सुलेमानी चाय-घिस घिस कर आधे हो गए अल्पसंख्यक मोर्चा के भावी नगर अध्यक्ष…पुरानी उधारी का दर्द…

घिस घिस कर आधे हो गए अल्पसंख्यक मोर्चा के भावी नगर अध्यक्ष…
इंदौर शहर के लिए बीजेपी के सभी मुस्लिम नेता अल्पसंख्यक मोर्चा में जगह बनाने के लिए जद्दोजहद कर रहे हैं । लेकिन अबकी बार सभी नेता घिस घिस के आधे हो गए हैं, बीजेपी है कि मोर्चे का गठन ही नहीं कर रही। मोर्चे में पद पाने वाले सभी नेता अपने अपने आकाओ से अध्यक्ष पद की रेवड़ी लेकर आ चुके हैं। जिनमें शेख असलम, अमन मेमन,महफूज पठान, रेहान शेख और मंजूर अहमद शामिल है। इनमें से किसी को एनआरसी का भूत सता रहा है ,तो किसी को सक्रिय ना होने का गम खाए जा रहा है। अब देखना यह है पद के इंतजार में आधे आधे हो रहे यह नेता कहीं पाव पाव भर के ही ना बचे रह जाएं।
पुरानी उधारी का दर्द…
खजराना में कांग्रेस की एक फायर ब्रांड महिला नेता इन दिनों बुझी बुझी सी है। जब वो पति सहित पास्को एक्ट में फंसी तो किसी ने मुलायजा नहीं किया। उल्टे सबने अपने अपने हिसाब चुका लिये। जब एक होटल वाले ने यह देखा कि सब अपना हिसाब बराबर कर रहे हैं, तो उसने भी लड्डू के पैसे मांग लिए। बरसों पहले महिला नेता ने होटल वाले ले लड्डू उधार लिये थे और एक छब्बीस जनवरी को स्कूल में बांट कर वाह-वाही लूटी थी। होटल वाला बार- बार फोन लगाकर पैसे मांग रहा है। महिला नेता पहले इस होटल वाले पर गुर्राया करती थीं, मगर अब मिमियाने लगी हैं। कहती हैं मुकदमेबाजी में बहुत पैसे लग गए।
मुंह काला करने में किसका हाथ…
आईएमआई के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष पूर्व विधायक वारिस पठान के चेहरे पर कालिख जिस शख्स ने मली, वो तो पकड़ा गया और ज़मानत पर छूट भी गया, मगर यह बात राज़ ही है कि नाहरशाहवली दरगाह पर यह हरकत किसने कराई? कुछ लोग दबी ज़ुबान में मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के नेता का नाम ले रहे हैं।उक्त नेता का नाम उस वक्त भी आया था, जब भाजपा के एक नेता के स्वागत में महिलाएं बुर्के पहनकर गई थीं। हिंदूवादी नेताओं से छुपी हुई दोस्ती इतनी भी छुपी हुई नहीं है कि लोगों को पता ना चले।
ज़मीन बचाने की कवायद…
खजराना के एक नेता टीपीएस वन के मामले में बहुत मेहनत कर रहे हैं। अंदर की खबर यह है कि उक्त नेता की करोड़ों की ज़मीन टीपीएस वन के फंदे में आ गई है और बदले में आईडीए उन्हें जो ज़मीन दे रहा है, वो पटेल नगर में है, जिसे इस्लाम पटेल पहले ही बेचकर खा चुका है। यानी वो ज़मीन जिस पर कब्जे हो चुके हैं और लोग बरसों से रह रहे हैं। यह ज़मीन मिल भी जाती है तो पहली लड़ाई इस्लाम पटेल से होगी। फिर दूसरी लड़ाई रहवासियों से लड़नी पड़ेगी। इसीलिए टीपीएस वन के खिलाफ वे जमकर आपत्तियां लगवा रहे हैं।
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