उज्जैन-देवास जनपदों में वर्मा की रणनीति भारी पड़ी

इंदौर में चुनावी प्रबंधन में यादव और बाकलीवाल दोनों ही फेल हो गए

इंदौर। मध्यप्रदेश में नगर निकाय चुनाव के रुझानों ने भाजपा के लिए चिंता की लकीरें खींच दी हैं। पिछली बार भाजपा 16 नगर निगमो पर काबिज थी परंतु इस बार 16 में से पांच नगर निगम रीवा, ग्वालियर, जबलपुर, छिंदवाड़ा, मुरैना भाजपा के हाथों से जाती रही तो वही उज्जैन और बुरहानपुर में पांचसौ से भी कम मतों के अंतर से भाजपा ने जीत दर्ज की। उज्जैन और देवास की जनपदों में तो भाजपा का सूपड़ा ही साफ हो गया है।

कांग्रेस के मुखिया कमलनाथ के सिपहसालार और सबसे करीबी प्रदेश के पूर्व कैबीनेट मंत्री एवं वरिष्ठ विधायक सज्जन सिंह वर्मा को नगर निकाय चुनाव में उज्जैन संभाग का प्रभार सौपा गया था। जिसमे उनकी कुशल रणनीति के सामने भाजपा चारो खाने चित हो गयी है। उज्जैन नगर निगम में तराना से विधायक महेश परमार ने काटे की टक्कर देते हुए भाजपा के सबसे मजबूत गढ़ को हिला कर रख दिया। जनपद पंचायतों के चुनाव में उज्जैन, खाचरौद, तराना, जनपदों में कांग्रेस, बड़नगर में निर्दलीय घटिया और महिदपुर में भाजपा ने जीत दर्ज की। देवास नगर निगम में भाजपा अपना कब्जा बरकरार रख पायी लेकिन ग्रामीण अंचलों में भाजपा का सूपड़ा साफ हो गया। देवास, सोनकच्छ, टोंकखुर्द,बागली, कन्नौद, हाटपिपल्या में एक तरफा कांग्रेस का कब्जा रहा।

कमल नाथ ने जिस विश्वास के साथ सज्जन के हाथों में उज्जैन संभाग की कमान सौपी थी उसमें वह उनके विश्वास को कायम रखने में कामयाब रहे वही कांग्रेसी गढ़ो को और अधिक मजबूती प्रदान करते हुए भाजपा के गढ़ो में सेंधमारी करी जिससे भाजपा के नेताओ में बैचनी का माहौल है। 2023 के विधानसभा चुनाव को दृष्टिगत रखते हुए कांग्रेस एक एक कदम बहुत सोच समझकर आगे बढ़ा रही है परंतु शहर एवं जिला अध्यक्षो की कमजोर संगठन पकड़ के चलते कमलनाथ के खाते में पराजय दर्ज करवा रहे है।

इंदौर ग्रामीण में भाजपा ने कांग्रेस को दी मात..

इंदौर में जिला पंचायत का चुनाव शेष है परन्तु जनपदों के चुनाव में सावेर, देपालपुर, महू में भाजपा ने जनपदों पर कब्जा करते हुए इंदौर जनपद भी कांग्रेस से छीन ली जिसमे कांग्रेस के पास पूर्ण बहुमत था इंदौर जिला कांग्रेस अध्यक्ष सदाशिव यादव की अपरिपक्वता और समन्वय न बिठवा पाने की वजह से इंदौर जनपद में कांग्रेस के पास बहुमत होने के बाद भी अध्यक्ष की कुर्सी पर भाजपा का कब्जा हो गया और कांग्रेस को उपाध्यक्ष के पद पर ही संतोष करना पड़ना।

जबकि जनपद पंचायत और इंदौर नगर निगम में नेता प्रतिपक्ष बनाए जाने को लेकर कमलनाथ ने विशेष तौर पर सेवादल के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष महेंद्र जोशी के हाथों में कमान सौंपी थी। परन्तु वो भी जिला अध्यक्ष की नासमझी की वजह से गच्चा खा गये। अब इंदौर जनपद में बहुमत होने के बाद भी अध्यक्ष की कुर्सी हाथ से जाने की वजह से उनका आक्रोश चरम पर है जो जल्द ही गुबार बनके फूटेगा। पहले ही इंदौर नगर निगम चुनाव में पार्षद प्रत्याशी चयन और बदतर चुनावी प्रबंधन को लेकर शहर अध्यक्ष विनय बाकलीवाल कार्यकर्ताओं के निशाने पर होकर इस्तीफे देने का दबाव झेल रहे है। अब जिला कांग्रेस अध्यक्ष सदाशिव यादव के खिलाफ भी कांग्रेस कार्यकर्ता खुल कर मैदान में उतरने की तैयारी में है।

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