dussehra 2022: बाजार में बिक रहे 500 से 50 हजार कीमत के रावण

इंदौर बना रावण की मंडी, अब दशानन नहीं रावण का होता है दहन, शहर में तैयारियां जोरों पर, उत्सव समिति करा रही बुकिंंग

dussehra 2022

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इंदौर। शहर इन दिनों रावण की मंडी बन गया है। मालवा मिल क्षेत्र में जगह जगह रावण के पुतलों दुकाने सज गई है। यहां बन रहे रावण आस पास के शहरों में भी बड़ी तादाद में खरीदे जा रहे है। मालवा मिल चोराहे के आसपास दर्जन भर दुकानों में हजारों रावण के पुतले बिकने के लिए तैयार है। मगर अब ज्यादातर जगह पर दशानन का नही रावण का ही दहन होता है।

प्रदेश की औद्योगिक राजधानी इंदौर इन दिनों रावण की मंडी बन गया है। यहां पर 500 रुपए से लेकर 50 हजार रुपए तक के पुतले बिकने के लिए तैयार खड़े है। शहर में बिकने वाले रावण के पुतलो में सबसे ज्यादा इस क्षेत्र से ही बेचे जाते है। मालवा मिल, विजय नगर, कालानी नगर, जिंसी, छावनी, खजराना, टॉवर चौराहा जैसे क्षेत्रों में इन दिनों सैकड़ों रावण की दुकानें सज रही हैं। यहां पर 500 रुपए से 50 हजार रुपए तक रावण के पुतले बिकने के लिए तैयार खड़े है। इन रेडिमेड पुतलों की मांग शहर से बाहर जैसे पीथमपुर, धार, देवास के साथ ही आस-पास के ग्रामीण क्षेत्रों में भी बहुत रहती हैं। मगर महंगाई को देखते हुए ज्यादातर जगहों पर दशानन नही रावण का ही दहन होने लगा है। पुतले बनाने वालों का कहना है कि ऐसा लोग पैसा बचाने के लिए कर रहे है। महंगाई ने रावण दहन की परंपरा को बदल कर रख दिया है। आयोजक अब दस सीस वाले रावण को जलाने की जगह एक सीस वाले रावण के पुतले को जलाना पसंद कर रहे है।

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यही कारण हैं कि रावण दहन करने वाले ज्यादातर आयोजक अब मेघनाथ और कुंभकरण के बगैर ही रावण का दहन के आयोजन कर रहे हैं। इतना ही नहीं महंगाई की मार दशानन के नौ सिर पर भी पड़ गई हैं, जिसके चलते रावण के बाजार में दशानन के नौ सिर की मांग काफी कम हो गई है। नतीजतन ज्यादातर स्थानों पर अब दशानन नहीं, सिर्फ रावण का दहन किया जाने लगा है। रावण के पुतलों के होल सेल विक्रेता लक्ष्मण धुरवाल का कहना है कि दस फीट का रावण बनवाने के लिए दो साल पहले 4 हजार रूपए का खर्च आता था जो अब बढ़कर डबल हो गया है। जबकि रावण के साथ जलाए जाने वाले अन्य पुतलों की मांग न के बराबर हो गई है।

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मंहगाई के चलते अब मेघनाथ व कुंभकरण के पुतलों को कोई नही खरीदता है। वहीं एक अन्य विक्रेता राजेश भाई का कहना है कि प्रतिस्पर्धा के चलते शहर में इन दिनों रावण के पुतले बनाकर बैचने वालों की बाड़ सी आ गई है।

जिससे इस धंधे में भी काफी इजाफा हो रहा है। सिजनेवाल धंधे में अब रावण के पुतलों को बेचना भी एक धंधा बन गया है। एक अन्य विक्रेता विजेश मंडराई का कहना है कि बड़ती महंगाई ने सालाना त्यौहारो पर भी पड़ने लगी है। जिससे अब आयोजन करता लंका का भी करने से परहेज करने लगे है। क्योंकि लंका निर्माण में भी खर्च दो से तीन गुना बड़ जाता हैं।dussehra 2022

रावण के पुतलों में लगने वाली सामग्री जैसे बांस, टाट, घास, तार ताव के साथ ही अन्य सामानों की कीमतों के आसमान छुते भावों ने दशानन को रावण बना दिया है। यही कारण है कि शहर में ऐसे कई आयोजक भी हैं जिन्होंने रावण दहन के कार्यक्रम ही बंद कर दिए है।

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