इंदौर में फिर कभी भी हो सकता है भीषण शराबकांड

प्रतिबंध के बावजूद खुलेआम बिक रही है खुली शराब, जारी है मिलावटखोरी

इंदौर। आप मानें या न मानें लेकिन हालात कुछ ऐसे ही हैं कि एक बार फिर इंदौर में कभी भीषण शराबकांड हो सकता है और सैकड़ों लोगों की जान भी जा सकती है। वजह यह कि देशी शराब का कृतिम संकट पैदा कर प्रतिबंध के बावजूद खुलेआम खुली शराब बेची और खरीदी जा रही है। इतना ही नहीं, अवैध कमाई करने के लिए मिलावटखोरी भी जमकर चल रही है।
उल्लेखनीय है कि १९७० के दशक में इंदौर में भीषण शराब कांड हुआ था। उस समय सैकड़ों लोगों ने जहरीली शराब के कारण अपनी जान गंवाई थी और कई लोग जीवनभर के लिए अंंधे भी हो गए थे। इस दर्दनाक हादसे को लेकर राजबब्बर अनिभीत एक फिल्म भी बनी थी। इसके बाद भी कई छोटे-मोटे शराब कांड हुए और पिछले वर्ष ही इंदौर के दो बार में जहरीली शराब के सेवन से लगभग आधा दर्जन लोगों ने अपनी जान गंवाई थी। इस प्रकार के हादसों की पुनरावृत्ति पुन: न हो, इसके लिए मप्र शासन ने इस वर्ष नईर् शराब नीति लागू की। इसके चलते जहां खुली शराब की बिक्री को प्रतिबंधित कर दिया गया, वहीं १८० एमएल के क्वाटर के साथ ही ९० एमएल की क्वाटर भी बाजार में उतारे, जिन्हें शराबियों ने काफी पसंद भी किया। इधर शराब के दामों में भी १५ से २० प्रतिशत की कमी कर दी गई। बावजूद इसके, इससे शराब व्यवसायियों की कमाई मारी गई। इसी के चलते, उन्होंने न केवल खुली शराब बेचनी शुरू कर दी, बल्कि प्लेन शराब का कृतिम संकट पैदा कर बाटल से क्वाटर में शराब की रिपैकिंग कर बैचना भी शुरू कर दिया। इतना ही नहीं, रिपैकिंग के नाम पर मिलावटखोरी भी शुरू कर दी।

अब तो पोटलियों में भी मिल रही है शराब…
हालात कितने संगीन हैं, इसका अनुमान इसी बात से लगाया जा सकता है कि इंदौर की अधिकांश देशी शराब दुकानों पर प्लेन बनाम दोबारा शराब का कृतिम संकट पैदा कर रिपैकिंग कर बेचा जा रहा है। शराब के खाली क्वाटर में बाटल से शराब निकालकर भरी जा रही है और पैकिंग के नाम पर ढक्कन की जगह पोलीथीन लगाकर रबरबैंड से पैक किया जा रहा है। इतना ही नहीं, एक बाटल से चार क्वाटर तैयार करने की बजाए उसमें पानी की मिलावट कर पांच क्वाटर बनाकर ग्राहकों को बेचे जा रहे हैं। हद तो यह है कि कई शराब दुकानों पर तो प्लेन शराब पोलीथीन की थेलियों में पोटली बनाकर भी बेची जा रही है। इसके बाद भी स्थानीय प्रशासन जहां धृतराष्ट्र बना हुआ है, वहीं आबकारी विभाग के जिम्मेदार गांधारी की भूमिका का निर्वाह कर रहे हैं। यदि यही हाल रहा तो एक बार फिर महानगर में कभी भी भीषण शराब कांड हो सकता है और सैकड़ों लोगों की जान जा सकती है।

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