पेट्रोल-डीजल की तरह बढ़ेगी बिजली की दरें

राज्यों पर बिजली का बकाया 90 हजार करोड़ बट्टे खाते में डालने की तैयारी

नई दिल्ली (ब्यूरो)। देश में कोयले की भारी कमी का असर बिजली के उत्पादन पर पड़ना शुरू हो गया है। 100 पॉवर ब्रांड में मात्र 8 दिन का कोयला ही शेष बचा है। दूसरी ओर सरकार बिजली उत्पादन कंपनियों के साथ मिलकर राज्य सरकारों पर बकाया 90 हजार करोड़ रुपया राइट ऑफ करने की तैयारी कर रही है। यानी शर्तों के साथ इस रुपए को बट्टे खाते में डाल दिया जाएगा।

दूसरी ओर सभी राज्यों ने बिजली दरों में लम्बी-चौड़ी वृद्धि करने के लिए सहमति प्रदान कर दी है। इसका असर अगले एक माह में ही घरों और उद्योगों में आने वाले बिजली बिलों पर दिखाई देने लगेगा। दूसरी ओर मध्यप्रदेश सहित सभी राज्यों में बिजली कटौती शुरू हो गई है। आने वाले समय में यह और बढ़ेगी। बिजली उत्पादन कंपनियों ने पिक पॉवर डिमांड के समय अब 4 रुपए 4 पैसे प्रति किलो वॉट की दर से बिजली देना शुरू कर दी है, जो 10 साल के सर्वोच्च कीमत में पहुंच गया है।देश में भीषण गर्मी के दौरान भीषण बिजली संकट भी आने जा रहा है। बिजली उत्पादन करने वाली कंपनियों के पास कोयला केवल एक सप्ताह का ही अब बचा हुआ है। दूसरी ओर इन पर बकाया राशि को लेकर कोयला कंपनियों ने कोयला देने से इनकार कर दिया है। अड़ाणी समूह सहित कई निजी कंपनियों ने तो बिजली का उत्पादन ही पैसे नहीं आने के कारण 70 प्रतिशत तक कम कर दिया है। 173 पॉवर प्लांटों में से 100 में अब केवल चंद दिन ही बिजली उत्पादन हो पाएगा। शाम को पिक के समय देश में 14 प्रतिशत बिजली उत्पादन कम हो रहा है। इसके कारण अब राज्यों में बिजली कटौती शुरू हो गई है। ग्रामीण क्षेत्रों में 4 घंटे तक बिजली जा रही है। दूसरी ओर बिजली कंपनियों का राज्य सरकारों पर बकाया 90 हजार करोड़ रुपया केन्द्र सरकार शर्तों के साथ माफ करने के लिए तैयारी कर रही है। इस राशि को लेकर केन्द्र सरकार बांड जारी कर सकती है। राज्यों के सामने शर्त रखी गई है कि वह भविष्य में बिजली उत्पादन कंपनियों का रुपया नहीं रोंकेगी। इस पर सभी राज्यों ने सहमति दे दी है। इसके बदले में अब देशभर में बिजली की दरें पेट्रोल-डीजल की तरह बढ़ती हुई दिखाई देने वाली हैं। नोमूरा के अनुसार महाराष्ट्र की करीब 19,134 करोड़ रुपये की देनदारी है। इसमें से 60 दिन से ज्यादा की बकाया राशि 17268 करोड़ रुपये हैं। इसी तरह तमिलनाडु पर 18923 करोड़ रुपये का बकाया है, जबकि 60 दिन से ज्यादा की बकाया राशि 15470 करोड़ रुपये है। इसी तरह उत्तर प्रदेश पर 6036 करोड़ रुपये, आंध्र प्रदेश पर 6350 करोड़ रुपये, जम्मू एवं कश्मीर पर 6331 करोड़ रुपये, राजस्थान पर 11,640 करोड़ रुपये, कर्नाटक पर 5363 करोड़ और मध्य प्रदेश पर 4762 करोड़ रुपये बकाया है। जाहिर जिस तरह कोयला महंगा होता जा रहा है। ऐसे में आने वाले समय में इन राज्यों के लिए बिजली खरीदना काफी मुश्किल हो सकता है। अगर हालात नहीं सुधरे तो इन राज्यों को कोयला की आपूर्ति में भी कटौती हो सकती है।

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