निकाय चुनाव अगले वर्ष जनवरी में ही होंगे

चार दिनी सत्र में अध्यादेश लाकर करना होगा संशोधन

इंदौर। एक बार फिर निकाय चुनाव को लेकर भले ही राजनीतिक दलों में संकेत के बाद तैयारियों को लेकर चर्चा प्रारंभ हो गई हो, परंतु अभी भी सरकार की मंशा चुनाव को लेकर साफ नहीं है। प्रदेश में लागू कानून के अनुसार पार्षद ही महापौर और अध्यक्ष का चयन करेंगे। परंतु भाजपा सरकार और संगठन इस कानून के तहत चुनाव कराने को लेकर सहमत नहीं है। यदि सरकार अगस्त में अध्यादेश लाकर एक बार फिर प्रत्यक्ष चुनाव को लेकर विधानसभा में पारित करा लेती है तो ही माना जाए कि चुनाव अक्टूबर, नवंबर में होंगे। यदि नहीं हुआ तो माना जाए कि सरकार चुनाव कराने की जल्दी में नहीं है।
भाजपा भी प्रत्यक्ष चुनाव को लेकर ही लंबे समय से तैयारी करती रही थी। इसे लेकर कई नेताओं के आश्वासन भी कार्यकर्ताओं से जुड़े हुए है। अब यदि सरकार पार्षदों के माध्यम से चुनाव कराना चाहेगी तो उसे कमलनाथ के द्वारा लागू कानून के तहत ही चुनाव कराने होंगे और इसके लिए भाजपा पहले से ही तैयार नहीं थी। अगस्त में होने वाले विधानसभा सत्र में जो 4 दिन का है सरकार अध्यादेश लाएगी तो ही यह माना जाएगा कि अक्टूबर, नवंबर में चुनाव कराए जा सकते है और यदि ऐसा नहीं हुआ तो माना जाए चुनाव के लिए सरकार को कोई जल्दबाजी नहीं है। अभी तक भाजपा के संगठन में भी निकाय चुनाव को लेकर कोई तैयारियां और सहमति नहीं बनी है। भाजपा के ही संगठन से जुड़े नेता और सरकार में बैठे कई मंत्री भी पार्षदों के माध्यम से चुनाव के लिए तैयार नहीं है। ऐसे में सरकार कोरोना की तीसरी लहर को लेकर सितम्बर तक इंतजार करेगी। यदि हालात पूरी तरह सामान्य हुए तो ही निकाय चुनाव अगले साल जनवरी के लगभग कराए जाएंगे। भाजपा का लक्ष्य है कि कौन सी प्रक्रिया से चुनाव कराए जाए जिससे भाजपा को पूरा लाभ मिले। सूत्रों का यह भी कहना है कि राज्य निर्वाचन आयोग को चुनाव की तैयारियां करनी रहती हैं इसलिए वे चुनाव के लिए सदैव तैयार रहते है, परंतु सरकार अपने स्तर पर अगले तीन महीने में चुनाव के लिए तैयार नहीं है। वैसे भी सरकार की वित्तीय हालत इस समय चिंताजनक है और ऐसे में चुनाव करवाकर 800 करोड़ रुपए से अधिक का बोझ उठाना नहीं चाहेगी।

 

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