गुस्ताखी माफ़-प्रत्याशी ईमानदार तो प्रभारी पर कई मुकदमे…खुद खिलाते नहीं दूसरा खिलाए तो भी तकलीफ…तारक के बाघा मैदान में…

प्रत्याशी ईमानदार तो प्रभारी पर कई मुकदमे…

भारतीय जनता पार्टी अपराधियों को उम्मीदवार बनाने को लेकर बड़ी सख्त रही और इसके चलते घोषित उम्मीदवार का नाम भी वापस ले लिया। इधर दूसरी ओर बड़ी अजीब बात यह है कि क्षेत्र क्रमांक एक का चुनाव प्रभारी जिस व्यक्ति को बनाया गया है, उसके पास कई तमगे हैं। वह एसोसिएशन आफ इंडस्ट्रीज मध्यप्रदेश का उपाध्यक्ष पद तो संभाल ही रहे हैं, भाजपा के आर्थिक प्रकोष्ठ के प्रांतीय संयोजक के साथ ही भाजपा विधानसभा क्रमांक 1 के चुनाव प्रभारी भी हैं। इन महारथी का नाम योगेश मेहता है। अब योगेश मेहता के दूसरे सिक्के की जानकारी भी कुछ ऐसी है कि इन पर लोकायुक्त और आर्थिक अपराध शाखा के बड़े प्रकरण चल रहे हैं। इन पर शाजापुर में 2001 में मध्यप्रदेश विद्युत मंडल के कॉपर वायर चोरी का प्रकरण दर्ज होकर गिरफ्तार होने के बाद अदालत में प्रकरण चल रहा है। इन्हीं के परिवार के एक और सज्जन जो अब दुनिया में नहीं रहे, पर चोरी का भंगार बेचने का मामला एमजी रोड पुलिस थाने में दर्ज है तो इनके एक और भाई प्रताप मेहता के खिलाफ रावजी बाजार थाने में प्रकरण चल रहा है। सार यह है कि ऐसा प्रभारी उम्मीदवारों को भी कुछ इसी प्रकार के गणित सिखाने की महारत भी रखते हैं। हालांकि भाजपा में सभी गंगा नहाए हुए हैं।

खुद खिलाते नहीं दूसरा खिलाए तो भी तकलीफ…


इन दिनों क्षेत्र क्रमांक एक में महापौर उम्मीदवार संजय शुक्ला के खिलाए गए दाल-बाफले कई भाजपा नेताओं को हजम नहीं हो रहे हैं। उनकी धार्मिक यात्राएं अपनी जगह हैं, परंतु कथा सहित अन्य आयोजनों में महिलाएं बड़ी संख्या में पहुंच रही हैं और उन आयोजनों में क्षेत्र क्रमांक दो के दादा दयालू की तर्ज पर तर माल सूतने को मिल रहा है। अब इसमें भाजपा के बड़े नेता तो पहुंच नहीं सकते, पर जानकारी पूरी रख रहे हैं, वहीं भाजपा के पूर्व विधायक सुदर्शन गुप्ता को भी यह दाल-बाफले नागवार गुजर रहे हैं और वे विभिन्न पार्षद उम्मीदवारों के कार्यालय के उद्घाटन पर कह रहे हैं कि मुझे सब पता है, कौन-कौन दाल-बाफले खा रहा है। इसी के साथ वे आगे नहीं खाने की ताकीद भी दे रहे हैं, परंतु उनके बोल बच्चन के कारण वार्ड की महिलाओं में नाराजगी बन रही है। महिलाएं कह रही हैं खुद तो खिलाते नहीं हो और दूसरा खिलाए तो उसमें भी तकलीफ है। जो भी हो, दादा दयालू के यहां तो माल सूत-सूत कर मतदाता इतने मजबूत हो गए हैं कि सोते से उठाकर मतदान केंद्र ले जाओ तो आंख मूंच के ही कमल पर ठोंक आते हैं। यह सब इन्हीं दाल-बाफलों और तर माल का नतीजा है।

तारक के बाघा मैदान में…


वार्ड क्रमांक 63 में इन दिनों भाजपा के उम्मीदवार मृदुल अग्रवाल को देखते ही लोगों को तारक मेहता का उल्टा चश्मा के बाघा की याद आ जाती है। उनके लटके-झटके भी इसी प्रकार के हैं। हालांकि लोग मानते हैं कि व्यवहार अच्छा है। अब देखना होगा कि इस वार्ड में उनका व्यवहार उनकी नैया पार लगाता है या नहीं।
-9826667063

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