क्षेत्र क्र. 3 वार्ड परिक्रमा : दो वार्डों में कांटे की टक्कर दो वार्डों में कांग्रेस, एक वार्ड में भाजपा भारी

भाजपा के कई दिग्गज इस बार उम्मीदवारी की दौड़ से बाहर किए गए, कांग्रेस के जोशी बंधु अलग-अलग सक्रिय

इंदौर। क्षेत्र क्र. 3 के वार्ड क्र. 60 जहां मुस्लिम बाहुल्य वार्ड होने के साथ इस वार्ड से कांग्रेस को अच्छी बढ़त मिलती रही है तो वहीं वार्ड 61 में जो पूर्व मंत्री सज्जनसिंह वर्मा और उनके परिवार के प्रभाव का है। यहां पर भी कांग्रेस को बढ़त बनी हुई है। हालांकि इस वार्ड से सज्जन वर्मा और पूर्व विधायक अश्विन जोशी के बीच खींचतान के चलते यहां से विधानसभा में बढ़त नहीं मिल पाती है। वार्ड 62 में पिछली बार भाजपा के बगावती जगदीश धनेरिया ने यहां भाजपा का बड़ा नुकसान किया था वहीं यह वार्ड ब्राह्मण बाहुल्य वार्ड है। इसके अलावा इस वार्ड में मुस्लिम आबादी भी बड़ी तादाद में है। वार्ड 63 यह वार्ड पिछली बार भाजपा के पास ही रहा है। इस वार्ड से कैलाश विजयवर्गीय के समर्थक रामदास की पत्नी शोभा गर्ग को मैदान में उतारा था। इस वार्ड से कांग्रेस ने अपने मजबूत नेता शैलेष गर्ग को उतारा है। यह वार्ड वैश्य बाहुल्य वार्ड है परंतु इस वार्ड में निर्णायक वोट के लिए महेन्द्र हार्डिया और उमेश शर्मा का साथ चाहिए। इस वार्ड से कांग्रेस लगातार हारती रही है। वार्ड 64 में भाजपा ने इस बार कैलाश विजयवर्गीय के कट्टर समर्थक मनीष शर्मा मामा को मैदान में उतारा है। इस वार्डसे कांग्रेस ने पिछली बार निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में अपनी ताकत दिखा चुके दिनेश कुशवाह को उम्मीदवार बनाया है। इस वार्ड में मौर्य और माली समाज का अच्छा-खासा प्रभाव है। पिछले विधानसभा चुनाव में यहां से भाजपा की लीड कम हो गई थी।

वार्ड 60, रानीपुरा
पुरुष 9371, महिला 9079
कुल मतदाता 18451

यह वार्ड शुरू से ही मुस्लिम आबादी के प्रभाव का रहा है। इस वार्ड में 70 प्रतिशत आबादी मुस्लिम है और 30 प्रतिशत आबादी हिन्दू है। इस वार्ड का समीकरण शुरू से ही कांग्रेस के पक्ष में रहा है। इस बार यहां से कांग्रेस ने पूर्व पार्षद अंसाफ अंसारी की पत्नी सुनहरा अंसारी को मैदान में उतारा है। भाजपा की ओर से यहां से युवामोर्चा के नेता सुमित पिपले को उम्मीदवार बनाया गया है जो आकाश विजयवर्गीय की पसंद हैं। इस वार्ड से यहां के भाजपा के ताकतवर नेता महेश गोयल पिछले दो चुनाव से दावा कर रहे थे। इस वार्ड मे महारानी रोड, नई बागड़, दौलतगंज सहित कईक्षेत्र आते हैं। इस वार्ड में अंसारी वोटों की ताकत ज्यादा है। इसीलिए पूर्व में यहां से मुन्ना अंसारी जीतते रहे हैं। इस बारवे कांग्रेस से बाहर होकर भाजपा के साथ प्रचार कर रहे हंै। पिछली बार भी यहां से कांग्रेस पार्षद का चुनाव 996 वोटों से जीती थी जबकि विधानसभा में कांग्रेस ने अच्छी बढ़त बनाई थी। यह वार्ड इस बार भी कम मतों के अंतर से कांग्रेस की झोली में ही। जाता दिख रहा है। यह क्षेत्र करोबारियों का क्षेत्र भी माना जाता है। यहां बड़ी आबादी घरों से ही कामकाज करती है। हांलाकि क्षेत्र में अभी भी समस्याए बनी हुई है।

