Sulemani Chai – फुस्सी बम…खजराने की नूरा कुश्ती…हज का सफ़र शुरू…मुल्तानी एंड कम्पनी…


फुस्सी बम…
हर चुनाव में कांग्रेस की इज्जत बचाने का ठेकेदार बन चुका मुस्लिम समाज इस बार कोंग्रेसी बम से बड़ा नाराज चल रहा है। मुस्लिम समाज मे कांगेस के फुलझड़ी, अनार, ओर फिरकनी घूम घूम के रमजान और ईद पर बम में माचिस लगाने का इन्तेजार ही करती रही, लेकिन बम मुस्लिम समाज के सबसे बड़े त्योहार पर थोक बंद कांग्रसी वोटों को नजर अंदाज करते दिखे इक्का-दुक्का लोगों को छोड़ दे तो भावी सांसद महोदय इतने बड़े वोट बैंक को दरकिनार कर रहे है। पिछले विधानसभा चुनावों में कांग्रसी प_ो की इज्जत (जमानत) बचने में चच्चा जानो का बहुत योगदान रहा था। अबकी बार बम की जमानत राशी बचाने के लिए मुस्लिम समाज को नहीं साधा गया तो साहब का नाम हमेशा के लिए कही, बम न पड़ जाए।

खजराने की नूरा कुश्ती…

खजराना व्यापारी एसोसिएशन की नूरा कुश्ती काफी उठा पठक के बाद पूर्ण विराम तक पहुँच गई। मामला क़ुरैशी पर इल्जाम लगा कर नए अध्यक्ष के लिए कयादत शुरू की गई। कई व्यापारियों ने चुनाव के लिए भी कहा। शोशल मीडिया पर जो व्यापारी नही है उनकी राय ज्यादा शोर शराबा कर रही थी। वक्तरहते समझदारों ने कमान संभाल महमूद शेख को कार्यवाहक अध्यक्ष बना कर इस नूरा कुश्ती को न तुम हारे न हम जीते की तर्ज पर खेल का सफल आयोजन समाप्त कराया। उम्मीद है जल्द ही नया अध्यक्ष चुनाव के साथ खजराने को मिलेगा।

हज का सफ़र शुरू…

इसकी तैयारी के लिए तरबियत कैंप की शुरुआत अंजुमन के सदर शाहिद अली ने करदी है। इसमें मेहमान ए ख़ास वक्फ बोर्ड के मुखिया डॉ. सनवर पटेल है। ये कमेटी वक्फ के अधीन आती है तो पटेल का आना समझ में आता है पर हज कमेटी के मुखिया रफत वारसी निष्क्रियता की वजह से नदारद हैं या अपोजिट गुट के होने की वजह से नहीं आ रहे या कोई और वजह उसकी गवाही तो शाहिद ही दे सकते हैं, हा अंजुमन वालों ने हज कमेटी के मेंबर हेदर अली और जिला वक्फ अध्यक्ष रेहान शेख़ को भी बुलाया है, वैसे ये एकलौता तरबियत कैंप रेहता हैं, जिसमें मौतबर ओलमा इकराम की आधा दर्जन से ज़्यादा लंबी फेहरिस्त रहती है, इस केम्प में औरतों के इंतज़ाम के साथ ही सभी के लिए खाने का भी पूरा ख्याल रखा जाता है।

मुल्तानी एंड कम्पनी…

शहर की एकमात्र मुस्लिम एजुकेशनल सोसायटी इस्लामिया करिमिया पर मुल्तानी एंड कम्पनी लंबे अरसे से काबिज है। दूसरी तरफ इसी कम्पनी के साथी अब कम्पनी के दुश्मन बन बैठे है। पिछले दिनों दुश्मन कम्पनी ने कॉन्फ्रेन्स लेकर मुल्तानी कम्पनी के गब्बर पर कागजों को लेकर इल्जाम लगाया पर गब्बर भी गब्बर निकले साम, दाम, दंड, भेद से खुद को सही साबित करने दुश्मन कम्पनी के केस ही खारिज करा आये, इसी के साथ मुल्तानी एन्ड कम्पनी की फीस को लेकर चल रही सख्ती से मुस्तहिक़ भी परेशान हो रहे है। अब इन दोनों की लड़ाई में नुकसान मिल्लत का हो रहा है और जो सोसायटी कौम को आगे ले जा कर बेहतर काम कर सकती थी वो अब आपसी रंजिश से आगे बढ़ने की बजाय पीछे जा रही है, जो मुस्लिम समाज के लिए मौजूदा हालात को लेकर बहुत ही अफसोसनाक बात है।

९९७७८६२२९९

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