भारत माला परियोजना : 34800 किमी में से समय अवधि समाप्त होने के बाद बनी 8134 किलोमीटर

प्रधानमंत्री की बहुआयामी योजना पटरी से उतरी

नई दिल्ली (ब्यूरो)। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सबसे ज्यादा प्रचार की जाने वाली भारत माला योजना अब बजट के अभाव और महंगाई की मार के चलते अपनी तय अवधि से अगले आठ साल बाद भी पूरी नहीं हो पाएगी। यह योजना वर्ष मार्च 2022 पूर्ण होना थी।

इस योजना के तहत देशभर में सड़कों को जोड़ने के लिए 34800 किलोमीटर सड़क का निर्माण होना था। अभी तक 8134 किलोमीटर ही बन पाया है। वहीं अब इसकी लागत दुगनी होने जा रही है। वहीं बजट के अभाव के साथ ही सीमेंट, सरिया और जमीन अधिग्रहण के लिए एनएचएआई के पास आगे कार्य बढ़ाने की स्थिति नहीं बन पा रही है। वहीं राष्ट्रीय राजमार्ग भी जो हर दिन 22 किलोमीटर निर्मित होना था, वह भी नहीं हो पा रहा है।

रेटिंग एजेंसी इक्रा ने यह जानकारी जारी करते हुए बताया है कि 2015 में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इस भारत माला परियोजना का एलान किया था जो वर्ष 2022 तक पूरी होना थी। इसके अंतर्गत 34800 किलोमीटर उच्च गुणवत्ता का मार्ग बनना था, परंतु यह योजना अब पूरी तरह पटरी से उतर गई है। इस योजना की लागत भी अब बढ़कर 10.63 लाख करोड़ के पार पहुंच जाएगी, जो योजना की कुल लागत से दुगना होगा। वहीं बजट के अभाव में काम कर रही कान्ट्रेक्टर कंपनियों ने भी हाथ खींच लिया है। 20 हजार किलोमीटर के टैंडर जारी होने के बाद भी 8134 किलोमीटर का ही निर्माण हो पाया है।

दूसरी ओर सड़क बनाने वाली एजेंसी एनएचएआई के पास भी अब बजट का अभाव होने के साथ 3 लाख करोड़ का कर्ज हो चुका है और सरकार ने आगे कर्ज लेने पर रोक लगा दी है। इसके चलते पूरे निर्माण की गति नहीं के बराबर रह गई है। अब यह भारत माला परियोजना यदि बजट आगे जारी रहा तो 2028 के बाद ही पूरी हो पाएगी।

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