विदेशी मुद्रा भंडार में हो रही है डॉलर की कमी

तेजी से बढ़ रही महंगाई और रुपये की गिरती साख शुभ संकेत नहीं

नई दिल्ली (दोपहर आर्थिक डेस्क)। सरकार के तमाम प्रयास भी विदेशी मुद्रा भंडार में ताकत नहीं भर पा रहे। दूसरी ओर अमेरिकी डॉलर के सामने रुपया लगातार कमजोर होता जा रहा है, जो अब आने वाले समय में 94 रुपए के स्तर को पार कर जाएगा। भारत की पांच ट्रिलियन डॉलर की इकॉनामी के लिए आठ प्रतिशत की विकास दर होगी तो ही अब यह 2029 तक संभव हो पाएगा। दूसरी ओर लगातार विदेशी मुद्रा भंडार में हो रही कमी चिंता का सबब बनती जा रही है। आयात और निर्यात के बीच घाटा बढ़कर 192 अरब डॉलर तक पहुंच गया है। भारत की अर्थव्यवस्था अब धीरे-धीरे फंसती जा रही है और इसके कारण आने वाले समय में सरकार को कई कड़े कदम उठाने होंगे, वहीं दूसरी ओर महंगाई की मार अब और बड़े रूप में दिखाई देने लगेगी। यदि यही स्थिति रही तो भारत, श्रीलंका की तर्ज पर उलझ जाएगा।
एक ओर जहां हमारे देश के मुख्य आर्थिक सलाहकार बी. अनंत नागेश्वरन ने कहा कि देश का आयात-निर्यात घाटा इतना बढ़ चुका है कि इसे संतुलित किया जाना बेहद जरूरी है, वहीं दूसरी ओर रुपए का लगातार गिरना मई माह में रुपया, डॉलर के मुकाबले अपने अब तक के निचले स्तर को छू चुका है और अब यह अस्सी रुपए की ओर अगले कुछ दिनों में बढ़ना शुरू हो जाएगा, जिसके कारण विदेश से आने वाला कच्चा तेल और अब कोयला विदेशी मुद्रा भंडार पर भारी दबाव बनाएंगे। भारत के शेयर बाजारों से विदेशियों द्वारा तेजी के माहौल में भी इक्कीस अरब डॉलर निकाले जाने के बाद यह दूसरा बड़ा झटका लगा है। जहां पिछले साल भारत में निजी क्षेत्रों के अलावा अन्य माध्यमों से भी अस्सी अरब डॉलर मिले थे, जो इस साल घटकर 24 अरब डॉलर रह गए हैं।

विदेशी मुद्रा भंडार का लगातार घटना आने वाले समय में कई और संकट भी खड़े करेगा। दूसरी ओर देश का निर्यात बढ़कर 498 लाख करोड़ पर पहुंच गया है। आयात बढ़कर 611 लाख करोड़ हो गया है। 192 लाख करोड़ का व्यापार घाटा देश की कमर तो तोड़ ही रहा है, साथ ही विदेशी मुद्रा भंडार को भी तेजी से खाली कर रहा है। भारत के सामने अब नई चुनौती यह है कि भारत में डॉलर बेहद कम आ रहे हैं, जिसका असर विदेशी मुद्रा भंडार पर तो पड़ ही रहा है, वहीं रुपया भी एशिया की सबसे कमजोर मुद्रा बन चुका है, दूसरी ओर सरकारें कर्ज के जाल में बुरी तरह उलझ रही हैं। इसका असर महंगाई के रूप में आने वाले दिनों में दिखाई देगा। उल्लेखनीय है कि केंद्र सरकार पर जीडीपी का 99 प्रतिशत कर्ज हो चुका है, यानी सौ रुपए की आय में से 99 रुपए कर्ज चुकाना होंगे।

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