मध्य प्रदेश सरकार की तबादला नीति पर सवालिया निशान

सिफारिश, आवेदन, पैसा लिए घुम रहे हैं हजारों शिक्षक शिक्षिकाएं

 

इंदौर। मध्य प्रदेश सरकार ने अपनी तबादला नीति घोषित कर दी है। घोषित तबादला नीति के तहत स्थानीय स्तर पर और जिले के बाहर भी शिक्षक शिक्षिकाओं अध्यापकों सहायक शिक्षकों शिक्षक संवर्ग 1,2,3 के तबादले किए जा रहे हैं। इसके लिए बाकायदा आवेदन भी लेने की प्रक्रिया आरंभ हो गई है। आवेदन के साथ साथ सिफारिशों का दौर भी चल रहा है। आवेदन के साथ ही शिक्षक शिक्षिकाएं सिफारिश चि_ी लेकर चल रहे है। साथ ही वह अवमस्ट, अंडरस्टूड चार्ज भी मोल भाव के साथ पूछते चल रहे हैं। और यह अदा करने के लिए भी शिक्षक तैयार हैं। तबादलों को लेकर दलालों के साथ-साथ, विभिन्न कर्मचारी संगठनों के नेताओं के साथ-साथ इन संगठनों के पदाधिकारियों सदस्यों और लाइजनरो, दलालों ने भी अपनी सक्रियता बढ़ा दी है। वैसे तबादलों के मामले में विधायक मंत्रियों और सांसदों के सरकारी सहायक से लगाकर पर्सनल स्टाफ भी खूब दिलचस्पी ले रहा है, क्योंकि मामला पेंदापानी से जुड़ा हुआ है।
जैसा कि सभी जानते हैं हाल ही में मध्यप्रदेश शासन ने अपनी तबादला नीति घोषित कर दी है। इसके अंतर्गत विभिन्न विभागों के कर्मचारियों के स्थानांतरण किए जाने हैं। शिक्षा विभाग में भी तबादलों की प्रक्रिया जोरों पर है इसके लिए बाकायदा आवेदन लिए जा रहे हैं। सरकार ने इस तबादला नीति में विकलांग, विधवा, परित्यक्ता, गंभीर बीमारी से पीड़ित इस वर्ग के शिक्षक शिक्षिकाओं के लिए विशेष प्रावधान और छूट देना तय किया है इसके साथ ही अन्य वर्गों के शिक्षक शिक्षिकाओं के भी स्थानांतरण किए जाने हैं।
बरसों से एक ही स्थान पर जमा हुए और लंबी दूरी के साथ विसंगतियों का सामना कर रहे हैं शिक्षक शिक्षिकाएं अपने आवेदन हेड मास्टर, प्राचार्य, संकुल प्रभारियों से स्वीकृत करवा कर निर्धारित फोरम पर पहुंचा रहे हैं। आवेदन के साथ-साथ शिक्षक शिक्षिकाएं क्षेत्रीय विधायक, विभिन्न विभागों के मंत्रियों जहां तक कि उनकी एप्रोच है और सांसद का सिफारिश पत्र भी लिए लिए घूम रहे हैं। इसके साथ ही वह दलालों के भी संपर्क में है इधर मौके का फायदा उठाकर दलाल भी कुछ पेंदापानी कर लेना चाहते हैं तो शिक्षक कर्मचारी नेताओं के साथ-साथ विभिन्न शिक्षक कर्मचारी संगठनों के पदाधिकारी भी अपने संगठन से जुड़े हैं शिक्षक शिक्षिकाओं के लिए इंदौर भोपाल एक कर रहे हैं। खास तौर पर प्रदेश की नीति निर्धारण करने वाले वल्लभ भवन, पंचानन भवन, पर्यावास भवन के साथ-साथ भोपाल में मंत्रालयों के अधिकारियों और मंत्रियों के निजी स्टाफ से भी काम निकालने के लिए जुगाड़ बैठा रहे हैं। कर्मचारी संगठन से जुड़े हुए नेता और पदाधिकारी तो इस मामले में दोनों के बीच सामंजस्य बैठाकर काम निकलवाने की भूमिका में है ताकि लेनदेन के मामले में उनका भी ज्ञान गणित जम जाए। इन दिनों तमाम शिक्षक शिक्षिकाएं विधायकों मंत्रियों सांसदों के घर कार्यालय नापने में लगे हुए हैं। सुबह शाम ऐसे शिक्षक शिक्षिकाओं का जमावड़ा आप मंत्री विधायकों सांसदों और उनके स्टाफ के सदस्यों के घर पर देख सकते हैं। कई शिक्षक शिक्षिकाएं जो कि लंबी दूरी को लेकर परेशान हैं वह तो हर हाल में अपना तबादला करवाना चाहते हैं इसके लिए उन्होंने सिफारिश पत्र के साथ साथ लेनदेन के लिए भी एक अलग से बजट बनाकर रख रखा है ताकि कैसे भी हो उनका काम हो जाए।
सूत्रों का कहना है कि यही हफ्ता आखरी है इसके बाद तबादले का मामला आगे बढ़ने की उम्मीद काफी कम है इसलिए कोई भी शिक्षक शिक्षिकाएं इस मौके को हाथ से गवाना नहीं चाहता है इसलिए वह साम दाम दंड भेद सब नीति अपना रहा है ताकि हर हाल में उसका काम हो जाए।
वैसे सामने सब कुछ ठीक चल रहा है लेकिन पर्दे के पीछे जिस प्रकार का खेल खेला जा रहा है और इस प्रकार की अंडरस्टूड प्रक्रियाएं हो रही है उसमें मध्य प्रदेश सरकार की तबादला नीति पर सवालिया निशान खड़ा कर दिये है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही उठता है कि ऐसे तमाम हजारों शिक्षक शिक्षिकाएं जो कि वर्षों से परेशान हैं और तबादले का एक अवसर आया है ऐसे में वह सिफारिश नहीं करवा पाते हैं अथवा और अवमस्ट अंडरस्टूड चार्ज की व्यवस्था नहीं कर पाते हैं तो क्या उन्हें इस तबादला प्रक्रिया का लाभ नहीं मिलेगा ? यह बड़ा सवाल इन दिनों शिक्षा जगत में सबकी जुबान पर है?
तबादले की दरें 52000 से साढ़े 3 लाख तक
शिक्षकों से लेकर लेक्चरर और प्राचार्य के तबादलों को लेकर जो धारा तय की गई है, वह बाजार में लगभग हर शिक्षक को मालूम है। यानी कक्षा 1 से लेकर 9वीं तक के शिक्षक की एक सैलेरी यानी 43 से 52 हजार रुपए तो लेक्चरर कक्षा 9वीं से 12वीं तक के लिए 62 से 70 हजार रुपए तय किए गए हैं। इसी के साथ अनुशंसा., विधायक का पत्र या भाजपा नेता का पत्र भी मांगा जा रहा है। सबसे ज्यादा खींचतान प्राचार्य को लेकर है, वैसे तो सभी मामलों में एक सैलेरी मांगी जा रही है, परन्तु प्राचार्य ने साढ़े तीन लाख रुपए तक दर तय की गई है। इसके लिए अब स्कूलों तक भी दलाल पहुंच रहे हैं। वहीं कई विधायकों के दरवाजे के बाहर भी कुछ लोग मिल जाएंगे। लगभग हर भाजपा नेता तक तबादलों की आवाज सुनाई दे रही है।

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