गेहूं का निर्यात रोका तो आटा ही भेज दिया, अब भाव बढ़ेंगे

सरकार देखती रह गई और कारोबारियों ने बड़ा खेल कर दिया

नई दिल्ली (ब्यूरो)। केन्द्र सरकार द्वारा गेहूं के निर्यात पर लगाए गए प्रतिबंध के बाद जहां देश के कारोबारियों ने इसका रास्ता निकालते हुए सरकार के जागने से पहले ही बड़ा खेलकर डाला। विश्व में कई देशों में रूस-यक्रेन के युद्ध के बाद गेहंू की मांग को पूरा करने के लिए भारत पर बड़ा दबाव था। इसके चलते 15 लाख टन से ज्यादा गेहंू का निर्यात हो गया परंतु सरकार को देश में ही गेहूं का बढ़ता संकट दिखने के बाद निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिया। निर्यातकों ने इसके बदले में जादूगरी दिखाते हुए गेहूं की जगह आटे का निर्यात शुरू कर दिया और इसके चलते पिछले एक माह में आटे के भाव में भारी उछाल दर्ज हो रहा है। आने वाले समय में यदि निर्यात नहीं रोका तो आटे के भाव 45 रुपए किलो तक चले जाएंगे।

भारत सरकार ने अभी तक गेहूं के बाद आटे के बड़े निर्यात पर कोई ध्यान नहीं दिया है परंतु दूसरी ओर जहां हर माह भारत से 50 हजार मैट्रिक टन आटा निर्यात होता था वहीं 1 अप्रैल से 14 जून के बीच ही 2.78 लाख टन आटे कानिर्यात हो गया है। उल्लेखनीय है कि युद्ध के चलते रूस-यूक्रेन से गेहंू का निर्यात प्रतिबंधों के कारण रोक दिया गया, उसके बाद भारत में गेहूं के बड़े भंडारणों के चलते निर्यात शरू हो गया परंतु मौसम की मार के चलते भारत में इस बार डेढ़ लाख टन गेहूं का उत्पादन कम हुआ है। सरकार द्वारा भी गेहूं की खरीदी कम हो पाई। इसी कारण निर्यात प्रतिबंधित कर दिया गया। 13 मई के प्रतिबंध के बाद देश के कारोबारियों ने गेहंू की बजाय आटे का निर्यात तेजी से शुरू कर दिया। भारत के गेहूं और आटे की भारी मांग, प्रतिबंध के बाद भी भारत से 30 लाख टन गेहूं निर्यात हो गया। कई शहरों में आटे के भाव 41 रुपए किलो तक पहुंच गए हैं।

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