
इंदौर। नगर निगम की एमआईसी ने पिछले दिनों सिरपुर तालाब का नाम बदलकर अहिल्या सरोवर रखने का फैसला ले लिया है। महापौर सहित सभी एमआईसी मेंबर ने यह चिंता नहीं जताई है की पिछले 15 वर्षों से तालाब सौंदर्यीकरण के लिए खर्च की जा रही राशि से अब तक विकास कार्य पूर्ण क्यों नहीं हो पाया है।
नगर निगम ने पर्यावरण सुधार के साथ-साथ आबोहवा को बेहतर बनाने के लिए सिरपुर तालाब व आसपास में हरियाली से लेकर अन्य कामों को लेकर अभी तक करोड़ों रुपए पानी की तरह बहा दिए हैं। यहां तक कि सिरपुर तालाब में जलकुंभी हटाने के लिए करोड़ों रुपए खर्च करने के बावजूद अभी तक परेशानी बनी हुई है। फिलहाल यहां सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट बंद है, वही अब तक 6 करोड़ रुपए खर्च करने के बावजूद जलकुंभी नहीं हट पाई है।
हाल ही में नगर निगम की एमआईसी ने सिरपुर तालाब का नाम बदलकर अहिल्या सरोवर रखने का फैसला लिया है। निगम की नई परिषद ने तालाब का नया नामांकरण तो कर दिया, लेकिन नाम नया रखने से पिछले 15 वर्ष और तीन महापौर के कार्यकाल में जारी रहने वाले विकास कार्य पूरे हो पाएंगे। बीते 5 वर्षों से नगर निगम ने सिरपुर तालाब से जलकुंभी हटाने के लिए लगभग 6 करोड़ से अधिक की राशि खर्च कर दी। निगम खजाने से इतनी बड़ी राशि खर्च करने के बावजूद जलकुंभी छोटे सिरपुर तालाब से कम होने की जगह बढ़ गई है।
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अब पूरे तालाब में पानी की जगह जलकुंभी ही दिख रही है। वहीं 38 करोड़ की लागत से बड़े और छोटे सिरपुर तालाब के बीच में एसटीपी प्लांट की योजना बनाई जिसका काम शुरू भी हुआ और शुरू होते ही बंद हो गया है। यहां सालों से सौन्दर्यीकरण के नाम पर केंद्र और राज्य सरकार से मिली करोड़ों रुपए की योजना पर काम हो रहा है, लेकिन सालों बीत जाने के बावजूद अभी तक तालाब के विकास कार्य पूरे नहीं हो पाए हैं। निगम की योजना में सिरपुर तालाब को फिर से पर्यटक स्थल बनाने की योजना थी, लेकिन इस पर काम नहीं हो पाया है।
आबोहवा सुधार के साथ पर्यावरण को बेहतर बनाने के लिए पर्यावरण से जुड़ी संस्थाओं ने जलकुंभी हटाने के लिए सिरपुर तालाब में हस्ताक्षर अभियान भी चलाया और आंदोलन भी किया नतीजा सिफर रहा है। आज भी पूरा तालाब जलकुंभी से ढंक गया है।
निगम का दावा और हकीकत
निगम के अफसर दावा कर रहे हैं कि काम जल्द शुरू होगा, लेकिन काम पूरी तरह से बंद है। तालाब की दुर्दशा की हकीकत यहां दिखई देने वाली जलकुंभी से पता चल जाती है। आसपास की 15 से अधिक कॉलोनियों का सीवरेज का पानी यही आ रहा है। इसकी रोकथाम के निगम के पास कोई उपाय नहीं है और सर्वे के बाद एसटीपी प्लांट लगाने की योजना बनाई और काम शुरू भी हुआ, फिर मामला आगे नहीं बढ़ सका है। सिरपुर तालाब में मशीन पड़ी है, जबकि इस मशीन का किराया प्रति माह 10 से 11 लाख रुपए निर्धारित है। इससे सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि 1 करोड़ 20 लाख रुपए सालाना भुगतान करने के बावजूद जलकुंभी नहीं हटी है।
