पटाखा कारोबार में भंयकर मंदी

ग्रीन पटाखों के केमिकल मंहगे होने के कारण 40 प्रतिशत बढ़े दाम

पटाखा कारोबार में भंयकर मंदी

पटाखा कारोबार में भंयकर मंदी

इंदौर (धर्मेन्द्रसिंह चौहान)

इस साल दिपावली की धूम चारों तरफ देखी जा रही हैं। मगर पटाखा कारोबार में मंदी के असर का अंदाजा इस बात से ही लगाया जा सकता है कि शहर के सबसे बड़े थोड़ बाजार में प्रशासन ने 60 दुकानें लगाने के लिए लायसेंस जारी किए मगर यहां सिर्फ 40 दुकानें ही लगी है। हालांकि इसका कारण दूसरे व्यापारी बता रहे हैं कि कल तक सभी दूकानें लगने की उम्मीद है। ग्रीन पटाखे बनाने के लिए इस्तेमाल होने वाला केमिकल मंहगा होने से इनकी लागत में 30 से 40 प्रतिशत तक महंगे हो गए है। बावजूद इसके व्यापारियों को इस साल 300 करोड़ का व्यापार होने की उम्मीद है। आज से यहां की थोक पटाखा दुकानों खेरची व्यापारी बड़ी संख्या में पहुंचने लगे हैं। वहीं आसपास के गांवों, कस्बों से भी दुकानदार बड़ी संख्या में पहुंच रहे हैं।

वैश्विक कोरोना महामारी के कारण पिछले दो सालों से दिपावली के त्यौहार पर पटाखों का कारोबार ठंड़ा रहा। दैनिक दोपहर की टीम ने रिजनल पार्क के साथ ही राउ में लगने वाली दुकानों के थोक व खेरची व्यापारियों से बात की, इनका कहना है कि कोरोना महामारी के पहले साल शहर में सख्ती के साथ प्रतिबंध होने के बावजूद 50 करोड़ से ज्यादा का कारोबार हो गया था।

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वहीं दूसरे साल यही आंकड़ा 100 करोड़ के पार पहुंच गया था। इसे देखते हुए शहर के पटाखा कारोबारियों को इस साल 300 करोड़ से ज्यादा का व्यापार होने की उम्मीद है। इस साल चल रहे मंदी के दौर के बावजूद बाजारों में भीड़ इतनी हैं कि पैर धरने की जगह तक नही मिल रही है।

लोग घरों से निकल कर हर तरह की खरीदारी कर रहे है। दीपोउत्सव नजदीक आते ही शहर में पटाखा बाजार भी सज-धज कर तैयार हो गया हैं। रिजनल पार्क के सामने प्रशासन ने शहर के सबसे बड़े पटाखा बाजार लगाने के लिए लायसेंस जारी किए, मगर आज तक यहां पर सिर्फ 40 दुकानें ही लग पाई है।

वहीं बात करें राऊ की यहां पर लगभग 30 होलसेल की दुकानें लगी हैं। जबकि अगर पूरे शहर की खेरची दुकानों का आंकड़ा यहां से व्यापारियों से पूछा तो उन्होने शहर में 1000 से ज्यादा खेरची दुकानें होने की बात कही है। इस बार सबसे अच्छी बात इस दीवाली यह रहेंगी कि शहर का प्रदूषण स्तर हर साल की तुलना में काफी कम रहेगा। क्योंकि इस साल सबसे ज्यादा ग्रीन पटाखें ही बाजार में बिकने के लिए आए हैं।

इस साल बाजार में बिकने वाले पटाखों के पैकेट पर ग्रीन फायर वर्क्स का लोगो लगा होना जरूरी है। इसलिए ग्रीन पटाखों का कलेक्शन हर रेंज में कारोबारियों के पास उपलब्ध है।

