नार्वे की कंपनी ने साढ़े 16 अरब रु. का निवेश बाजार में बेच दिया

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मुंबई (ब्यूरो)। हिंडनबर्ग की रिपोर्ट के बाद अडाणी समूह की मुसीबतें अब कम होने का नाम नहीं ले रही है। जहां अभी तक अडाणी के सभी शेयरों में लगातार गिरावट का दौर जारी है तो दूसरी ओर विदेशी निवेशकों ने भी अब अडाणी समूह से अपना पल्ला झाड़ना शुरू कर दिया है। दुनिया के सबसे बड़े स्टॉक निवेशक नार्वे वेल्थ फंड ने अपना सारा निवेश बाजार में बेच डाला है। अडाणी समूह की 3 कंपनियों में 200 मिलियन डॉलर (16,51,35,00,000 रुपए) का निवेश था। अब अडाणी समूह को वापसी में लंबा समय लगेगा। मूल कीमत में खरीदे गए शेयर को अब वापस उसी कीमत में पहुंचने में लम्बा समय लग जाएगा। वहीं आज भी अडाणी समूह के शेयरों में गिरावट का दौर जारी रहा। सुबह शेयर बाजार 150 अंक की गिरावट के साथ शुरू हुआ।
पिछले कई दिनों से विवादों में घिरे अडाणी ग्रुप की कंपनियों के शेयरों को कल एक और बड़ा झटका लगा है। नार्वे वेल्थ फंड ने अडाणी ग्रुप की तीन अलग-अलग कंपनियों में किया निवेश अपने शेयर बेचकर बाहर कर लिया है। कंपनी का कहना है कि अब उनका अडाणी समूह में कोई निवेश नहीं बचा है। नार्वे वेल्थ फंड का कहना है कि अडाणी समूह को लेकर पूरे विश्व में अब नेगेटिव संदेश जा रहा है और इसके चलते बड़े निवेशक अपने शेयरों को बेचकर तेजी से बाहर निकलना चाहते हैं और इसी कारण बाजार का नेगेटिव सेंटिमेंट काम कर रहा है। अडाणी समूह में नार्वे वेल्थ फंड का 200 मिलियन डॉलर का निवेश था। यह निवेश अडाणी पोर्ट, अडाणी ग्रीन, अडाणी टोटल एनर्जी में था। अब माना जा रहा है कि बड़े निवेशकों द्वारा अपने पैसे सुरक्षित करने को लेकर बेचे जा रहे शेयरों के कारण सबसे ज्यादा असर छोटे निवेशकों पर दिखाई देगा। उन्हें जिस कीमत पर शेयर खरीदे थे उसी कीमत तक पहुंचने में कई वर्षों तक इंतजार करना होगा। हालांकि आज भी अडाणी शेयरों की बिकवाली जारी रही। वहीं आज उच्चतम न्यायालय में भी एक साथ लगी कई याचिकाओं पर सुनवाई होनी है।

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