इंदौर में जीत-हार को लेकर नहीं चला है इस बार सट्टा कारोबार

शर्त के आधार पर ही लगते रहे छोटे सट्टे, दोनों की जीत पर लगी हैं शर्तें

इंदौर। शहर के नगरीय निकाय चुनाव को लेकर सट्टे के जिस कारोबार में भाव तय होने का मामला बताया जा रहा है। इस मामले में सटोरियों का कहना है कि शहर में कहीं पर भी इस बार बड़े पैमाने पर सट्टा नहीं खेला गया है। आपसी सट्टे को लेकर कई लोग शर्त के हिसाब से भले ही सट्टा खेल रहे हो परंतु यह भी पच्चीस लाख रुपए से ऊपर का नहीं है। यदि सट्टा बाजार में जीत-हार को लेकर इस बार सट्टा होता तो यह पांच करोड़ से ऊपर का हो जाता। सट्टे को लेकर चल रहे भाव के मामले में भी शहर के बड़े सटोरिए कोई दांव नहीं लगा रहे हैं।


इंदौर में सट्टे का बड़ा कोराबार है और सबसे $ज्यादा सट्टा क्रिकेट पर भी खेला जाता है। अभी भी क्रिकेट को लेकर ही सट्टा सबसे ज्यादा मोबाइल पर ही चलता रहता है। इसमे चार सौ से अधिक लोग हर दिन दो से तीन करोड़ रुपए तक का सट्टा करते रहते हैं। इसके अलावा लोकसभा और विधानसभा चुनाव के लिए भी शहर में सट्टे के कारोबारी भाव के हिसाब से बुकी का काम करते रहते हैं। यह सट्टा गुजरात और राजस्थान से भी होता है जिसमे इंदौर के सटोरिए अपनी हिस्सेदारी करते रहते हैं।

इस बार नगरीय निकाय चुनाव में भाजपा और कांग्रेस की जीत को लेकर बहुत ज्यादा उत्साह बाजार में नहीं दिखाई दे रहा था और इसी के चलते कई सटोरियों ने अपने आपको इस मामले से दूर कर रखा है और इसीलिए शहर में संजय शुक्ला या पुष्यमित्र भार्गव की जीत हार को लेकर सट्टे का कारोबार नहीं चला।

कई जगहों पर तो सट्टा लगाने के लिए भी कुछ लोग अलग अलग जगहों पर बातचीत करते रहे। परंतु किसी ने भी सीधे सट्टे को लेकर कारोबार नहीं किया। सटोरियों का कहना है कि इस बार शर्त के हिसाब से सट्टा चला है। जिसमे कई जगहों पर संजय शुक्ला की जीत को लेकर भी पैसा लगाया गया है। तो कई जगहों पर पुष्यमित्र भार्गव की जीत को लेकर भी खेला गया है। कुल मिलाकर पिछले कई चुनावों के बाद इस बार शहर में सट्टे का कारोबार चुनावों में पांच प्रतिशत भी नहीं दिखाई दिया है।

सट्टे का बड़ा कारोबार शहर के बड़े क्लबों से निकलकर सराफा की गलियों तक चलता है। परंतु इस बार कहीं पर भी बड़ा कारोबार जीत हार को लेकर नहीं हुआ। शर्त के हिसाब से लोगों ने अपने अपने पक्ष को लेकर मजबूत बताते हुए संजय शुक्ला की जीत से लेकर पुष्यमित्र भार्गव की जीत तक पैसे लगा रखे है। पार्षदों को लेकर भी शहर में कोई सट्टा इस बार नहीं चला।

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