बच्चों की पसंद का खास ध्यान, चुटपुट, बटरफ्लाई, पॉप-पॉप की मांग

पटाखा कारोबारी जावेद भाई ने बताया कि इस बार बच्चों की पसंद का खास ध्यान रखा गया है। इनके लिए बटरफ्लाई और चुटपुट के साथ ही नए तरीके की टिकड़ी, लस्सनबम, पॉप-पॉप के साथ ही सेवन शॉट्स काफी लुभा रहे हैं। इसके अलावा रेसिंग ट्रेन, सुतली, चकरी, अनार और रॉकेट की बहुत सारी नई वैरायटी खास कर बच्चों के लिए आई है। तेज आवाज वाले रस्सी बम और बड़े बम भी बच्चें खुब पसंद कर रहे हैं।

पटाखा कारोबार में भंयकर मंदी
green crackers

बच्चों के लिए बाजार में 5 रूपए प्रति नग से 120 रूपए नग तक पटाखे उपलब्ध हैं, जो बच्चों को खूब भा रहे हैं। बटरफ्लाई एक राउंड शेप का पटाखा है, जिसे एक तपेली में रखकर चलाया जाता है। इसकी सुतली में आग लगाने पर यह तितली की तरह घूमते हुए एक से डेढ़ मिनट तक अलग-अलग कलर में की रोशनी देता है। बात करें चुटपुट तो यह चार-पांच फीट की ऊंचाई पर उठते हुए अपने नाम ही की तरह 30 सेकेंड तक चुटपुट की आवाज निकालता है। वहीं स्मोक पटाखा की तो यह एक मिनट तक चलला है और पांच तरह का कलर फूल धुआं निकालता है।

पटाखों के दाम 30 प्रतिशत ज्यादा

सामान्य पटाखों से ग्रीन पटाखों के दाम करीब 30 प्रतिशत ज्यादा हैं। व्यापारी लक्ष्मण बालचंद ने बताया कि इस साल पटाखे लेने महिलाएं ज्यादा आ रही हैं। वे ग्रीन पटाखे ही खरीद रही हैं। थोक में भी मांग बढ़ी है। व्यापारी निकेत पाठक ने बताया कि ब्रांडेड कंपनियों के ग्रीन पटाखे ज्यादा चलन में हैं। ग्रीन पटाखों के पैकेट पर पटाखा बनाने में लगे सामग्री की जानकारी व मात्रा छपी रहती है। इसके बारे में लोगों को बता रहे हैं। इस साल इनकी बिक्री पिछले सालों के मुकाबले दोगुनी है।

यह होता हैं ग्रीन पटाखों में

एयर पॉल्यूशन को कंट्रोल करने के लिए साल 2018 में ग्रीन पटाखों का कांसेप्ट लाया गया था। इसे सामान्य पटाखों के विकल्प के रूप में आमजन के सामने पेश किया गया था। इसके बाद दो साल कोरोना महामारी में चले गए। यही कारण हैं कि ग्रीन पटाखें के बारे में लोगों को कम जानकारी है। ग्रीन पटाखों में एलुमिनियम, बेरियम, पोटेशियम नाइट्रेट और कार्बन जैसे खतरनाक केमिकल नहीं होते हैं। इन पटाखों में सामान्य पटाखों की अपेक्षा आवाज भी काफी कम होती है। यही कारण हैं कि प्रशासन अब इन्हें चलन में लाने के लिए लोगों से अपिल कर रहा हैं।

बारकोड को करें स्कैन

मप्र प्रदूषण बोर्ड के प्रभारी मुख्य रसायनज्ञ एसएन पाटिल ने बताया कि प्रदूषण को लेकर एनजीटी व प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की गाइडलाइन अनुसार निर्देश जारी किए हैं। ग्रीन पटाखों को खरीदने से पहले पैकेट पर लिखी जानकारी ग्राहक अब पढ़ सकते हैं। फिर भी कोई डाउट रहे तो पैकेट पर छपे बारकोड को स्कैन कर अपने डाउट क्लीयर कर सकते हैं।

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