तीन अधिकारियों की अथाह मेहनत के बाद जमीन पर उतरा देश का पहला ग्रीन बांड

Green Bond Indore News

इंदौर।
नगर निगम इंदौर २१ फरवरी को भोपाल में अपने ग्रीन बांड की लिस्टिंग करेगा। १० फरवरी को जलूद में २४० करोड़ रुपये के ६० मेगावाट का सौर ऊर्जा लगाने के लिए २४४ करोड़ रुपये के ग्रीन बांड का पब्लिक इशू जारी किया गया था। इसे निवेशकों का शानदार प्रतिसाद मिला और ढाई घंटे में ही ३०० करोड़ रुपए जुट गए। अब आईए जानते हैं इस बांड की योजना को जमीनी आधार तक पहुंचने के लिए कब से प्रयास शुरु हुए थे। उपलब्धियों की वाहवाही भले ही कुछ लोग अपने नाम पर बता रहे हैं पर इस पूरी योजना को लाने से लेकर निवेशकों को आकर्षित करने फिर अमलीजामा पहनाने तक कुल मिलाकर दस साल से अधिक का समय लगा। इसमे सबसे बड़ी उपलब्धि उस वक्त मिलना प्रारंभ हुई जब इंदौर को ओडीएफ (शौच मुक्त) शहर और स्वच्छता का पहला तमगा मिला था। इस योजना को लेकर प्रारंभिक बातचीत का दौर तात्कालिन महापौर कृष्णमुरारी मोघे के कार्यकाल में प्रारंभ हुआ था। इसके बाद मालिनी गौड़ के कार्यकाल में मनीष सिंह ने निवेशकों को आकर्षित करने और प्रारंभिक सहमति बनाने के लिए दस्तावेजी प्रक्रिया शुरु की थी। इसी प्रक्रिया को आशीष सिंह के कार्यकाल में जहां पूरे प्रोजेक्ट को जमीन पर उतारने तक को लेकर यह बताया गया कि यह किस तरह मुनाफे का प्रोजेक्ट रहेगा और नगर निगम नियमित खर्चे कहां से पूरे करेगी? और अंत में इस प्रोजेक्ट को लेकर लालफीताशाही का आरोप के बीच काम कर रही निगमायुक्त प्रतिभा पाल की प्रतिभा से ही यह बांड नगर निगम को मिला। प्रोजेक्ट को लेकर सेबी में लगाये जाने वाले दस्तावेजों को तैयार करने के लिए उनकी कई रात की मेहनत रही। जो भी हो शहर को जिन्होंने उपलब्धि दिलाई उनका कहीं जिक्र नहीं है। पब्लिक इशू तो बेंचमार्क बना ही तीनों अधिकारी भी देशभर के लिए बेंचमार्क हो गये।

नगर निगम के ग्रीन बांड की लिस्टिंग के साथ ही २१ फरवरी को भोपाल में एक समारोह के साथ यह बांड प्रोसेस हो जाएगा इस बांड का मूल्य एक हजार रुपये प्रति बांड है और इसकी प्रभावी वार्षिक दर ८.४१ प्रतिशत है। जिसको एए प्लस व एए की रेटिंग प्राप्त बांड है। यह ग्रीन बांड १० फरवरी को जारी होकर १४ फरवरी को बंद होना थे परंतु ढाई घंटे में ही सब्सक्राइब हो गया। अब आइये इस बांड को जमीन पर लाने को लेकर किए जा रहे प्रयासों और अधिकारियों की भूमिका का जिक्र भी जरुरी है। कारण यह है कि अब यह पहला पब्लिक इशू होगा जो देशभर की नगर निगमों के लिए बेंच मार्क बनेगा। बांड को लेकर प्रारंभिक स्थिति से जुड़े अधिकारी ने बताया कि सबसे पहले तात्कालिन महापौर कृष्ण मुरारी मोघे ने अपने कार्यकाल में नगर निगम में हर साल होने वाली ५० करोड़ की मितव्ययता पर रोक लगाई थी और इसी आधार पर वे इसी प्रकार के बांड या फिर बिजली का खर्च बचाने के लिए अन्य मार्ग तलाश रहे थे। ऐसे में विंड पॉवर का प्रस्ताव भी तैयार किया गया परंतु यह व्यवस्था बहुत महंगी पड़ रही थी साथ ही इसके लिए बजट के प्रावधान भी मुश्किल थे। अत यह प्रक्रिया यही रुक गई। इसके उपरांत जब मालिनी गौड़ महापौर बनी तो मनीष सिंह तात्कालिन निगमायुक्त बने और उन्होंने इस प्रक्रिया को जब आगे बढ़ाने की कोशिश की तो इसके लिए निवेशक कहीं नहीं मिल रहे थे। क्योंकि नगर निगम की आय से निवेशकों को पैसा नहीं मिल पा रहा था।

