सुलेमानी चाय: ऊंची दुकान फीके पकवान… खजराने के हकीके में रजनीति का तड़का…नाच न जाने आंगन टेढ़ा…

हाजियों को पार्षद का तोहफा..।

सुलेमानी चाय

ऊंची दुकान फीके पकवान…

पद पाने के लिए अगर कोइ बड़ी गाड़ी या किसी कार्यक्रम में पैसे खर्चा करता हैं तो ये ज़रूरी नहीं कि पद आने के बाद भी वो वैसा ही प्रदर्शन करे… इससे हज कमेटी का कोई सम्बध नही। इन्दौर जिला हज कमेटी की व्यवस्था इस बार चरमराई हुई है, हज हाउस से लेकर, एयरपोर्ट पर डोम भी पहले के मुकाबले काफी छोटे है, गर्मी से परेशान हाजीयो को ए,सी वैसी कोई सुविधा नही मिल रही जिनसे गर्मी में राहत मिल सके, फिलहाल तो हाजियो की फजीहत हो रही है, हज की पहली ही फ्लाईट मे राशिद साहब अति उत्साह के शिकार हो गए।

जिसमे बीजेपी के कई पुराने चावल एक घण्टे तक बाहर ही रह गए, साहब वक्फ के पिछले गड़बड़ लाल नासिर शाह जो कि मुस्लिम इलाको में दादा की जिम्मेदारी सम्भालते है, ओर दादा के नाम पर थोड़ी बहुत दादागिरी भी कर लिए है, दादा को एयरपोट लेकर पहुचे, साथ ही हज हाउस के कमजोर (बीमारी को लेकर)प्रदेश अध्यक्ष के साथ फोटो सेशन में व्यस्त हो गए ,इस पर जब बीजेपी के पुराने चावलो ने नाराजगी जाहिर की तब रिजवान पटेल ने मामू की जिम्मेदारी निभाई ओर चावलो को कुकर में सिटी लगवा कर तत्काल अस्थाई पास दिलवाए, पुराने चावल, कुकर, ओर सिटी में रिजवान पटेल ने मामू वाले काम को पर्दे के पीछे से वक्फ के साथ हज को भी सम्भाला, जिसके लिए उनका इनाम पक्का है। खैर सुलेमानी चाय वाले को उम्मीद है कि हज की आगे की उड़ानो में जिला अध्यक्ष नहीं उड़ेंगे सिर्फ हाजियो की मदद करेंगे।

खजराने के हकीके में रजनीति का तड़का

पिछले दिनों खजराने के एक नेताजी की पोती के हकीके की चर्चा पूरी पांच नम्बर विधानसभा में सुनाई दी, साहब पहले तो शायद ये शहर का पहला हक़ीक़ा है, जिसकी दावत बड़ी होटल में रक्खी गई। दूसरा इस आयोजन से घर के सोनू मोनू ओर चुन्नू-मुन्नू (काल्पनिक नाम) भी मन ही मन नाराज है कि हमारा हकीके में तो इतनी धूम नही हुई, इस पर नेताजी भी उन्हें मन ही मन समझा रहे है, की बेटा आपके समय विधानसभा चुनाव नही थे, और सत्तू भय्या जैसे धन-बल वाले व्यक्तिचुनाव नही लड़ रहे थे, और भय्या पर एक किलो का बाट भी रखना था। इसके बाद लोगो की काना फुसी कुछ भी हो कुछ तो ये भी कह रहे है कि हक़ीके के निर्माता निर्देशक ओर प्रोड्यूसर सत्तू भय्या है, लेकिन हम ये नही मानते। हां चुनाव में सारा हिसाब बराबर हो जाये तो ये दूसरी बात है।

नाच न जाने आंगन टेढ़ा…

पिछले दिनों दिग्गी राजा के इंदौर आगमन पर हर कोई खुद को दिग्गी का करीबी बताने की होड़ में लगा हुआ था, मजा तब आया जब पांच नम्बर की बैठक में राजा साहब ने अपने खजराने के राजा बाबू को हाथ पकड़ कर बाहर कर दिया। तब भी राजा बाबू सबको यही समझते रहे साहब मुझे बाहर बड़ी जिम्मेदारी देने के लिए लाऐ थे, न कि कमरे से निकाल रहे थे, अब राजा बाबू को कौन समझाए की नाचने वाले के लिए आंगन का टेरा पन अहमियत नही रखता। ये बात और हे कि नाचने वाले के पैर ही तिरछे हो।

हाजियों को पार्षद का तोहफा..।

सदर बाजार हज हाउस पहुंचने वाले हाजियों को पार्षद साहब ने हज हाउस के रास्ते मे गड्ढे खोद कर हाजियो के पेट की वर्जिश का नया नुख्सा सिखाया है। हज पर जाने से पहले लोगो को बहुत कुछ सिखाया जाता है, इस लिये इस बार सदर बाजार के पार्षद महोदय ने काफी समय से हज हाउस के रास्ते मे कुछ गड्ढे खोद रखे है जो कि रोड के लिये है, लेकिन उससे फिलहाल हाजियों के पेट की वर्जिश हो रही है
९९७७८६२२९९

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