महामारी की धूंध छंटते ही बाजार खुलने पर जमीनी हकीकत क्या रही, यह पता लगी है। 88 प्रतिशत छोटे उद्योग और सेल्फ एम्पलाइड उद्योग को सरकार की घोषणा का कोई लाभ नहीं हुआ। इनमें से कई को बैंकों ने भी ऋण देने योग्य नहीं समझा। इसमें 50 प्रतिशत कंपनियां छोटे स्तर पर उत्पादन के क्षेत्र में काम कर रही है, जबकि सर्विस के क्षेत्र में 15 प्रतिशत कंपनियां काम कर रही है। इन उद्योगों में 60 लाख के लोगों के रोजगार इस दौरान चले गए, जबकि 40 लाख दूसरे लोगों के रोजगार भी चले गए, जो इन्हीं पर आश्रित थे। उद्योगों ने यह भी माना कि 69 प्रतिशत लोगों की नौकरियां बचाने में वे सफल नहीं हो पाए। यह पैकेज आत्मनिर्भर अभियान के तहत लाया गया था। इसके क्रियान्वयन को लेकर सरकार ने अभी तक कोई सर्वे नहीं कराया है और न ही सरकार के पास घोषणा के बाद कोई जानकारी इस मामले में उपलब्ध है। पहले चरण में बैंकों ने इन उद्योगों को कर्ज नहीं दिया।
इधर छोटे उद्योगों ने सर्वे में यह बताया कि पिछले 4 माह में कच्चे माल की कीमतों में भारी इजाफा हुआ है। पेट्रोल-डीजल की लागत का असर तो दिखी रहा है, वहीं तांबे की कीमतों में 109 प्रतिशत की वृद्धि, स्टील की कीमतों में 82 प्रतिशत और एल्युमिनियम की कीमतों में 60 प्रतिशत की वृद्धि से सामानों के निर्माण की लागत में भारी इजाफा हुआ है। दूसरी ओर खरीददारी में 65 प्रतिशत की गिरावट आ गई है।
6 माह में हजारों उद्योग बंद होंगे
सर्वे में जो आंकड़े जारी किए गए हैं, उसके अनुसार अगले 6 माह में बीमार उद्योग की श्रेणी में आने वाले उद्योग बढ़ते कर्ज और मांग की कमी के चलते स्वयं ही बंद हो जाएंगे। इनमें से कई अभी भी डुबने की कगार पर पहुंच चुके हैं। दूसरी ओर सरकार की ओर से उद्योगों को लेकर दिए जा रहे आत्मनिर्भर भारत पैकेज से अब उद्योगपतियों को अब उम्मीद बाकी नहीं है।

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