 

वार्ड 61, तात्या सरवटे
पुरुष 9424, महिला 9433
कुल मतदाता 18857

यह वार्ड कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री सज्जन वर्मा के परिवार के प्रभाव का माना जाता है। यहां से पिछली बार अभय वर्मा पार्षद रहे हैं। जबकि भाजपा ने इस वार्ड से भावना चौधरी को उम्मीदवार बनाया है। यह वार्ड सोनकर खटिक, वर्मा बाहुल्य माना जाता है। बड़ी आबादी इसी जाति से है, जिन पर सज्जन वर्मा का व्यक्तिगत प्रभाव है। दूसरी ओर भाजपा ने जिस भावना चौधरी को मैदान में उतारा है वह बलाई समाज से हैं, यहां बलाई समाज के 300 वोट ही हैं। भाजपा ने इस वार्ड से लम्बे समय से काम कर रहे नेताओ ंको दरकिनार कर दिया। इनमें से कुछ गोपी नेमा और उषा ठाकुर से जुड़े रहे हैं। इसमें प्रमुख रूप से शिव वर्मा, दिनेश वर्मा, कमल वर्मा, गगन गौड़ हैं। दिनेश वर्मा इस समय मोर्चा के अध्यक्ष भी हैं। इस बार भी यह वार्ड कांग्रेस समीकरण के आधार पर ही वजनदार दिखाई दे रहा है। इस वार्ड से पिछली बार अभय वर्मा 3442 से अधिक वोटों से विजयी हुए थे जबकि अश्विन जोशी इस वार्ड से मात्र 75 वोट की बढ़त बना पाए थे। इसका मुख्य कारण दोनों नेताओं की बीच लम्बे समय से चली आ रही रिश्तों में खटास है। भाजपा के इस क्षेत्र के कार्यकताओं का कहना है कि शिव वर्मा जो गोपी नेमा समर्थक है वे यहां से अच्छे मतों से चुनाव जीत सकते है।

 

वार्ड 62, रावजी बाजार
पुरुष 8000, महिलाएं 7723
कुल मतदाता 15723

जूनी इंदौर यह वार्ड ब्राह्मण जाति का माना जाता है। इस वार्ड में ब्राह्मण और मुस्लिम मतदाता निर्णायक होते हैं। हालांकि इसमें क्षेत्र क्र. 5 के विधायक महेन्द्र हार्डिया का भी कुछ क्षेत्र आता है। यह वार्ड अभी तक भाजपा के प्रभाव का माना जाता था। पिछली बार यहां भाजपा के ही ताकतवर नेता जगदीश धनेरिया ने विद्रोह कर बागी के रूप में चुनाव जीता था। उन्होंने भाजपा के कद्दावर नेता हरिश डागुर को हराया था। इस बार भाजपा ने फिर क्षेत्र के पूर्व पार्षद रहे दिनेश पांडे की पत्नी रूपा पांडे को मैदान में उतारा है। पिछली बार भाजपा यहां तीसरे नंबर पर पहुंच गई थी। कांग्रेस ने इस बार श्वेता गौरव शर्मा को मैदान में उतारा है। जो लम्बे समय से इस क्षेत्र में काम कर रहे थे। इस वार्ड में कांग्रेस के नेता बबन शर्मा का भी अच्छा खासा प्रभाव है। इस वार्ड से विधानसभा में कांग्रेस 1300 मतों के लगभग हारी थी जबकि भाजपा के विरोधी जगदीश धनेरिया ने 242 वोटों से यहां पर विजय हासिल की थी। इस बार यह वार्ड कांटे की टक्कर में फंस गया है। दिनेश पांडे भी लम्बे समय से यहां सम्पर्क में नहीं रहे। दूसरी ओर ब्राह्मणों का बड़ा तबका इस बार कांग्रेस के पक्ष में जा सकता है। यदि यह सीट दिनेश पांडे अपने प्रभाव से निकाल पाए तो माना जाएगा कि उन्हें अपने व्यक्तिगत प्रभाव का पूरा लाभ मिला है।

