गुस्ताखी माफ़: नए बाहुबली कैसे…दुई पाटन के बीच पिस गए…उधार के सिंदूर में पहले कौन…सलाहकार कौन था…

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नए बाहुबली कैसे…
एक मामला लेनदेन को लेकर द्वारकापुरी थाने में दर्ज हुआ है। मारपीट करने वाले दोनों ही भाजपा नेता ताकतवर है और दोनों ही चार नंबर के सिहांसन से जुड़े हुए हैं। जिसमे से एक पार्षद है और एक एमआईसी सदस्य है। इन दिनों क्षेत्र क्रमांक चार में नये शक्ति केंद्रभी स्थापित होना शुरु हो गये हैं। मामला लेन-देन को लेकर बताया जा रहा है। सवाल उठ रहा कि अभी तक कामकाज ही शुरू नहीं हुआ है, फिर लेन-देन कैसा? हो सकता है जमीन-जायदाद का मामला अब विवाद बढ़ने के बाद यह माहेषमति के महल तक भी पहुंचा है, जहां पर अभी समझौता हो चुका है, वर्ना बैठे बैठाए कटप्पा को बाहुबली की सुपारी देना पड़ती। स्वाभाविक है रियासत में सियासत भी ध्यान रखना पड़ती है।

दुई पाटन के बीच पिस गए…
क्षेत्र क्रमांक 2 की भाजपा में इन दिनों आंतरिक खींचतान नये और पुराने पार्षदों के बीच शुरु हो गई है। बताया जा रहा है कि वार्ड क्रमांक 25 के ताकतवर पूर्व भाजपा पार्षद के नगर निगम में पांच संविदा कर्मचारी काम करते थे। क्या काम करते थे यह तो वे ही जाने परंतु इस वार्ड में नई भाजपा पार्षद के अवतरित हो जाने के बाद पूर्व पार्षद के कर्मचारियों पर संकट खड़ा हो गया है। हो यह रहा है कि नये पार्षद ने इनके वेतन पर रोक लगा दी है। इसे लेकर दो बार आमना सामना भी हो चुका है पर मामला वहीं का वहीं है। नये पार्षद का कहना है कौन है? यह महान कर्मचारी हम भी दर्शन कर लें। पुराने पार्षद ने अभी तक दर्शन नहीं करवाये हैं। उनकी भी इज्जत का सवाल है। एक जमाने में उक्त पूर्व पार्षद का थूका हुआ भी लांघने की हिम्मत किसी की नहीं होती थी। समय है, समय का क्या? इसीलिए कहते हैं समय को बचाइये, समय बे-समय यही काम आता है। जो भी हो, इस मामले में बैठे बिठाये कर्मचारियों का वेतन उलझ गया है। अब मामला दादा दयालु की अदालत में ही सुलझेगा। हालांकि दोनों ही दादा के ही चेले हैं।

उधार के सिंदूर में पहले कौन…
भाजपा के कई दिग्गज नेता जो निगम मंडलों की आस में लगे हुए थे, वे भी अब मान रहे हैं कि अब यह अध्याय समाप्त हो चुका है। जो भी हो इस चुनाव के पहले नियुक्तियों पर ग्रहण लग गया है। इस मामले में भाजपा के एक नेता का कहना है कि वैसे भी उधार के सिंदूर पर टीकी सरकार के लिए अब मजबूरी यह है कि पहले किसका पेट भरे? कार्यकर्ता तो अब घर की जोरु हो गये हैं। कहां जायेंगे? चिंता तो दूसरी की है।

सलाहकार कौन था…
इन दिनों कांग्रेस में विनय बाकलीवाल के सलाहकारों को लेकर बड़ी चर्चा है। राजनीति में कहा जाता है कि यदि सही सलाहकार मिल जाये तो वह चुनावी महाभारत में अर्जुन बन जाता है अन्यथा अंगूठा कटवाकर एकलव्य बनकर घूमा करता है। जो विनय बाकलीवाल इंदौर में कमलनाथ की आंख कान हुआ करते थे वह पद से हटने के बाद अपनी ताकत दिखाने के चक्कर में भोपाल में क्या पहुंचे सारा रायता ऐसा फैलाकी प्रदेशभर तक पहुंच गया। अब समेटने में उनकी उमर लग जायेगी। लोग पूछ रहे हैं कि विनय बाकलीवाल को भोपाल जाकर अपनी ताकत दिखाने का ज्ञान किसने दिया था।
मो. 9826667063

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