31 अरब डॉलर पहुंच गया चीन के सामानों का निर्यात भारत में

इधर चीनी झालर, पटाखे और सामान का विरोध सड़कों पर होता रहा

नई दिल्ली (ब्यूरो)। एक ओर जहां देशभर में बायकाट चायना के साथ एलईडी झालर और फटाखे का विरोध हो रहा था, दूसरी ओर चायना ने भारत से अपना कारोबार ऐतिहासिक तेजी से बढ़ा लिया है। पिछले तीन माह में ही चीन और भारत के बीच 71 अरब डालर का कारोबार हुआ। इसमें से चीन ने 27 अरब डालर का निर्यात भारत ने विभिन्न सामानों का किया। जबकि भारत मात्र 4 अरब डालर का ही निर्यात चीन में कर पाया। यानी चीन के साथ भारत का व्यापार घाटा 27 अरब डालर रहा।

जो विश्व के कुल व्यापार घाटे का आधा है। तीन माह में ही चीन ने अपना निर्यात 15 प्रतिशत तक बढ़ा दिया। यह बता रहा है कि भारत में चीन अपना कारोबार कितनी तेजी से बढ़ा रहा है जबकि भारत को भारी घाटा हो रहा है।चीन सरकार के वाणिज्य मंत्रालय द्वारा जारी किए गए आंकड़ों में यह पता लग रहा है कि अब भारत में चीन का रोका जाना असंभव हो गया है। सरकार के कई प्रयास के बाद भी सफलता हाथ नहीं लगी है। पिछले साल भी भारत को कुल व्यापार घाटा 164.54 अरब डालर रहा जिसमें से आधा घाटा चीन के कारण ही उठाना पड़ा है। उल्लेखनीय है कि पिछले दिनों सरकार ने जानकारी जारी की थी कि भारत का निर्यात बढ़कर 400 अरब डालर पहुंच गया है। जबकि उसी तुलना में आयात घाटा भी बढ़ गया है, जो बेहद चिंता का विषय है। भारत में सरकार ने चीन का आयात कम करने को लेकर कई प्रयास किए पर हर बार यह बढ़ता जा रहा है। इस समय दवा उद्योग और इलेक्ट्रानिक उपकरण का सबसे ज्यादा आयात किया जा रहा है। आत्मनिर्भर भारत के तहत चल रहे कार्यक्रम में भी चीन से ही छोटे कम्पोनेंट आयात हो रहे हैं जिन्हें भारतीय कम्पनियां अपना बताकर बाजार में बेच रही है।

अमेरिका ने एडवायजरी जारी की
चीन के लगातार निर्यात के बाद अमेरिका की ग्लोबल स्ट्रेट व्यू ने सभी देशों को चेताया है कि वह चीन से कारोबार में सतर्क रहे अन्यथा धीरे-धीरे वह चीन का मोहताज हो जाएगा और इसका असर कर्ज के रूप में होगा।
40 देश चीन के कर्ज में डूबे
विश्व के कई देश चीन के कर्ज में बुरी तरह उलझ गए हैं। इसमें श्रीलंका सबसे बड़ा उदाहरण है। इसके बाद पाकिस्तान भी चीन के कर्ज से अब दब गया है। नेपाल ने चीन का आयात पूरी तरह बंद कर दिया है। विदेशी मुद्रा भंडार से चीन को पैसा देना भी रोक दिया गया है। अफ्रीका के 15 से अधिक देश चीनी कर्ज में डूब चुके हैं।

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