वार्ड 63, नवलखा
महिला 8958, पुरुष 9019,
कुल मतदाता 17977

यह वार्ड भाजपा के प्रभाव का माना जाता है। इस वार्ड में अग्रसेन समाज के अलावा वैश्य समाज की आबादी ज्यादा है परंतु यहां पर मौर्य समाज और शंकरबाग की बस्ती में प्रभाव रखने वाले ही जीत पाते हैं। अभी तक इस वार्ड से भाजपा ही जीतती रही है। इस बार भाजपा ने पुरानी पार्षद रहीं शोभा रामदास गर्ग को दरकिनार करते हुए आकाश विजयवर्गीय कीपसंद से मृदुल अग्रवाल को मैदान में उतारा है। उनके बारे में कहा जा रहा है कि वे इस क्षेत्र के उम्मीदवार नहीं हैं। दूसरी ओर उनका क्षेत्र में प्रभाव भी नहीं है। इस वार्डसे उमेश शर्मा, घनश्याम व्यास, सुमित मिश्रा जो रमेश मेंदोला के करीबी रहे हंै। उन्हंोंने यहां से दावा किया है परंतु इस बार आकाश विजयवर्गीय की पसंद बड़े नेताओं को भारी पड़ी। कांग्रेस ने यहां से अपने संगठन के नेता सैलेष गर्ग को वैश्य समाज बाहुल्य वार्ड होने के कारण उतारा है। वे इसी क्षेत्र में रह रहे हैं। दूसरी ओर इस वार्ड में जीत-हार के लिए मौर्य समाज और शंकरबाग की बस्तियों में प्रभाव होना जरूरी है। इस वार्ड से कांग्रेस विधानसभा में हारी थी जबकि शोभा रामदास गर्ग 998 वोट से जीत पाई थीं। हालांकि इस बार यह वार्ड कांटे की टक्कर में उलझ गया है।

 

वार्ड 6४, चितावद
पुरुष 11896, महिला 11503,

कुल मतादता 23399

यह वार्ड पूरी तरह से क्षेत्र क्र.5 के विधायक महेन्द्र हार्डिया और वरिष्ठ नेता मधु वर्मा के प्रभाव का माना जाता है। इसके बाद इस वार्ड में माली समाज का भी बड़ा तबका है। इस वार्ड से इस बार भाजपा में कैलाश विजयवर्गीय केकट्टर समर्थक मनीष शर्मा मामा को मैदान में उतारा है। मनीष मामा के लिए भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीर्य ने यहां गली-गली जनसम्पर्क के साथ ही रोड शो भी किया। दूसरी ओर कांग्रेस ने यहां से मौर्य समाज के प्रभाव में आने वाले दिनेश कुशवाह को मैदान में उतारा है। इस क्षेत्र में उनकी इस समाज में बड़ी रिश्तेदारी भी है। पिछली बारभी वे इस क्षेत्र से निर्दलीय मैदान में उतरे थे और 1700 से अधिक वोट ले गए थे। इसीलिए कांग्रेस इस वार्ड में इन वोटों के समीकरण के साथ मैदान में है। पिछली बार यहां से भाजपा की सीमा विरांग 829 वोटों से विजयी हुई थीं जबकि विधानसभा में इस वार्ड में कांग्रेस 2200 मतों सेहारी थी। इस वार्ड से उमेश शर्मा के अलावा सिंधिया समर्थक पवन जायसवाल ने भी टिकट मांगा था। इस वार्ड में अरविंद बागड़ी जो पूर्व पार्षद रहे हैं, का वैश्य समाज पर ताकतवर प्रभाव यदि वे ईमानदारी से दिनेश कुशवाह को मदद करेंगे तो यह सीट कांग्रेस के लिए निकल सकती है। अभी तो यहां कांटे की टक्कर है।

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