Ganesh Utsav Indore
मेहबूब कुरैशी
इंदौर। १८५७ के विद्रोह के बाद राष्ट्रीय एकता से डरी अंग्रेजी सरकार ने इंदौर में होलकर महाराज और जनता पर तरह तरह से निगरानी रखनी शुरू कर दी थी। शिवाजी महाराज द्वारा शुरू किए गए गणेशोत्सव को आजादी के नायक बालगंगाधर तिलक ने नए रूप में शुरू किया था। यह सिर्फ त्यौहार ही नहीं बल्कि राष्ट्रीय एकता का प्रतीक बन गया था। स्वतंत्रता सेनानी इसी दौरान आजादी की लौ को तेज करने के लिए इन आयोजनों का सहारा लेते थे। इन्ही आयोजनों में यूवाओं को एकत्र कर नई रणनीति के संदेश दिए जाते थे।
बालगंगाधर तिलक ने पुना में गणेशोत्सव के दौरान भगवान गणेश की सामुहिक आरती और पूजा के कार्यक्रमों की नए रूप में शुरूआत की थी। तिलक जी का यह बड़ा कारनामा था जो स्वतंत्रता सेनानियों के मिलने जुलने का बड़़ा जरिया बना था। पूना के बाद यह आयोजन पूरे महाराष्ट्र में तो मनाया ही जाता था लेकिन महाराष्ट्री के बाद इस उत्सव को बड़े रूप में सिर्फ इंदौर में ही मनाया जाने लागा था। यही वजह थी कि इंदौर की अंग्रेजी सरकार इस आयोजन $के खिलाफ खौफ का माहौल पैदा करने की कोशिशें करने लगी थी। इसके बाद भी लोगों में भारी उत्साह देखा जाता था। उस समय इंदौर के ही ज्ञान प्रकाश मंडल के हाथों गणेशोत्सव और शिवाजी उत्सव की बागडोर रहती थी।
महाराजा शिराजीराव के शासनकाल से ही इंदौर में राष्ट्रवादी आंदोलन शुरू हो गया था। शहर के नागरिक शिवाजी उत्सव और गणेश उत्सव को अंग्रेजी शासन से मुक्ति के लिए पतिज्ञा के रूप में मनाने लगे थे। इन उत्सवों में भारी उत्साह से लोग भाग लेते थे। १९०७ का शिवाजी उत्सव इंदौर के अंग्रेज अधिकारियों की आंख में किरकिरी की तरह चुभ रहा था। क्यों कि इस उत्सव नेें आजादी की ललक लोगों में खूब भड़का दी थी। यही वजह थी कि अंग्रेजी सरकार ने इंदौर के राज्य कारभारी (प्रधानमंत्री )नानकचंद जी पर दबाव डाला कि वह शिवाजी उत्सव के लिए एक निषेधाज्ञा आदेश जारी करें। तब मजबूर होकर नानकचंद जी ने आदेश जारी किए थे। जिसका पूरा विवरण इस प्रकार है……
कम उम्र के कुछ लोगों ने पिछले साल शिवाजी उत्सव इंदौर में कुछ हद तक मनाया । इसलिए श्रीमंत महाराजा होलकर की रय्यत और नौकरों को इत्तला दी जाती है कि वह इस प्रकार के जलसे जो राजनीतिक स्तर पर आयोजति किए जाए जाते है वह मुनासिब नहीं है। हर खास ओ आम चाहे वह इंदौर स्टेट की रय्यत का हो या अन्य जगह का , आगाही दी जाती है कि जब तक वह इंदौर की रियासत में रहैं इस प्रकार के जलसों को खड़ा न करें और न ही उनमें शरीक हों। इस हुकुम की अदूली का परिणाम गुनाहगारों के वास्ते बहुत बुरा होगा।
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इसी तरह $के एक शिकायती पत्र के द्वारा इंदौर के पुलिस कमिश्रर सी.एम सेग्रिम ने भारत सरकार को गणपति उत्सव की गोपनीय रिपोर्ट भेजी थी।….. इसमें लिखा था कि…
इंदौर में गणपति उत्सव रविवार ३० जुलाई १९०८ को बड़़े उत्साह से मनाया गया। सुबह नौ बजे से जूना तोपखाना स्थित ईस्टर्न ट्रेडिंग कंपनी के अहाते से एक जुलूस के लिए हाथी, बैनर्स, झंडे तथा बैंड इत्यादि बुले साहब की ओर से दिए गए थे। उस जुलूस में लगभग ४०० लोग शामिल थे। जुलूस में शिवाजी की जय, तिलक की जय, वंदे मातरम आदि नारे लगाए जा रहे थे। यह जुरूस दो घंटे में बालीजी मंदिर पहुंच गया। शाम को वहां वेदपाठ का कार्यक्रम रखा गया।
इस दौर में कंपनी सरकार ने अपनी गुप्तचर शाखा को भी बेहद चौकन्ना कर दिया था। उन्हे आदेश दिए गए थे कि कही भी इन आयोजनों की भनक लगे तो तुरंत सूचना दी जाए। इन आयोजनों के लिए खौफ का माहौल पैदा किया जा रहा था। इसके बवजूद लोगों का उत्साह कम नहीं हो रहा था।
इंदौर का चमत्कारिक गणेश मंदिर
महारानी देवी अहिल्या बाई होलकर ने १७३५ में कराया था निर्माण
इंदौर शहर में स्थित खजराना गणेश मंदिर का भक्तों के बीच अलग स्थान है. इस मंदिर में दुनियाभर से भक्त आकर विघ्नहर्ता के सामने अपनी मन्नतों की अर्जी लगाते हैं. खजराना गणेश की ख्याति का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि फिल्मी कलाकारों और खिलाड़ियों से लेकर बड़े नेताओं तक सभी खजराना गणेश के दर्शन कर बप्पा का आशीर्वाद लेने पहुंचते हैं. मान्यता है कि यहां पर मनोकामना लेकर आने वाला कोई भी भक्त कभी निराश होकर नहीं लौटता है.महारानी देवी अहिल्या बाई होलकर ने १७३५ में इस मंदिर का निर्माण करवाया था।
विश्व प्रसिद्ध खजराना गणेश मंदिर की अपनी अनूठी महिमा है. माना जाता है कि यहां आने वाले सभी भक्तों की मनोकमनाएं अवश्य पूरी होती है. यह एक ऐसा मंदिर है जहां भगवान की चौखट पर पट नहीं है. भक्तों के लिए 24 घंटे दर्शन की व्यवस्था होती है. हर व?्त एक विशेष मंत्र का जाप होता रहता है. मान्यता है कि जब भी किसी पर कोई विपत्ति आती है तो यहां पुजारियों के द्वारा एक विशेष अनुष्ठान और पूजन किया जाता है, जिससे भगवान गणेश अपने भक्त का विघ्न हर लेते हैं, इसीलिए भगवान गणेश को विघ्नहर्ता भी कहा जाता है. खजराना गणेश मंदिर के पुजारी के मुताबि$क यह मंदिर काफी प्राचीन है. प्राचीनतम होने का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि इस मंदिर की स्थापना खुद माता अहिल्या ने अपने सामने करवाई थी. Ganesh Utsav Indore

