सुलेमानी चाय: जराना पुलिस की नजरों में भूमाफिया नहीं इस्लाम पटेल…. क्यों ना अब हादसों से सीखा जाय कुछ एहतेशामो को जमी से सींचा जाए….रानीपुरा में बरस रहे कोतवाल के लट्ठ
खजराना पुलिस की नजरों में भूमाफिया नहीं इस्लाम पटेल जब सैयां भले कोतवाल तो फिर डर काहे का…
खजराने में करोड़ों की सरकारी, सीलिंग की जमीन को बाले-बाले बेचने वाला इस्लाम पटेल पुलिस की नजरों में भूमाफिया नहीं है। तभी तो पुलिस ने उसे भूमाफिया लिस्ट से बाहर कर दिया है और फिर से उसे अवैध कालोनी काटने के लिये हरी झंडी दिखा दी गई है। अपने राजनीतिक रसूखों का इस्तेमाल कर इस्लाम ने सरकार और जनता को लूटने की खुली छूट ले ली है। जो प्रशासन अपनी ही जमीन इस्लाम से नहीं ले पाया उससे यह उम्मीद बेकार है कि वो दूसरों को इस्लाम के फर्जीवाड़े से बचाएगा। अब इस्लाम ने आस-पास के खसरों पर भी कालोनी काटने की तैयारी कर ली है। कुछ प्लाट तो बेच भी दिए गए हैं । इसी के साथ शासन प्रशासन के सहयोग से इस्लाम करोड़ों की जमीन फिर बेचने को तैयार है। देखते हैं कि अब वक्त रहते शासन की नींद खुलती है ,या पूरी जमीन बिकने के बाद अधिकारी अपना हिस्सा लेकर नींद से जागने का नाटक करेंगे।
क्यों ना अब हादसों से सीखा जाय कुछ एहतेशामो को जमी से सींचा जाए
पिछले दिनों सुप्रीम कोर्ट एडवोकेट एहतेशाम हाशमी के अचानक दुनिया से जाने के बाद सोशल मीडिया में मातम सा छा गया। क्यों ना ऐसे हादसों से कोई सीख ली जाए और मजलूमों की आवाज उठाने के लिए और एहतेशाम बनाए जाएं जो पूरी इंसानियत को फायदा पहुचाए। क्यों ना हम ऐसे बच्चे ढूंढे जो पढ़ कर बड़े ओहदे पर जा सकने की सलाहियत रखते हों पर, माली हालत ठीक नही होने की वजह से पढ़ नहीं पा रहे हों? उन्हें पढ़ाएं और इंसानियत के उसूलों की पासदारी सिखाए। एक एहतेशाम के जाने पर कई एहतेशाम तैयार किये जाएं। इस बार का सुलेमानी सलाम इंसानियत के लिये काम करने वाले एहतेशाम हाशमी के नाम।
रानीपुरा में बरस रहे कोतवाल के लट्ठ शहर का रानीपुरा इलाका अपनी अदबी महफ़िलों के नाम से जाना जाता है। चाय की चुस्की के साथ शेरो शायरी की महफ़िल यहां कभी आम हुआ करती थी, देर रात तक मजमे लगे रहते थे। आज भी ये इलाका अपने खानपान के लिए लिए मशहूर है। बड़ा व्यापारिक केंद्र होने की वजह से ये इलाका हमेशा आबाद रहता है। रात में भी शहर के बाशिंदे तफरीह के लिए इधर का रुख करते है। लेकिन अब ये इलाका थाना सेंट्रल कोतवाली के जवानों की बदजुबानी और उनके लट्ठों की घनघनाहट से सराबोर होने लगा है। एक तरफ जहां शहर के कई खाऊ इलाके देर रात तक आबाद रहते हैं वहीं रानीपुरा ओर बम्बई बाजार रात 11 बजते ही कोतवाली के जवान अपना हुनर दिखाना शुरू कर देते है। कभी कभी तो वे वक्त से पहले ही काम पे लग जाते हैं। दो दिन पहले एक गली में हुए मामूली विवाद के बाद पूरे इलाके को जबरिया बंद करवा दिया। व्यापारी परेशान हैं।