महंगाई 18 माह के उच्च्तम स्तर पर पहुंची

आने वाले दिनों में खाद्यान सामग्री की कीमतों में और इजाफा होगा

नई दिल्ली (ब्यूरो)। अप्रैल माह में महंगाई 18 माह के उच्चतम स्तर पर पहुंच रही है। इससे आने वाले समय में आम जनता पर महंगाई का बोझ बढ़ जाएगा। भारत में बढ़ती सबसे उच्च महंगाई के बाद विश्व के 4 देशों में शामिल हो गया है। दूसरी ओर रुपया एशिया के देशों में सबसे कमजोर मुद्रा के रूप में अपनी पहचान बना चुकी है। दूसरी ओर कई उत्पादों के दामों में अब लगातार इजाफा बना रहेगा। मूंगफली तेल 187 रुपए और सरसों तेल 185 रुपए पर पहुंच चुका है। 12 साल के शीर्ष स्तर पर आटे के दाम पहुंच गए हैं। इस साल गेहूं की 46 फीसदी कीमतें उछल गई हैं।
यह जानकारी देश की अर्थव्यवस्था और रोजगार पर रिसर्च करने वाली एजेंसी नोमुरा ने अपनी रिपोर्ट में दी है। नोमुरा के अनुसार अप्रैल में महंगाई 18 माह के उच्चतम स्तर पर पहुंच रही है। आने वाले समय में आम लोगों पर महंगाई का बोझ और बढ़ जाएगा। पिछले कुछ महीनों से लगातार थोक और खुदरा महंगाई की मार बढ़ रही है। रिजर्व बैंक ने ब्याज दरें बढ़ाकर इसे रोकने का प्रयास किया था जो सफल नहीं हुआ। दूसरी ओर रुपए की कीमत भी और नीचे आ गई। रिपोर्ट में कहा है कि भारत की मुद्रा स्फीति में आधारभूत मुद्रा स्फीति का हिस्सा 88 फीसदी है जो एशिया में सबसे उच्च स्तर पर है। भारत विश्व के सबसे ज्यादामहंगाई वाले 4 देशों में शामिल हो गया है। उपभोक्ता मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार मसूर दाल एक साल में 14.73 प्रतिशत, चीनी 4.35 प्रतिशत, चाय पत्ती 7.97 प्रतिशत, खाद्य तेल मूंगफली का 6.47 प्रतिशत और पाम तेल 19.98 प्रतिशत महंगा हो गया। दूसरी ओर रुपया अब लगातार कमजोर होता जा रहा है। इसके कारण कच्चे माल की ऊंची लागत के कारण कई सामानों की कीमतें 48 प्रतिशत तक बढ़ गई है।

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