गुस्ताखी माफ़-लालवानी जमीन नहीं बना पा रहे…हार के बाद ठिकरे की घंटी किसे बांधे…सौफों से पुरानी दीमकें अब साफ…

लालवानी जमीन नहीं बना पा रहे…

इंदौर नगर निगम के चुनाव में इस बार शहर के लोकप्रिय सांसद शंकर लालवानी के कई क्षेत्रों में साक्षात दर्शन का कार्यक्रम कम ही रहा। वैसे भी भाजपा के देव-दुर्लभ कार्यकर्ता उनकी और अपनी दोनों की जमीनें समझते हैं। इस चुनाव में जहां उन्हें कैलाश विजयवर्गीय से लेकर संगठन के कई नेताओं ने उनके चहेते उम्मीदवारों को दरकिनार करते हुए क्षेत्रीय विधायकों और संगठन के पदाधिकारियों के उम्मीदवारों को ही जगह दी, वे तमाम प्रयास के बाद केवल तीन महिलाओं के टिकट ही ला पाए। हालांकि वे भी समझ रहे हैं कि वे भाग्य के सांसद हैं और जब तक भाग्य प्रबल है, तब तक तो कोई तकलीफ नहीं है और अभी लोकसभा चुनाव में भी समय है। चुनाव के दौरान भी शहर में रोड शो और सभाएं होती रहीं, पर वे गाहे-बगाहे ही दिखाई दिए। हालांकि लालवानी शहर के विकास कार्यों को लेकर लगातार अपनी पहचान बनाने में लगे हुए है। इसके बाद भी कार्यकर्ताओं के बीच वे अपने आप को सांसद के रूप में स्थापित नहीं कर पा रहे है। इसका कारण यह भी है कि कई दिग्गज को दरकिनार कर वे सांसद का पद लूट ले गए।

हार के बाद ठिकरे की घंटी किसे बांधे…


कांग्रेस में इन दिनों चुनाव परिणाम आने के बाद बड़ी उठापटक शुरू हो गई है। करारी हार का ठीकरा तो विनय बाकलीवाल पर फूटना तय था ही, परंतु बिल्ली के भाग से छींका टूट गया और संजू बाबू एक नंबर में ही औंधे मुंह हो गए। यहां की हार के बाद वे दूसरे क्षेत्रों की समीक्षा करने के लायक नहीं रह गए। इधर विनय बाकलीवाल के चार उम्मीदवार मैदान में थे और चुनाव के शुरू होने के बाद ही लग गया था कि यह चारों ही मैदान के बजाय अब दिशा-मैदान में जाएंगे और ऐसा हुआ भी। पूरा चुनाव कांग्रेस के नेता गलतफहमी के आधार पर लड़ रहे थे। एक ओर जहां भाजपा के पास बूथ स्तर तक ताकतवर कार्यकर्ता मैदान में थे तो दूसरी ओर कांग्रेस के पास अब नेताओं की बड़ी भीड़ ही बाकी बची है। जमीन पर अब कांग्रेस का कोई घनी-घोरी नहीं दिखाई दे रहा है।

सौफों से पुरानी दीमकें अब साफ…


अंतत: नए महापौर के आने से पहले नगर निगम के महापौर कार्यालय का जीर्णोद्धार शुरू हो गया और इसी के साथ महापौर कार्यालय और अन्य कार्यालय में लगे सोफे नए सिरे से बनाकर जब लगाने का काम शुरू किया जा रहा था तो देखा कि कई सोफे में दीमक लग गई है। वैसे भी नगर निगम में इतनी दीमक लग चुकी है कि नगर निगम की कोशिश के बाद भी निगम के राजस्व का बुरादा निकल रहा है। अब नए सिरे से नए सोफे वापस तैयार कर दिए गए हैं। सही बात भी है, इन सोफे में अब भी पुरानी दीमकें ही चिपकी रहेंगी तो कैसे काम चलेगा।

-9826667063

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