सांवेर के 18 गांव योजना में शामिल, अब मास्टर प्लान में और ज्यादा समय लगेगा

79 गांव शामिल करते ही लगा दी थी नक्शों पर रोक फिर 18 गांव पर रोक क्यों नहीं?

18 villages of Sanwer included in the scheme, now the master plan will take more time., master plan indore
18 villages of Sanwer included in the scheme, now the master plan will take more time., master plan indore

इंदौर। जहां एक ओर शहर के प्रबुद्ध नागरिकों को लग रहा है कि इंदौर का तीसरा मास्टर प्लान जल्द ही आ जाएगा तो वे अपनी गलतफहमी दूर कर सकते हैं कि अभी मास्टर प्लान को आने में कम से कम एक साल का समय अभी और लग जाएगा। नये मास्टर प्लान में जहां अब पहले जोड़े गये ७९ गांव के सर्वे और बेस में तैयार हो ही पाये थे कि अब सांवेर के १८ और गांव को योजना में शामिल करते हुए यह भी मास्टर प्लान में आ गये हैं। अब इनके सर्वे के बाद इनकी प्लानिंग को तैयार करने में लंबा समय लगेगा। इसके बाद प्रारुप का प्रकाशन फिर उस पर आपत्तियां आमंत्रित करना और फिर जनप्रतिनिधियों में कमेटी की सुनवाई के बाद इस पर भोपाल में निर्णय होना है। पिछला मास्टर प्लान १९७५ के बाद २००८ में आया था इसके निर्माण में भी दो साल से ज्यादा का समय लग गया था।

एक ओर जहां शहर के मास्टर प्लान को लेकर प्रबुद्धजनों की बैठके हो रही है। दूसरी ओर पुराने मास्टर प्लान के भी कई कार्य अभी भी अधूरे पड़े हुए हैं। वर्ष २००८ में लागू किए गए मास्टर प्लान की अवधि भी दो साल पहले ही समाप्त हो चुकी है। दूसरी ओर दो साल बाद भी नये मास्टर प्लान के कोई अते पते नहीं है। पिछले मास्टर प्लान में जिन क्षेत्रों को ग्रीन बेल्ट घोषित किया था उनमे से कई जगहों पर अभी निर्माण हो चुके हैं। हालत यह है कि खुद शिक्षा विभाग का एक स्कूल रिंग रोड़ पर ग्रीन बेल्ट की जमीन पर बन चुका है। master plan indore

१३ साल के लिए बने मास्टर प्लान में ७० फीसदी काम भी पूरा नहीं हो पाया। ना ही सिटी फारेस्ट बने और ना ही बड़े मार्गों पूर्ण आकार ले पाये। २००८ के मास्टर प्लान में १० से ज्यादा नये गार्डन प्रस्तावित है। जिनका कोई अता पता नहीं है। इधर इंदौर सीमा के बाहर ७९ गांवों को भी योजना में शामिल करते हुए दो साल पहले मास्टर प्लान में जोड़ लिया गया। इन गांवों को योजना में लेते ही यहां पर नक्शे पास करने को लेकर रोक लगा दी गई ताकि मास्टर प्लान में जगहों का सही उपयोग दर्शाया जा सके। दूसरी ओर सावेर रोड़ के १८ गांवों को पिछले पखवाड़े योजना में शामिल कर लिया गया है। परंतु आश्चर्य की बात यह है कि इन गांवों के नक्शों को पास करने पर किसी भी प्रकार की रोक नहीं लगाई गई है।

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दूसरी ओर इंदौर उज्जैन रोड़ पर सांवेर के पहले बड़ी तादाद में जमीन का कारोबार करने वाले लोगों ने इस क्षेत्र को मास्टर प्लान से सुरक्षित मानते हुए पहले से ही जमीनें खरीदकर यहां पर कॉलोनियां काटने का काम डायरी पर शुरु कर दिया था। अब इन्हें कहा जा रहा है कि मास्टर प्लान के पहले ही वे नक्शे पास करवा ले। सवाल उठ रहा है कि जब ७९ गांव को योजना में शामिल करते ही नक्शे पास करने पर रोक लगा दी गई थी तो फिर इन गांवों में यह छूट क्यों दी जा रही है। master plan indore

उल्लेखनीय है कि ७९ गांव में भी मास्टर प्लान के अभाव में कई कॉलोनाइजरों ने भोपाल से बड़े लेनदेन के बाद अपनी जमीनों के नक्शे पास करवा लिए हैं मास्टर प्लान की धारा १६ का उपयोग करते हुए जमीन के कारोबारियों के दस एकड़ तक के नक्शे मास्टर प्लान ना आने की स्थिति में पास करवा लिए हैं। master plan indore

सूत्रों का दावा है कि इन नक्शों में पहले चार लाख रुपये एकड़ का लेनदेन तय हुआ था बाद में यह दस लाख रुपये एकड़ तक चला गया अभी भी इंदौर के कई जमीन जादूगरों के नक्शे पेसे देने के बाद भी उलझे हुए हैं। इसका कारण यह है कि मुख्यमंत्री ने शिकायत मिलने के बाद इस प्रकार से नक्शे पास करने पर रोक लगा दी थी।

दो हजार एकड़ जमीन पर पूरी तरह कॉलोनियां विकसित हो जाएगी

मास्टर प्लान के आने से पहले ही सांवेर की इन १८ गांवों की दो हजार एकड़ जमीन पर पूरी तरह कॉलोनियां विकसित हो जाएगी अभी भी कई जगह कॉलोनियों में सड़कों का काम बिना किसी अनुमति के किया जा रहा है। पिछले दिनों कलेक्टर ने भी सांवेर रोड$़ पर केनओपी लगाकर प्लाट बेचने वाले दलालों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की थी।

जिसमे दलालों ने बताया था कि बिना रेरा और विकास अनुमति के डायरियों पर इन पंद्रह गांवों में अलग अलग जमीन कारोबारी कच्ची जमीन पर ही प्लाट बेच रहे हैं। इनमे से कुछ को नोटिस भी जारी किए हैं जबकि चार के खिलाफ एफआईआर किए जाने के लिए भी पुलिस को निर्देशित किया गया है।

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