इस बीच नगर निगम को दो उपलब्धियां एक साथ मिली कि शहर शौच मुक्त होने के साथ स्वच्छता में भी देशभर में प्रथम स्थान प्राप्त कर अपनी जगह बना चुका था। इस व्यवस्था के बाद निवेशकों की शुरुआती सहमति नगर निगम तक आने लगी और बिजली बचाने के प्रोजेक्ट भी मिलने लगे। परंतु तब तक नगर निगम ग्रीन बांड को लेकर अपनी तैयारियां शुरु करने की तैयारी कर चुका था और इसके लिए प्रारंभिक दस्तावेजों के साथ शुरुआती अनुमति के कार्य प्रारंभ हो गए। इसके उपरांत जब तात्कालिन निगमायुक्त आशीष सिंह ने नगर निगम की कमान संभाली तो उन्होंने ग्रीन बांड को लेकर इसकी कागजी प्रक्रिया का काम कंपनी रजिस्ट्रार के यहां प्रारंभ किया था और दस्तावेज पूरे करने का काम शुरु हो गया था। इसके लिए उन्होंने अलग से समय निकालना भी शुरु कर दिया उन्होंने निवेशकों को यह विश्वास दिलाने में सफलता हासिल कर ली कि नगर निगम को इस योजना से बड़ा राजस्व बचेगा। इसमें नगर निगम इस प्रोजेक्ट पर लगने वाले नियमित खर्चों को अन्य साधन से पूरा कर सकती है इसके दस्तावेज भी बनाये गये साथ ही बताया गया कि निगम के खर्च में बड़ी कमी आई है। इसके उपरांत आशीष सिंह का तबादला होने के बाद जब इंदौर नगर निगम में प्रतिभा पालआयुक्त के पद पर पदस्थ हुई तो फिर उन्होंने इस बांड योजना को जमीन पर उतारने को लेकर सेबी में जो विधि सम्मत दस्तावेज की प्रक्रिया प्रारंभ करना थी उसे अमलीजामा पहनाना शुरु कर दिया। एक साल की मेहनत में उन्होंने बड़े ही मौन तरीके से इस काम को अंजाम दिया ना उपलब्धि गिनाई ना यह बताने का प्रयास किया कि क्या हो रहा है। सूत्र बता रहे हैं कि छुट्टी के दिनों में उन्होंने अपने अधिकारियों के साथ आठ आठ घंटे इस प्रोजेक्ट पर मेहनत की। उल्लेखनीय है कि सेबी में किसी भी पब्लिक इशू के लाये जाने पर पांच बड़े छन्ने लगते है। आधा प्रतिशत की गलती से भी पब्लिक इशू वापस हो जाता है। ऐसे में प्रतिभा पाल ने पूरा जिम्मा खुद लेकर इसे अंतिम रुप दिलाया।

भुगतान चार हिस्सों में होगा

यह किसी भी नगरीय निकाय द्वारा देश का पहला ग्रीन पब्लिक बांड है और इसके लिए एएप्लस और एए जैसी उत्कृष्ठ सुरक्षित रेटिंग, इंडिया रेटिंग और केयर रेटिंग द्वारा दी गई है। प्रत्येक बांड समान चार स्क्रीप्ट में विभाजित होगा। २५ प्रतिशत राशि का भुगतान तीन साल, पांच साल, सात साल और नवे साल में होगा। उत्पादित हो रही बिजली की नियमित रुप से जानकारी प्रत्येक बांड होल्डर को दी जायेगी और सबसे बड़ी बात देश में लगातार छह वर्ष से स्वच्छ शहर इंदौर का पब्लिक सहयोग का एक प्रयास है।

देश के लिए मिसाल बना इंदौर नगर निगम

इस मामले में पर्यावरणविदों का कहना है कि इंदौर ने एक ऐसी मिसाल पेश की है जिसे देश के अन्य नगर निगमों को भी अपनाना चाहिए। इस बांड से आर्थिक बचत के साथ पर्यावरण संबंधी लाभ भी हासिल होंगे। इसमे कार्बन क्रेडिट के जरिए आमदनी के नये रास्ते निकालना भी शामिल है।

हर महीने ७६ लाख यूनिट बिजली बनेगी

सोलर प्लांट से हर महीने ७६ लाख यूनिट बिजली का उत्पादन होगा। बिजली की मौजूदा दर सोलर प्लांट को चलाने की लागत के बाद निवेशकों को दी जाने वाली राशि अलग रखी जाएगी। सारा खर्च हटाने के बाद भी नगर निगम को हर महीने १७ लाख रुपये की बचत होगी। निवेशकों के ब्याज के अलावा निगम को २४४ करोड़ का ऋण भी चुकाना होगा। हर तीन साल में २५ प्रतिशत राशि ५१ करोड़ रुपये का ऋण आसानी से चुकाया जा सकेगा।

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